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स्टिंगः व्हाट्सएप ग्रुपों पर आरटीए, एसडीएम की लोकेशन शेयर कर राजस्व विभाग को करोड़ों का चूना

Mon, 26 Aug 2019 02:14 PM IST
ajay kumar महबूब अली, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
महबूब अली, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Mon, 26 Aug 2019 02:14 PM IST
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Big Reveals On Overload Vehicle Monthly Recovery Case
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

ओवरलोड वाहन मंथली प्रकरण में चरखी दादरी के तत्कालीन आरटीए सहायक सचिव, क्लर्क समेत पांच की गिरफ्तारी के बाद बेशक तत्कालीन आईएएस दंपति पर भी शिकंजा कसने की तैयारी चल रही है। लेकिन, दूसरी ओर हरियाणा, दिल्ली और यूपी के गिरोह ने ओवरलोड वाहनों को बचाने का नया तरीका निकाल लिया है। 

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गिरोह ने विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से हेल्पलाइन मलिक नाम से दस से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए लिए हैं। हरियाणा, दिल्ली और वेस्ट यूपी में विभिन्न मार्गों पर वाहनों में तैनात गुर्गे जैसे ही अधिकारियों की गाड़ी गुजरती है, तुरंत ही ग्रुप में शामिल ट्रक चालकों और ट्रांसपोर्टरों को अलर्ट कर देते हैं।
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 इसके बाद 24 घंटे तीनों राज्यों में से किसी भी जिले के आरटीए और प्रशासनिक अधिकारियों की लोकेशन मात्र 10 से 15 सेकेंड के अंदर ही सबको मिल जाती है और प्रशासन को हर माह करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। 

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ग्रुप में शामिल होने के लिए 1500 से 2 हजार रुपये तक खर्च करने होते हैं। अमर उजाला रिपोर्टर ने 15 दिन तक गिरोह के गुर्गों द्वारा चलाए जा रहे ग्रुप में शामिल होकर स्टिंग किया तो पूरे मामले का खुलासा हो गया। वहीं, इस प्रकरण में हरियाणा के परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार का कहना है कि गिरोह के बारे में जानकारी नहीं है। 

मामला गंभीर है। जांच कराकर इसका पूरी तरह से भंडाफोड़ किया जाएगा। जबकि यूपी के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर धीरज शाहू ने कहा कि गिरोह के गुर्गों के साथ - साथ जांच कराई जाएगी कि कहीं विभाग के कर्मचारी तो गिरोह से नहीं मिले है। इसके अलावा दिल्ली के ट्रांसपोर्ट प्रधान सचिव विजय कुमार से भी बात करने का प्रयास किया गया मगर बात नहीं हो सकी।

व्हाट्सएप ग्रुपों में आरटीए, एसडीएम और अन्य अधिकारियों की लोकेशन डालने वाले गिरोह के बारे में जानकारी नहीं है। मामला गंभीर है। जांच कराकर गिरोह का पूरी तरह से भंडाफोड़ किया जाएगा। - श्रीकृष्ण लाल पंवार, परिवहन मंत्री, हरियाणा

अधिकारियों की लोकेशन व्हाट्सएप ग्रुप में डालने का मामला गंभीर है। गिरोह के गुर्गों के साथ-साथ जांच कराई जाएगी कि कहीं विभाग के कर्मचारी तो गिरोह से नहीं मिले है। जांच कराकर कार्रवाई होगी। - धीरज शाहू, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, उत्तर प्रदेश

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