हरियाणा में आउटसोर्सिंग पॉलिसी-2 के तहत ग्रुप-डी की नई भर्ती पर रोक, हुए कई और फैसले
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के सरकारी विभागों, बोर्ड, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अब आउटसोर्सिंग पॉलिसी-2 के तहत ग्रुप डी की भर्तियां नहीं होंगी। प्रदेश सरकार ने इस पॉलिसी के तहत ग्रुप डी की नई भर्ती पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। सरकार ने समीक्षा के दौरान पाया है कि आउटसोर्सिंग पर ग्रुप डी में बड़े पैमाने पर भर्ती हो चुकी है।
बीते साल सरकार ने ग्रुप डी के 18 हजार से अधिक पद स्थायी भर्ती से भरे हैं। अगले सौ दिन के एजेंडे में भी ग्रुप डी के खाली पदों को बड़ी संख्या में भरा जाना है। इसलिए सरकार ने आउटसोर्सिंग के तहत भर्तियां रोकने का फैसला लिया है।
इसके अलावा ग्रुप सी की भर्तियां भी विभाग मनमाने तरीके से नहीं कर पाएंगे। हर विभागाध्यक्ष को ग्रुप सी की नई भर्ती के लिए पहले मुख्य सचिव और उसके बाद वित्त विभाग से अनुमति लेनी होगी।
सरकार ने इन भर्तियों के खिलाफ सख्त रुख इसलिए अपनाया है, चूंकि विभागों, बोर्ड-निगमों और सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों में उच्च अधिकारी अपने स्तर पर ही भर्ती कर लेते हैं। कर्मचारियों की ज्वाइनिंग के बाद ही मुख्य सचिव और वित्त विभाग को बताया जाता है।
अब ऐसा नहीं होगा। पहले मंजूरी होगी, उसके बाद ही भर्ती की जा सकेगी। मुख्य सचिव की ओर से इस संबंध में सभी विभागों के प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, डीसी, एसडीएम, बोर्ड-निगमों के प्रबंध निदेशकों व मुख्य प्रशासकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
एक वर्ष से अधिक का सेवा विस्तार भी सरकार करेगी तय
ग्रुप सी और डी में अब अनुबंध कर्मियों को एक वर्ष से अधिक का सेवा विस्तार भी विभागाध्यक्ष अपने स्तर पर नहीं दे पाएंगे। आउटसोर्सिंग पॉलिसी पार्ट-2 के तहत नियुक्त कर्मियों को सेवा विस्तार देने के लिए मुख्य सचिव और वित्त विभाग से मंजूरी लेना जरूरी होगा। इन निर्देशों पर अमल न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।