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हरियाणा की अफसरशाही बनी लोगों की दुश्मन

Sat, 06 Sep 2014 05:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 06 Sep 2014 05:34 PM IST
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Bureaucracy dominates on file of chief minister's announcements

चुनाव में कर्मचारियों के वोटों की फसल काटने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक पखवाड़े के दौरान जितनी घोषणाएं की हैं। उन घोषणाओं की फाइलों पर अफसर कुंडली मारे बैठे हैं।

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इनमें ज्यादातर घोषणाएं सरकारी कर्मचारियों के हितों से जुड़ी हैं। अफसरों को इन घोषणाओं की अधिसूचना चुनाव आचार संहिता लगने से पहले जारी करना है। वरना ये सभी घोषणाएं अधिसूचना के बगैर हवा-हवाई साबित हो सकती हैं।
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद मानी हुई मांगों की अधिसूचनाएं जारी न होने से प्रदेश के कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ रही है। लांबा के मुताबिक किसी भी समय आदर्श चुनाव आचार संहिता लग सकती है और मामले लटक सकते हैं।

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ये है सरकार की बड़ी घोषणाएं

Bureaucracy dominates on file of chief minister's announcements

अधिसूचना के बगैर फाइलों में लटकी घोषणाओं में पंजाब के समान वेतनमान देने, वेतन/ग्रेड-पे के मामले निपटाने के लिए आयोग गठन करने, स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न केंद्रीय परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों के वेतनमान में बढ़ोतरी करने से संबं‌धित है।

रेगुलर होने से वंचित कर्मचारियों के वेतनमान में बढ़ोतरी करने, कुरुक्षेत्र से निकाले गए करीब 1400 कच्चे कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लेने और तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नियमित करने की नीति की सभी शर्तें पूरी करने वाले अनुबंध टीचरों को पक्का करना शामिल है।

इसी प्रकार पेंशन लाभ 28 की बजाय 20 वर्ष करने, अनियमित व अनुबंध कर्मचारियों की मृत्यु पर तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने, केंद्रीय प्रोजेक्टों में कार्यरत कर्मचारियों व पक्के होने से वंचित कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने, अस्थायी पदों को स्थायी में बदलने और मेडिकल भत्ता, यात्रा भत्ता, धुलाई भत्ता व वर्दी भत्ता की दरों में बढ़ोतरी करने की अधिसूचना भी अभी जारी नहीं हुई है।

महासचिव सुभाष लांबा ने सरकार को आगाह किया कि इन घोषणाओं पर आचार संहिता से पहले अधिसूचना जारी न हुई तो सरकार को चुनाव में इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

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