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कोरोना को दरकिनार कर कास्ट और क्रेडिट की जंग में जुटा बरोदा, पढ़ें- जनता को कौन-क्या दे रहा है दुहाई

Sun, 01 Nov 2020 02:16 PM IST
ajay kumar प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 01 Nov 2020 02:16 PM IST
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Baroda by-election: All parties are showing their strength in Baroda by-election
बरोदा उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला

बरोदा उपचुनाव को उत्सव को तौर पर देख रहे यहां के मतदाताओं ने कोरोना को पीछे छोड़ दिया है। न तो राजनीतिक दलों को यहां कोरोना की गाइडलाइन की परवाह है और न ही यहां के लोगों को। बरोदा में सामाजिक दूरी का फार्मूला धराशायी हो गया है। अब बरोदा के रण में अगर कुछ चल रहा है तो वह है कास्ट और क्रेडिट की जंग। जाट बाहुल्य इस सीट पर इस समय राजनीतिक दल अपने किए हुए कार्यों की क्रेडिट लेने की जंग में जुटे हैं।

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जातिगत समीकरणों को देखते हुए नेता भी चुनावी मंच से परोक्ष तौर पर कास्ट (जाति) की बात करते हुए अपने-अपने प्रत्याशी को जितवाने की कोशिश में लगे हैं। दिग्विजय चौटाला चुनावी मंच पर ब्राह्मण के छोरे को जितवाने की बात कह रहे हैं। वहीं रणजीत सिंह चौटाला भी यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि कभी कभार गांव में ब्राह्मण को भी सरपंच बना दिया करते हैं। इसी तरह से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और ओम प्रकाश चौटाला भी परोक्ष तौर पर मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने में जुटे हैं। 
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इनेलो ने बरोदा को नौ जोन में बांटकर जातिगत आधार पर यहां अपने नेताओं की ड्यूटी लगाई है। इस रणनीति के तहत एक जोन में छह से सात गांव हैं। क्रेडिट लेने की जंग में पार्टियां अपनी-अपनी सरकार के कार्यों का हवाला दे रहे हैं। इनेलो यहां पर ताऊ देवीलाल के दौर की याद दिलवाते हुए पार्टी की झोली में वोट डालने की बात कर रही है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी सरकार के कार्यकाल की दुहाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि जो दौर बरोदा की जनता ने उनकी सरकार के कार्यकाल में देखा है वह फिर से लाएंगे।

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भाजपा कर रही विकास का वादा

मुख्यमंत्री मनेाहर लाल अपनी जनसभाओं में बरोदा की जनता को बहुत कुछ देने की बात कह रहे हैं। उन्होंने यहां आईएमटी का वादा कर कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा देने की बात कही है। साथ ही पहलवान योगेश्वर दत्त्त को जीत के बाद मंत्री बनाने की बात भी कह दी है। वे यहां अपनी सरकार के दौरान दिए गए 165 करोड़ के अलावा अन्य बहुत कुछ देने का दावा कर रहे हैं।

दावों से परे बरोदा का हाल
राजनीतिक दलों की बातों से कोसों दूर बरोदा विधानसभा की हकीकत यह है कि चुनाव के दौरान राजनीति की रोटियां सेकने वाली पार्टियां आज तक इस हलके का कल्याण नहीं कर पाई हैं। एक दर्जन गांव छोड़ दिए जाएं तो अन्य गावों में पानी और सड़क की समस्या आम है। खेती करने वाले किसानों के लिए बाढ़ का पानी यहां बड़ी समस्या है।

उपचुनाव का फायदा
यहां की जनता को उपचुनाव का यह फायदा जरूर मिला है कि चार माह में यहां काफी काम हुए हैं। यहां के सभी 54 गांव में शिक्षा का स्तर बहुत ऊंचा नहीं है। पानी भरने के लिए आज भी गांव की महिलाएं बहुत दूर तक जाती हैं। इसके अलावा पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण कुछ गांव में युवाओं की शादी की भी समस्या है।

भाजपा ने मैदान में उतारी जाट नेताओं की फौज
भाजपा ने अपने सभी जाट नेता इस चुनाव में उतार दिए हैं। प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ यहां जीत दिलवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हैं। कैप्टन अभिमन्यु भी यहां आकर वोट मांग चुके हैं। इसके अलावा सुभाष बराला भी दिन रात एक कर गठबंधन के प्रत्याशी को जितवाने के लिए जोर लगाए हुए हैं।

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