दम तोड़ते किसान बेटे ने कहा, मां! मुझे जो करना था कर लिया, माफ करना
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किसान बेटा सल्फास खाकर मां के सामने ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया और वो बेबस मां अपने लाल को बचा भी नहीं पाई। गांव कोट फट्टा में 80 वर्षीय बसंत कौर कच्चे मकान के बरामदे में गुमशुम बैठी है। एक दिन पहले ही उसने अपने 45 वर्षीय किसान बेटे पाल सिंह की दर्दनाक मौत देखी है। बूढ़ी मां का बेटा सल्फास खाकर उसके सामने ही तड़पता रहा। वह अपने लाल को बचा नहीं पाई।
पाल सिंह पर साढ़े चार लाख का कर्ज था। पाल सिंह ने पांच किल्ले जमीन ठेके पर लेकर नरमा (कपास) बोया था। मेहनत भी खूब की मगर सफेद मक्खी का प्रकोप लग गया। फसल बर्बाद हो जाने से वह कर्ज अदा करने में असमर्थ था। पैसा चुकाने के लिए आढ़ती का दबाव लगातार बना हुआ था। पाल सिंह ने आत्महत्या कर ली। बसंत कौर ने आंखों के आंसू पोंछते हुए बताया, ‘मैंने देखा बेटा, कमरे में तड़प रहा था। मैं उसके पास पहुंची और पूछा कि बेटा क्या हुआ? उसने जवाब दिया-मां मैंने जो करना था कर लिया। मुझे माफ करना।’ बुजुर्ग बसंत कौर कुछ समझ पाती, इससे पहले बेटा दम तोड़ चुका था।
बेटे आंखों से लाचार पाल सिंह के तीन बेटे हैं। इनमें से दो को दिन में दिखता नहीं। उन्हें यह जानकारी तो है कि पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे, मगर असहाय हैं। पंजाब के अन्य किसानों की तरह पुलिस के चक्करों के डर से पाल सिंह के परिवार ने भी पोस्टमार्टम नहीं करवाया। यानी सरकारी आंकड़ों में यह आत्महत्या दर्ज नहीं होगी। मुआवजे की बात तो उसके बाद आती है।
पोस्टमार्टम नहीं कराओ, सिर फट जाता है पाल सिंह की अनपढ़ पत्नी ने कहा कि उन्हें किसी ने बताया था कि पोस्टमार्टम कराने से सिर फट जाता है। पुलिस भी तंग करती है। इसलिए उन्होंने बिना पोस्टमार्टम कराए और किसी कार्रवाई के अंतिम संस्कार कर दिया।
अर्थशास्त्री का सुझाव, किसानों की जान बचानी है तो कानून बनाए
बठिंडा के जानेमाने अर्थशास्त्री और सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के चांसलर सरदारा सिंह जौहल का कहना है कि कर्ज में फंसे किसानों द्वारा लगातार आत्महत्या किए जाने के मामलों को रोकने के लिए रिजर्व बैंक इंडिया और पंजाब सरकार को आगे आना होगा। साथ ही कर्ज वसूली मामले में विशेष कानून बनाना होगा।
जौहल का कहना है कि किसानों की जान बचाने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। इस संबंध में उन्होंने आरबीआई और पंजाब सरकार को कुछ सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके सुझाव पर अमल किया गया तो किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले पर काबू पाया जा सकता है। गौरतलब है कि इस साल अप्रैल तक पंजाब में 65 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं और यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।
ये हैं सुझाव
सरकार को कानून बनाना चाहिए कि जिस किसान के पास पांच एकड़ तक जमीन है और फसल खराब होने के कारण वह कर्ज अदा नहीं कर पाता है तो उसकी जमीन किसी हालत में नीलाम न हो। ऐसे किसानों को फिर से स्थापित करने के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बोर्ड का गठन करना चाहिए, जो किसानों से कर्ज वसूली मसले पर सहानुभूति पूर्वक विचार करे। इसमें राज्य सरकार के अलावा कर्ज देने वाले बैंकों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कर्ज वसूली मामले में आरबीआई के दिशा-निर्देश अहम भूमिका अदा करता हैं इसलिए उन्हें भी बोर्ड में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि बैंक अपनी मर्जी से ऋण माफ नहीं कर सकते। इसके अलावा यदि कोई किसान एक लाख रुपये कर्ज लेता है और वह उसकी दोगुनी रकम ब्याज के रूप में अदा कर चुका होता है तो ऐसी परिस्थितियों में उसकी मूल राशि माफ कर देनी चाहिए।