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पूर्व क्रिकेटर गुंडप्पा विश्वनाथ की आत्मकथा पर लिखी किताब ‘रिस्ट अश्योर्ड’ का यूटी गेस्ट हाउस में विमोचन
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चंडीगढ़। आज का युवा क्रिकेटर आईपीएल में प्रदर्शन करना सबसे महत्वपूर्ण समझता है लेकिन उसे यह याद रखना चाहिए कि डॉमेस्टिक क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन देकर ही एक बेहतर खिलाड़ी बन सकता है। अभिभावक अपने बच्चों के रातोंरात स्टार क्रिकेट बनने का सपना न देखें। उन पर बोझ न डालें और उन्हें खुद को साबित करने का मौका दें। यह कहना है रिस्टी क्रिकेट के नाम से मशहूर पूर्व क्रिकेटर गुंडप्पा विश्वनाथ का। वे शनिवार को अपनी आत्मकथा पर लिखी किताब ‘रिस्ट अश्योर्ड’ का विमोचन के लिए शहर में थे। कार्यक्रम का आयोजन यूटी गेस्ट हाउस में हुआ। यहां पर उनके प्रशंसकों के साथ स्टेज पर मोटेवेशनल स्पीकर विकेक अत्रे और डॉ. एच के बाली भी मौजूद रहे। मंच पर प्रशंसकों के साथ गुंडप्पा विश्वनाथ ने अपने समय की क्रिकेट से जुड़ी बातों को शेयर किया और उनके सवालों का जवाब भी दिए।
डोमेस्टिक क्रिकेट पर ध्यान दें
विश्वनाथ ने एक क्रिकेट पिता के सवाल के जवाब में कहा कि बेहतर बल्लेबाज बनाने के लिए युवा क्रिकेटर को अपना अधिक से अधिक समय विकेट पर गुजरना चाहिए। आते ही लंबे लंबे हिट के बारे में मत सोचे। कुछ समय पिच पर समय बिताए। इसके बाद जब गेंदबाज की गेंदों का अनुमान लग जाए तो शॉट लगाने की शुरुआत करे। वहीं उन्होंने युवा को सलाह देते हुए कहा कि वह डोमेस्टिक क्रिकेट को गंभीरता से लें। जितना समय वह डोमेस्टिक क्रिकेट में बिताएंगे उतना ही उन्हें बल्लेबाजी का अनुभव होता चला जाएगा जो भविष्य में उनके अंत्तरराष्ट्रीय क्रिकेट में काम आएगा।
गुंडप्पा विश्वनाथ के बारे में कहा जाता था कि उनकी कलाइयों में काफी जान है। जब वो स्क्वायर कट खेला करते थे तो बल्ले से गेंद लगने की आवाज पूरे स्टेडियम में गूंजा करती थी। लेकिन एक जमाना ऐसा भी था कि विश्वनाथ के लगाए शॉट बाउंड्री तक नहीं पहुंच पाते थे। तब टाइगर पटौदी ने उन्हें सलाह दी थी। विश्वनाथ ने अपनी आत्मकथा ‘रिस्ट अश्योर्ड’ में लिखी बात को शेयर करते हुए कहा कि हैदराबाद के खिलाफ रणजी मैच के बाद पटौदी मेरे पास आए और पूछा क्या तुम जिम में कुछ वक्त बिताते हो। मैंने कहा नहीं। इसके बाद ने मुझसे कहा कि क्या तुम्हारे घर में बाल्टियां हैं। जब मैंने कहा हां तो पटौदी ने कहा- दो बाल्टियों को पूरी तरह पानी से भर लो और उनको दोनों हाथों से पकड़कर दिन में तीन-चार बार लगातार बीस बार उठाओ। मैंने उस समय सोचा टाइगर मजाक कर रहे हैं, लेकिन पटौदी की सलाह का पालन करना शुरू कर दिया। एक महीने के अंदर मुझे इसका असर दिखना शुरू हो गया और मेरी कलाइयां मजबूत होती चली गईं।
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बॉक्स
चेन्न्ई से मिलने पहुंचा प्रशंसक
यूटी गेस्ट में में किताब के विमोचन पर गुंडप्पा विश्वनाथ का एक प्रशंसक खासतौर पर चेन्नई से शहर पहुंचा था। प्रशंसक आनंद अपने आदर्श क्रिकेटर को आंखों के सामने देखकर नतमस्तक हो गए। आंनद ने कहा कि आप युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणादायक हो। आपसे मिलने के लिए काफी समय से लगा हुआ था, लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाया। आज मुझे मिलने का मौका मिला है।
