फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   BJP could not win Baroda by-election, fourth consecutive victory of Congress

बरोदा की बंजर धरती पर कमल खिलाने का सपना टूटा, सत्ता में चार साल बाकी होने के बावजूद हारे रण

Wed, 11 Nov 2020 01:55 PM IST
ajay kumar प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 11 Nov 2020 01:55 PM IST
विज्ञापन
BJP could not win Baroda by-election, fourth consecutive victory of Congress
chandigarh - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा में बरोदा की बंजर धरती पर कमल खिलाने का भाजपा का सपना टूट गया है। सत्ता के चार साल शेष होने के बावजूद यहां पर भाजपा विकास का जादू नहीं चला पाई। सत्ता में रहते हुए पार्टी के लिए यह उपचुनाव हारना किसी सदमे से कम नहीं है। पार्टी के शीर्ष नेता इस बाबत समीक्षा करेंगे तो फजीहत प्रदेश नेतृत्व को झेलनी पड़ेगी।

विज्ञापन


फिलहाल भाजपा-जजपा का गठबंधन और बीजेपी के जाट नेताओं की लंबी चौड़ी फौज को यहां के मतदाताओं ने नकार दिया है। सरकार ने 165 करोड़ के लंबे चौड़े वादे किए थे जो यहां काम नहीं आए। करीब 200 करोड़ के विकास कार्यों का सपना और आईएमटी का वादा भी यहां की जनता ने नकार दिया। बरोदा की हार के साथ ही योगेश्वर दत्त की गाड़ी पर झंडी लगाने का सपना भी टूट कर चकनाचूर हो गया। 
विज्ञापन


भाजपा ने इस जाट बाहुल्य सीट पर कब्जा जमाने के लिए अपनी पार्टी के जाट नेताओं को सक्रिय किया था। चुनाव से पहले केंद्र ने प्रदेश में जाट प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ को संगठन की कमान सौंप कर इस सीट पर कब्जा करना चाहा था, जो कि नहीं हो सका। ओम प्रकाश धनखड़, कैप्टन अभिमन्यु, सुभाष बराला, जेपी दलाल जैसे नेता भी यहां की जनता को भाजपा की झोली में वोट डालने के लिए मना नहीं पाए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

ताऊ देवीलाल की विरासत के लिए वोट मांगने वाले जेजेपी के नेताओं की सभाएं करवाने के बावजूद यहां शिकस्त का मुंह देखना पड़ा है। सरकार में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला उनके छोटे भाई दिग्विजय चौटाला और पिता अजय चौटाला का आना भी यहां के मतदाताओं को बांध नहीं सका। अंतत : यह सीट यहां से लगातार जीतती आ रही कांग्रेस की झोली में चली गई। जिसे लेकर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुडडा और उनके सुपुत्र दीपेंद्र हुडडा फूले नहीं समा रहे हैं।

 यह है गणित 
भाजपा को एक साल पहले हुए बरोदा चुनाव में 32,214 और जजपा को 26,932 मत मिले थे, जबकि कांग्रेस को 36,851 मत प्राप्त हुए थे, लेकिन इस उपचुनाव में कांग्रेस को 60,132 मत प्राप्त हुए, यह मत पिछले चुनाव से 23,281 अधिक हैं। भाजपा को इस चुनाव में 50,176 मत मिले। भाजपा जजपा गठबंधन यह मान कर चल रहा था कि इस बार भी पिछला मत प्रतिशत मिल जाएगा तो चुनाव जीत जाएंगे, लेकिन गठबंधन होने के बावजूद यह आंकड़ा पिछले चुनाव के बराबर भी नहीं पहुंच सका।

हुडडा का कद बढ़ा
बरोदा में लगातार चौथी बार कांग्रेस की जीत से हुड्डा का कद आलाकमान के सामने बढ़ गया है। हुड्डा पिता-पुत्र की मेहनत इस चुनाव में रंग लाई और सरकार का पूरा जोर होने के बावजूद वे चुनाव जीत गए। विधानसभा चुनाव में 29 सीटे जीतने के बाद यह उपचुनाव मिलाकर अब कांग्रेस के खाते में 30 सीटे आ गई हैं।

बड़े चौटाला का जादू भी नहीं चला
बरोदा के रण में यह माना जा रहा था कि बड़े चौटाला के मैदान में आने से इनेलो को बड़ी बढ़त मिलेगी, लेकिन यहां भी पिता-पुत्र की जी-तोड़ मेहनत के बावजूद वोटों का यह आंकड़ा दस हजार तक भी नहीं पहुंच पाया। पिता ओम प्रकाश चौटाला और पुत्र अभय सिंह चौटाला ने बरोदा चुनाव में जीत के लिए काफी पसीना बहाया लेकिन जनता जनार्दन ने कांग्रेस को चुना।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed