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Hindi News ›   Chandigarh ›   Basant Panchami is starting in Pisces Lagna

Chandigarh News: मीन लग्न में हो रहा है बसंत पंचमी का प्रारंभ, चंडीगढ़ के लोगों के लिए यह बेहद शुभ

Fri, 31 Jan 2025 02:13 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jan 2025 02:13 AM IST
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Basant Panchami is starting in Pisces Lagna
चंडीगढ़। 2 फरवरी को बसंत पंचमी है। इस बार सर्वार्थ सिद्धि और अमृत योग बन रहा है। बसंत पंचमी का प्रारंभ मीन लग्न और मीन राशि में हो रहा है। मीन का स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति हैं। नक्षत्र उत्तराभाद्रपद के दूसरा चरण है। उत्तराभाद्रपद का स्वामी शनि है। इसका फल यह है कि बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं। ये शिक्षा और विद्या के कारक हैं। बृहस्पति सतोगुण हैं। चंडीगढ़ की राशि भी मीन है। ऐसे में चंडीगढ़ के लोगों के लिए यह बहुत ही शुभ है। यह बात सेक्टर- 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख और कर्मकांडी पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही।
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उन्होंने बताया कि इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है। यह पूर्वाह्न व्यापिनी त्योहार है, अर्थात दोपहर के समय पंचमी तिथि आए तो बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। 2 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग में पंचमी तिथि प्रारंभ हो रहा है। भविष्य पुराण के अनुसार पंचमी तिथि का क्षय हो और सर्वार्थ सिद्धि योग में उसका प्रारंभ हो तो अमृत योग बनता है।
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उन्होंने कहा कि विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा करें, उनके ज्ञान में वृद्धि होगी। ऐसा उल्लेख आता है कि इस योग में महाकवि कालीदास ने वाराणसी के वागेश्वरी देवी की उपासना कर पूर्णाहुति किए थे। मां वागेश्वरी ने साक्षात प्रकट होकर उन्हें वरदान दिया था। वे विश्व विख्यात कवि हुए। उन्होंने कई ग्रंथों की रचना की। उन्होंने कहा कि 2 फरवरी को सुबह 9:45 बजे से पंचमी तिथि का प्रारंभ हो रहा है। अगले सुबह 6:53 बजे तक रहेगा। 3 फरवरी को सूर्योदय 7:17 बजे है। मिश्रा ने बताया कि यदि कोई तिथि सूर्योदय के बाद और अगले दिन सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए तो वह तिथि क्षय मानी जाती है। इसलिए पंचमी तिथि का क्षय हो रहा है।
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सतोगुण से हुई है भगवती सरस्वती की उत्पत्ति
भगवती सरस्वती की उत्पत्ति सतोगुण से हुई है। उनकी आराधना और पूजा में प्रयुक्त हाेने वाली सामग्रियों में अधिकांश श्वेत वर्ण की होती है। इनमें दूध, दही, मक्खन, धान का लावा, सफेद तिल का लड्डू, गन्ना, गन्ना के रस का पका हुआ गुड़, सफेद चंदन, सफेद पुष्प, सफेद वस्त्र, सफेद आभूषण, अदरक, मूली, चावल, घी, पके हुए केले के फल, नारियल, नारियल का जल और श्रीफल का प्रयोग होता है।

सुबह 9:45 बजे से पूजा का शुभ मुहूर्त
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि 2 फरवरी को सुबह 9:45 बजे से सुबह 10:42 बजे तक या इसके पहले पूजा किया जाए तो वह बालक विद्वान, बुद्धिमान और न्यायप्रिय होगा।
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