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यशपाल शर्मा को याद किया
इस मौके पर गुंडप्पा विश्वनाथ ने भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर यशपाल शर्मा को याद करते हुए कहा कि वह कमाल के क्रिकेटर थे। वह 1983 में कपिल देव की अगुवाई में विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्य थे। यशपाल शर्मा पिछले साल इस दुनिया का अलविदा कह गए थे। वहीं गुंडप्पा विश्वनाथ ने कहा कि मुझे कपिल के शहर चंडीगढ़ पहुंचकर बहुत अच्छा लगा।
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डोमेस्टिक क्रिकेट पर ध्यान दें
विश्वनाथ ने एक क्रिकेट पिता के सवाल के जवाब में कहा कि बेहतर बल्लेबाज बनाने के लिए युवा क्रिकेटर को अपना अधिक से अधिक समय विकेट पर गुजरना चाहिए। आते ही लंबे लंबे हिट के बारे में मत सोचे। कुछ समय पिच पर समय बिताए। इसके बाद जब गेंदबाज की गेंदों का अनुमान लग जाए तो शॉट लगाने की शुरुआत करे। वहीं उन्होंने युवा को सलाह देते हुए कहा कि वह डोमेस्टिक क्रिकेट को गंभीरता से लें। जितना समय वह डोमेस्टिक क्रिकेट में बिताएंगे उतना ही उन्हें बल्लेबाजी का अनुभव होता चला जाएगा जो भविष्य में उनके अंत्तरराष्ट्रीय क्रिकेट में काम आएगा।
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गुंडप्पा विश्वनाथ के बारे में कहा जाता था कि उनकी कलाइयों में काफी जान है। जब वो स्क्वायर कट खेला करते थे तो बल्ले से गेंद लगने की आवाज पूरे स्टेडियम में गूंजा करती थी। लेकिन एक जमाना ऐसा भी था कि विश्वनाथ के लगाए शॉट बाउंड्री तक नहीं पहुंच पाते थे। तब टाइगर पटौदी ने उन्हें सलाह दी थी। विश्वनाथ ने अपनी आत्मकथा ‘रिस्ट अश्योर्ड’ में लिखी बात को शेयर करते हुए कहा कि हैदराबाद के खिलाफ रणजी मैच के बाद पटौदी मेरे पास आए और पूछा क्या तुम जिम में कुछ वक्त बिताते हो। मैंने कहा नहीं। इसके बाद ने मुझसे कहा कि क्या तुम्हारे घर में बाल्टियां हैं। जब मैंने कहा हां तो पटौदी ने कहा- दो बाल्टियों को पूरी तरह पानी से भर लो और उनको दोनों हाथों से पकड़कर दिन में तीन-चार बार लगातार बीस बार उठाओ। मैंने उस समय सोचा टाइगर मजाक कर रहे हैं, लेकिन पटौदी की सलाह का पालन करना शुरू कर दिया। एक महीने के अंदर मुझे इसका असर दिखना शुरू हो गया और मेरी कलाइयां मजबूत होती चली गईं।
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चेन्न्ई से मिलने पहुंचा प्रशंसक
यूटी गेस्ट में में किताब के विमोचन पर गुंडप्पा विश्वनाथ का एक प्रशंसक खासतौर पर चेन्नई से शहर पहुंचा था। प्रशंसक आनंद अपने आदर्श क्रिकेटर को आंखों के सामने देखकर नतमस्तक हो गए। आंनद ने कहा कि आप युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणादायक हो। आपसे मिलने के लिए काफी समय से लगा हुआ था, लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाया। आज मुझे मिलने का मौका मिला है।
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यशपाल शर्मा को याद किया
इस मौके पर गुंडप्पा विश्वनाथ ने भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर यशपाल शर्मा को याद करते हुए कहा कि वह कमाल के क्रिकेटर थे। वह 1983 में कपिल देव की अगुवाई में विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्य थे। यशपाल शर्मा पिछले साल इस दुनिया का अलविदा कह गए थे। वहीं गुंडप्पा विश्वनाथ ने कहा कि मुझे कपिल के शहर चंडीगढ़ पहुंचकर बहुत अच्छा लगा।