{"_id":"57bee8ac4f1c1b305fd4ef4d","slug":"bronze-medal-winner-in-rio-olympic-wrestler-sakshi-malik-first-coach-madia-pehelwan","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मिलिए, साक्षी के पहले गुरू से, 18 साल पहले इनसे ही सीखीं पहला दांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिलिए, साक्षी के पहले गुरू से, 18 साल पहले इनसे ही सीखीं पहला दांव
आदेश चौधरी/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Fri, 26 Aug 2016 09:46 AM IST
विज्ञापन
ओलंपिक मेडल विजेता साक्षी मलिक का स्वागत
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साक्षी की प्रतिभा को मोखरा के माड़िया पहलवान ने आज से 18 साल पहले ही परख लिया था। माड़िया ही साक्षी को पहला दांव सिखाने वाले कोच हैं। वे मोखरा में शिव शंकर अखाड़ा चलाते हैं। साक्षी के ओलंपिक में पदक जीतने के बाद वे भी खुशी से गदगद थे। उन्हें मंच पर बुलाकर सम्मानित भी किया गया।
जब साक्षी मलिक ने पहला दांव सिखाने वाले माड़िया पहलवान के बारे में शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को बताया तो उन्होंने उन्हें सम्मान के तौर पर 10 लाख रुपये देने की घोषणा कर दी। साक्षी के पिता सुखबीर मलिक जब गांव में रहते थे तो वे माड़िया पहलवान के अखाड़े में चले जाया करते थे। लगभग 18 साल पहले एक दिन सुखबीर साक्षी को भी अपने साथ अखाड़े में ले गए।
माड़िया पहलवान साक्षी को अखाड़े में ले गए तथा उसके साथ खेलने लगे। उस समय साक्षी की उम्र पांच साल थी। उसके बाद अकसर सुखबीर मलिक साक्षी को अपने साथ अखाड़े में ले जाने लगे थे। माड़िया पहलवान ने तब सुखबीर मलिक को कहा था कि ये लड़की एक दिन बड़ी पहलवान बनेगी। इसे कुश्ती का अभ्यास जरूर कराते रहना।
विज्ञापन
विज्ञापन
जब साक्षी मलिक ने पहला दांव सिखाने वाले माड़िया पहलवान के बारे में शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को बताया तो उन्होंने उन्हें सम्मान के तौर पर 10 लाख रुपये देने की घोषणा कर दी। साक्षी के पिता सुखबीर मलिक जब गांव में रहते थे तो वे माड़िया पहलवान के अखाड़े में चले जाया करते थे। लगभग 18 साल पहले एक दिन सुखबीर साक्षी को भी अपने साथ अखाड़े में ले गए।
विज्ञापन
माड़िया पहलवान साक्षी को अखाड़े में ले गए तथा उसके साथ खेलने लगे। उस समय साक्षी की उम्र पांच साल थी। उसके बाद अकसर सुखबीर मलिक साक्षी को अपने साथ अखाड़े में ले जाने लगे थे। माड़िया पहलवान ने तब सुखबीर मलिक को कहा था कि ये लड़की एक दिन बड़ी पहलवान बनेगी। इसे कुश्ती का अभ्यास जरूर कराते रहना।
विज्ञापन
आज मेरी उम्र पांच साल बधगी
Sakshi Malik
- फोटो : Amar Ujala
माड़िया पहलवान ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए ठेठ हरियाणवी में कहा कि ‘साक्षी नैं ओलंपिक म्हैं मैडल जीत कै इस देश की इज्जत बचा दी। यो देश इस लाडली का अहसान नहीं भूल नहीं सकदा। साक्षी नैं जब तैं जाणू सूं, जब वा छोटी सी अखाड़ै में पहली बार आई थी।
इब तो मैं बूढ्ढ़ा होग्या, पर साक्षी नैं मैडल जीत के मेरी उम्र पांच साल बधा दी। साक्षी नैं सबतैं पहल्यां शिव शंकर अखाड़े में कुश्ती की प्रेक्टिस करी थी। यो मैडल जीत के साक्षी नैं अखाड़े की माटी की लाज राख दी।’
शिक्षा मंत्री ने 10 लाख देने की घोषणा की
जब शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा मंच से संबोधित कर रहे थे तो उनको बताया गया कि माड़िया पहलवान ने गांव के कई बच्चों को कुश्ती के दांव पेंच सिखाए हैं। साक्षी भी बचपन में उनके अखाड़े में गई थी। इस पर राम बिलास शर्मा ने उन्हें भी सरकार की ओर से 10 लाख रुपये देने की घोषणा कर दी।
इब तो मैं बूढ्ढ़ा होग्या, पर साक्षी नैं मैडल जीत के मेरी उम्र पांच साल बधा दी। साक्षी नैं सबतैं पहल्यां शिव शंकर अखाड़े में कुश्ती की प्रेक्टिस करी थी। यो मैडल जीत के साक्षी नैं अखाड़े की माटी की लाज राख दी।’
शिक्षा मंत्री ने 10 लाख देने की घोषणा की
जब शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा मंच से संबोधित कर रहे थे तो उनको बताया गया कि माड़िया पहलवान ने गांव के कई बच्चों को कुश्ती के दांव पेंच सिखाए हैं। साक्षी भी बचपन में उनके अखाड़े में गई थी। इस पर राम बिलास शर्मा ने उन्हें भी सरकार की ओर से 10 लाख रुपये देने की घोषणा कर दी।