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जिंदा थी तो अंगदान के लिए जागरूक किया, मौत के बाद चार को दी जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 03 Feb 2017 09:46 AM IST
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- फोटो : Demo Pic
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जीरकपुर की 23 वर्षीय प्रियंका की जिंदादिली लोगों के लिए मिसाल बन गई है। जब तक जिंदा थीं, दूसरों को अंगदान और रक्तदान के लिए जागरूक किया, जब मौत हुई तो चार लोगों को जाते-जाते जिंदगी दे गईं।
रोड एक्सीडेंट के बाद प्रियंका पीजीआई में दाखिल हुई थी। ब्रेन डेड होने के बाद वीरवार सुबह उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया। परिजनों ने बेटी की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने में जरा देरी नहीं की। परिजनों की सहमति के बाद पीजीआई ने उसकी किडनी और कोर्निया सफलतापूर्वक निकाल लिया। किडनी दो पेशेंट में ट्रांसप्लांट भी कर दी गई, जबकि कोर्निया को संभालकर रख दिया गया है। कोर्निया दो मरीजों में लगाया जा सकता है।
प्रियंका अंग और रक्तदान अभियान से जुड़ी थी। श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रेसिडेंट राकेश संगर ने बताया कि प्रियंका उनकी सबसे मेहनती और कर्मठ वालंटियर थी। एक भी कैंप वह मिस नहीं करती थी। उसका काम लोगों को अंगदान और रक्तदान के लिए प्रेरित करना था। बिना किसी स्वार्थ के वह हर कैंप में आती और अपना पूरा समय देती थी। उसका शुरू से ही सामाजिक कार्यों के प्रति लगाव था।
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रोड एक्सीडेंट के बाद प्रियंका पीजीआई में दाखिल हुई थी। ब्रेन डेड होने के बाद वीरवार सुबह उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया। परिजनों ने बेटी की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने में जरा देरी नहीं की। परिजनों की सहमति के बाद पीजीआई ने उसकी किडनी और कोर्निया सफलतापूर्वक निकाल लिया। किडनी दो पेशेंट में ट्रांसप्लांट भी कर दी गई, जबकि कोर्निया को संभालकर रख दिया गया है। कोर्निया दो मरीजों में लगाया जा सकता है।
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प्रियंका अंग और रक्तदान अभियान से जुड़ी थी। श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रेसिडेंट राकेश संगर ने बताया कि प्रियंका उनकी सबसे मेहनती और कर्मठ वालंटियर थी। एक भी कैंप वह मिस नहीं करती थी। उसका काम लोगों को अंगदान और रक्तदान के लिए प्रेरित करना था। बिना किसी स्वार्थ के वह हर कैंप में आती और अपना पूरा समय देती थी। उसका शुरू से ही सामाजिक कार्यों के प्रति लगाव था।
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पुणे में एक्सीडेंट में घायल हुई प्रियंका का पीजीआई में चल रहा था इलाज
जीरकपुर में रहने वाली प्रियंका अपनी सहेलियों से मिलने गोवा गई थी। जब वह गोवा से पुणे वापस लौट रही थी, तभी सतार जिले के पास कैब ड्राइवर से गाड़ी अनियंत्रित हो गई और रोड की डिवाइडिंग पर लगे लोहे की रेलिंग से टकरा गई। इससे प्रियंका बुरी तरह से घायल हो गई।
परिजनों को सूचना मिलते ही वे पुणे पहुंचे और उसे एंबुलेंस से लेकर 27 जनवरी को पीजीआई पहुंचे। दो फरवरी सुबह उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया। कार्डियक अरेस्ट के बाद अंगों को निकालना आसान नहीं होता, लेकिन ट्रांसप्लांट सर्जरी के एचओडी डॉ. आशीष शर्मा के नेतृत्व में टीम ने किडनी और कोर्निया को सुरक्षित निकाल लिया और दो लोगों में किडनी ट्रांसप्लांट कर दी गई।
इससे डायलिसिस पर जीने के लिए मजबूर लोगों को नई जिंदगी मिल गई है, जबकि कोर्निया को संभाल कर रख लिया गया है, जिसे बाद में ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। पीजीआई रोटो के नोडल अफसर डॉ. विपिन कौशल ने कहा कि जो दूसरों के लिए जीते हैं और मरते वक्त भी दूसरों की मदद करते हैं वही हमारे रियल हीरो होते हैं।
परिजनों को सूचना मिलते ही वे पुणे पहुंचे और उसे एंबुलेंस से लेकर 27 जनवरी को पीजीआई पहुंचे। दो फरवरी सुबह उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया। कार्डियक अरेस्ट के बाद अंगों को निकालना आसान नहीं होता, लेकिन ट्रांसप्लांट सर्जरी के एचओडी डॉ. आशीष शर्मा के नेतृत्व में टीम ने किडनी और कोर्निया को सुरक्षित निकाल लिया और दो लोगों में किडनी ट्रांसप्लांट कर दी गई।
इससे डायलिसिस पर जीने के लिए मजबूर लोगों को नई जिंदगी मिल गई है, जबकि कोर्निया को संभाल कर रख लिया गया है, जिसे बाद में ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। पीजीआई रोटो के नोडल अफसर डॉ. विपिन कौशल ने कहा कि जो दूसरों के लिए जीते हैं और मरते वक्त भी दूसरों की मदद करते हैं वही हमारे रियल हीरो होते हैं।