फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Bharat Bhushan liked to watch his own films on Doordarshan

भारत भूषण को दूरदर्शन पर खुद की फिल्में देखना था पसंद

Mon, 28 Jun 2021 02:27 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 28 Jun 2021 02:27 AM IST
विज्ञापन
Bharat Bhushan liked to watch his own films on Doordarshan
चंडीगढ़। मैं बहुत खुशनसीब हूं कि अपने पिता भारत भूषण की जिंदगी को बहुत करीब से देखा है। वे अंतर्मुखी स्वभाव के थे और उन्हें कला से बहुत जुड़ाव था। वे कभी भी पार्टी आदि में नहीं जाते थे। अपनी ही छोटी और प्यारी दुनिया में खुश रहते थे। उन्हें दूरदर्शन पर खुद की फिल्में देखने का बहुत पसंद था। ये सब किस्से रविवार को ऑनलाइन कार्यक्रम काव्यांजलि में भारत भूषण की बेटी अपराजिता साझा कर रही थीं।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि जिंदगी में सहजता और सरलता आदि गुणों को उन्हीं से सीखा। वे कभी नहीं चाहते थे कि मैं फिल्मों की दुनिया में आऊं। वे चाहते थे कि मैं डॉक्टर या प्रोफेसर जैसी कोई नौकरी करूं। स्कूल के बाद जब उन्होंने करिअर को लेकर सवाल पूछे तो मैंने कह दिया कि मैं फिल्म इंस्टीट्यूट जाना चाहती हूं। उन्होंने इसके लिए मना कर दिया।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि डिग्री के बाद मुझे संयोगवश रामायण नाटक में मंदोदरी का किरदार मिल गया और ये मेरा पहला ऑनस्क्रीन काम था। जब मैंने एक सुबह फोन किया और पूछा कि आपने सुबह दूरदर्शन पर रामायण देखा। तब उन्होंने गर्व से और चकित होकर कहा कि तुम एक्टिंग भी कर लेती हो?
विज्ञापन
विज्ञापन

अपराजिता ने बताया कि पिता काफी मुझे जिंदगी में एक खेद रहेगा कि मुझे उनकी किताबें और म्यूजिक कलेक्शन नहीं मिला। उनके पास नाटक, उपन्यास, कविताओं पर आधारित बहुत सी किताबें थीं। उन्होंने बचपन से मुझे किताबों के साथ बड़ा किया। वो अक्सर मुझे उपन्यास पढ़ाते थे, जब कविता पढ़नी होती थी तो अमृता प्रीतम की किताब पढ़ने के लिए देते थे। वे बहुत ही प्यार करने वाले और साथ में सख्त पिता थे। कई बार हमें किसी काम के लिए मना कर देते थे तो उस पर अडिग रहते थे।

खाली समय फोटोग्राफी और गार्डनिंग में करते थे व्यतीत
अपराजिता ने बताया कि पिताजी को कला और प्रकृति से बहुत जुड़ाव था। पिता जी के पास जितने बंगले रहे, उन्होंने सब में बड़े-बड़े गार्डन बनाए हुए थे। उन्होंने अपने कमरे के बाहर रात की रानी लगाना बहुत पसंद था। जिस दिन शूटिंग नहीं होती थी, वे खुद निजी तौर पर पौधों को पानी देते थे और उनकी निगरानी करते थे। इसके अलावा उनके पास बहुत तरह के कैमरे थे। वे अक्सर समय मिलते ही पहाड़ों पर फोटोग्राफी के लिए निकल पड़ते थे और आदिवासी लोगों पर शूट करते थे और घर आकर कई बार एडिट भी करते थे। छुट्टी के दिन हम दोनों बहनों को चिड़ियाघर या बीच पर लेकर जाना और हमारी ढ़ेरों फोटो खींचना उनका शौक था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed