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असमंजस में पंजाब भाजपा के मंत्री, मुख्यालय से बनाई दूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 25 Feb 2016 12:59 PM IST
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पंजाब भाजपा में बदलाव को लेकर असमंजस के चलते असमंजस चल रहा है, जिसके चलते पार्टी मंत्रियों ने अपने ही मुख्यालय से दूरी बना ली है। पिछले करीब छह महीने से कोई भी मंत्री नियमित तौर पर चंडीगढ़ स्थित पार्टी दफ्तर नहीं पहुंचा है। इतना ही नहीं, प्रदेश भाजपा प्रधान कमल शर्मा भी लंबे अरसे बाद मंगलवार को मुख्यालय पहुंचे।
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प्रदेश भाजपा में संगठन चुनाव की कवायद अगस्त-2015 से शुरू हुई थी। इसी के साथ चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के साथ-साथ मंत्रिमंडल में भी बदलाव हो सकता है। उसी के बाद से मंत्री और पदाधिकारी असमंजस की स्थिति में थे। सभी के अंदर अपने सियासी भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति थी।
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चारों मंत्रियों ने पार्टी मुख्यालय जाना ही बंद कर दिया। पार्टी द्वारा घोषित प्रोग्राम के मुताबिक चारों मंत्रियों को हर हफ्ते मंगलवार और बुधवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में बैठना था। उन्हें राज्यभर से आए वर्करों की समस्याएं सुननी थीं और उनके काम करवाने थे, लेकिन करीब छह महीने से कोई भी मंत्री नियमित रूप से मुख्यालय बैठा ही नहीं।
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अनिल जोशी अपने हलकेअमृतसर में व्यस्त रहे तो सुरजीत ज्याणी फाजिल्का में मसरूफ रहे। भगत चुन्नी लाल स्वास्थ्य संबंधी कारणों केचलते बहुत ही जरूरी होने पर चंडीगढ़ आते हैं। उनका कामकाज भी उनके बेटे महिंदर भगत संभालते हैं। मदन मोहन मित्तल इस दौरान एक-दो बार जरूर पार्टी दफ्तर गए।
मंत्रियों की गैर मौजूदगी के चलते सूबे भर केवर्करों में काफी निराशा है। जिलास्तर पर तो उनकी सुनवाई है नहीं, प्रदेश स्तर पर मंत्री भी बात सुनने के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं। करीब डेढ़ महीने पहले प्रदेश प्रधानगी को लेकर जबरदस्त जोड़-तोड़ शुरू हो गई।
उसके बाद से तो प्रदेश प्रधान कमल शर्मा भी पार्टी दफ्तर नहीं गए। लेकिन केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा पंजाब की कमान संभालने के बाद शर्मा को ऑक्सीजन मिली। हाईकमान ने उन्हें साफ संकेत दे दिए कि फिलहाल पंजाब में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके बाद शर्मा मंगलवार को मुख्यालय गए। उनके साथ जगतार सैनी, राकेश राठौर व सुभाष शर्मा भी थे। इस दौरान प्रदेश संगठन मंत्री दिनेश कुमार भी मुख्यालय पहुंचे।