चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: भाजपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती, आम आदमी पार्टी के ताल ठोकने से दिलचस्प होगा मुकाबला
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। सभी पार्टियों के प्रत्याशियों ने मोर्चा संभाल लिया है। नामांकन पत्र चुनाव आयोग से स्वीकृत होने के बाद चुनावी बिगुल भी बज चुका है।
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चंडीगढ़ निगम चुनाव में इस बार भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने गढ़ को बचाने की है, वहीं विपक्ष ने भाजपा के किले में सेंध लगाने के लिए घेराबंदी कर दी है। वर्तमान में 26 वार्डों में से 20 सीटों पर भाजपा काबिज है। वहीं पांच पर कांग्रेस और एक पर अकाली दल का कब्जा है। इस बार 13 गांव निगम में शामिल होने से वार्डों की संख्या बढ़ाकर 35 कर दी गई है। आम आदमी पार्टी के मैदान में उतरने से इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है, क्योंकि अब किसका वोट किस तरफ जाएगा, यह अनुमान लगाना राजनीतिक पार्टियों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। वहीं राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भी भाजपा का वोट छिटकने का डर है।
निगम चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। सभी पार्टियों के प्रत्याशियों ने मोर्चा संभाल लिया है। नामांकन पत्र चुनाव आयोग से स्वीकृत होने के बाद चुनावी बिगुल भी बज चुका है। इसकी गूंज के साथ ही शह और मात की योजनाएं बनने लगी हैं। इस बार प्रत्याशियों के लिए मुश्किल इसलिए भी है क्योंकि उनके पुराने वार्डों के हिस्से सीमांकन के साथ नए वार्डों के साथ जुड़ गए। पुराने पार्षदों को भी अब नए प्रत्याशियों की तरह नए सिरे से रणनीति तैयार करनी होगी। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने किले को बचा पाती है या विपक्ष उसमें सेंध लगाकर निगम में नई सरकार लाने में सफल होती है।
निर्दलीय भी लेंगे उम्मीदवारों की परीक्षा
भाजपा के सामने इस बार केवल कांग्रेस ही नहीं है। आप के अलावा अब तक गठबंधन में लड़ने वाली शिरोमणि अकाली दल ने भी सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं सभी राजनीतिक पार्टियों की परीक्षा लेने के लिए इस बार 75 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। ऐसे में भाजपा की राह आसान नहीं होगी। अब इनमें से नाम वापसी के बाद जो लोग मैदान में बचेंगे, उनका मुकाबला चुनाव में रहेगा।
भाजपा नगर निगम चुनाव प्रभारी की योजना, दिल्ली मॉडल पर लड़ेंगे चुनाव
भाजपा नगर निगम चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े ने अपनी भी एक टीम को लगाकर रखा है। यह टीम चुनाव की पूरी योजना और प्रत्याशियों की स्थिति के बारे में लगातार आलाकमान को अपडेट कर रही है। इस बार भाजपा भी दिल्ली मॉडल पर चुनाव लड़ रही है। जिस तरह वहां बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन और चौराहों पर लोगों की नजरों के सामने भाजपा व आप ने बैनर लगाकर अपनी योजनाओं का बखान किया है, उसी तर्ज पर अब चंडीगढ़ में साइकिल स्टैंड व टॉयलेट पर होर्डिंग लगाकर प्रचार की योजना बनी है। मंगलवार से साइकिल स्टैंड पर पोस्टर लगना भी शुरू हो गया है। हालांकि आप इसमें भी बाजी मार चुकी है। उसने पहले ही टॉयलेट ब्लॉक पर केजरीवाल के फोटो व बैनर लगवाकर प्रचार प्रसार शुरू कर दिया है।
आगामी पांच राज्यों की तैयारी है चंडीगढ़ निगम चुनाव
भाजपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी साख का सवाल बना हुआ है कि क्योंकि आगामी दिनों में पांच राज्यों पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव हैं। इसमें दो राज्य चंडीगढ़ से सटे हैं। वहीं पूर्वांचल के भी काफी लोग चंडीगढ़ में रहते हैं, यह उत्तर प्रदेश के लिए भी लिटमस टेस्ट होगा। इसलिए भाजपा निगम चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगी है। दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक के सभी पदाधिकारी भाजपा को सत्ता में लाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने में लगे हैं।