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टूट गए आशियाने, एक दिन में 25 हजार परिवार बेघर
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 21 Nov 2013 05:17 PM IST
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बुलडोजर ने एक झटके में ही सैकड़ों परिवारों को सड़क पर ला दिया। लोग चुपचाप खड़े होकर अपने आशियाने को अपनी ही आंखों के सामने मलबे का ढेर बनते देख रहे थे।
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वे कर भी क्या सकते थे? प्रशासन ने कुछ लोगों को तो पुनर्वास योजना केतहत घर दे दिए, लेकिन बड़ी संख्या में परिवार अभी भी इन झुग्गियों के सहारे ही थे। अब वे सब बेघर हो चुके हैं और किसी के पास कोई ठिकाना नहीं रहा है।
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बेशक कालोनी नंबर-5 के पास से गुजरते ही लोग अपना मुंह रुमाल से ढक लेते थे, लेकिन फिर भी वह जगह हजारों परिवारों को रहने के लिए छत दे रही थी।
जानकी अब लखनऊ के पास अपने गांव जाएगी। अब उसका यहां पर कुछ भी नहीं बचा। कोठी में काम करके गुजार करनेवाली अब यहां रहेगी भी तो कहां? रानी का भी यही हाल है।
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बी ब्लॉक निवासी अनिल कुमार का कहना है कि उनके पास सभी प्रूफ होने के बाद भी फ्लैट नहीं दिया। अब परिवार और बच्चों को लेकर कहां जाएं?। यहीं की रहनेवाली सुनीता रो रही थी। एक दिन का भी मौका नहीं दिया।
सामान भी मलबे के ढेर में ही दब गया। बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो जाएगा।
रतन तो सड़क पर ही सामान छोड़कर किराये का मकान ढूंढने चला गया। कई को मकान मिल गए तो कई रात तक मकान ढूंढते रहे।
कागज दिखाए बात नहीं बनी...
कॉलोनी नंबर पांच के काफी संख्या में लोगों ने अपने सभी दस्तावेज दिखाए लेकिन अधिकारियों ने एक भी नहीं सुनी। अधिकारियों ने कहा कि सेक्टर-42 के एस्टेट ऑफिस के कैंप में भी लोगों ने नारेबाजी की।
लोगों ने बढ़ाए घरों के किराए
अपने घर को टूटता देखने से अच्छा कुछ लोग सुबह ही बुड़ैल में घर ढूंढने निकल पड़े। एक साथ इतने लोगों को बेघर देख बुड़ैल में लोगों ने अपने घरों के किराये में बढ़ा दिए।