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बेअंत सिंह हत्याकांड के आरोपी जगतार सिंह तारा ने जुर्म कबूला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 24 Oct 2017 10:09 AM IST
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जगतार सिंह तारा
- फोटो : File Photo
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड मामले में सोमवार को बुड़ैल जेल स्थित विशेष अदालत में अंतिम आरोपी जगतार सिंह तारा के सीआरपीसी 313 के तहत बयान दर्ज किए गए। तारा ने अपने बयान में कबूला है कि उसने ही वह कार खरीदी थी, जिसे बाद में सीएम बेअंत सिंह की हत्या के लिए किए गए बम ब्लास्ट में इस्तेमाल किया गया था। सोमवार को तारा के आधे ही बयान दर्ज हो सके। शेष बयान अगली सुनवाई नवंबर 13 को दर्ज होंगे।
सोमवार को विशेष अदालत में बयान के दौरान सीबीआई दिल्ली की ओर से पेश हुए वकील ने तारा से सीएम हत्याकांड से जुड़े करीब 50 सवाल पूछे। इनमें से अधिकतर के जवाब तारा ने नहीं दिए, लेकिन उसने यह जरूर कबूला कि, जिस कार का वारदात में इस्तेमाल किया गया था, वह उसने दिल्ली निवासी से खरीदी थी। यह कार उसने वसन सिंह बनकर खरीदी थी और इसी नाम से हस्ताक्षर किए थे। अदालत में उसने उन हस्ताक्षर को पहचाना भी जो उसने कार खरीदते वक्त दस्तावेज पर किए थे।
बता दें कि 31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलावर सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था। इस हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा के खिलाफ पटियाला जेल में 31 मार्च 2012 को फांसी देने के वारंट अदालत ने जारी किए थे। हालांकि किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी।
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सोमवार को विशेष अदालत में बयान के दौरान सीबीआई दिल्ली की ओर से पेश हुए वकील ने तारा से सीएम हत्याकांड से जुड़े करीब 50 सवाल पूछे। इनमें से अधिकतर के जवाब तारा ने नहीं दिए, लेकिन उसने यह जरूर कबूला कि, जिस कार का वारदात में इस्तेमाल किया गया था, वह उसने दिल्ली निवासी से खरीदी थी। यह कार उसने वसन सिंह बनकर खरीदी थी और इसी नाम से हस्ताक्षर किए थे। अदालत में उसने उन हस्ताक्षर को पहचाना भी जो उसने कार खरीदते वक्त दस्तावेज पर किए थे।
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बता दें कि 31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलावर सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था। इस हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा के खिलाफ पटियाला जेल में 31 मार्च 2012 को फांसी देने के वारंट अदालत ने जारी किए थे। हालांकि किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी।
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