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अमर उजाला की खबर का असर: पीजीआई में आयुष्मान भारत के ऑफलाइन इलाज की कैशलेस व्यवस्था होगी बंद
Mon, 10 Mar 2025 09:22 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 10 Mar 2025 09:22 AM IST
सार
अमर उजाला ने ‘आयुष्मान भारत के नाम पर पीजीआई में करोड़ों का घोटाला, लाखों की दवा बरामद’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें खुलासा किया कि आयुष्मान भारत के बिल पर दवा का नाम लिखकर फर्जी मुहर लगा करोड़ों की दवाइयां सस्ते रेट में बेचकर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया गया।
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चंडीगढ़ पीजीआई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज के नाम पर अमर उजाला की तरफ से करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश करने के बाद हलचल बढ़ गई है। रविवार को पीजीआई प्रशासन के आला अधिकारियों ने आनन-फानन में बैठक की।
बैठक में तय हुआ कि अब पीजीआई में आयुष्मान भारत के ऑफलाइन इलाज की कैशलेस व्यवस्था बंद की जाएगी। यही नहीं आयुष्मान भारत के तहत इलाज करा रहे मरीजों को अब वार्ड में उनके बेड पर ही दवाओं से लेकर जरूरी व्यवस्थाएं मुहैया कराई जाएंगी। वहीं, आरोपी बलराम को पुलिस ने रिमांड पर ले लिया है।
खबर छपने के बाद पीजीआई और अमृत फार्मेसी ने पुलिस को लिखित शिकायत भी दी है। इसके अलावा मामले की जांच के लिए पीजीआई ने कमेटी का भी गठन किया है। कमेटी पूरे मामले की रिपोर्ट पीजीआई प्रशासन को सौंपेगी।
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बैठक में तय हुआ कि अब पीजीआई में आयुष्मान भारत के ऑफलाइन इलाज की कैशलेस व्यवस्था बंद की जाएगी। यही नहीं आयुष्मान भारत के तहत इलाज करा रहे मरीजों को अब वार्ड में उनके बेड पर ही दवाओं से लेकर जरूरी व्यवस्थाएं मुहैया कराई जाएंगी। वहीं, आरोपी बलराम को पुलिस ने रिमांड पर ले लिया है।
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खबर छपने के बाद पीजीआई और अमृत फार्मेसी ने पुलिस को लिखित शिकायत भी दी है। इसके अलावा मामले की जांच के लिए पीजीआई ने कमेटी का भी गठन किया है। कमेटी पूरे मामले की रिपोर्ट पीजीआई प्रशासन को सौंपेगी।
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पीजीआई ने कहा-यह गंभीर धोखाधड़ी
पीजीआई ने रविवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि यह गंभीर धोखाधड़ी है, जिसमें चोरी की गई इंडेंट बुक और जाली मुहरों का उपयोग कर मरीजों के लिए निर्धारित दवाओं को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया। ये दवाएं आयुष्मान भारत कैशलेस योजना के लाभार्थियों के लिए निर्धारित की गई थीं। घटना 18 फरवरी 2025 को सामने आई, जब एक अज्ञात व्यक्ति को इस गैरकानूनी गतिविधि में लिप्त पाया गया। संबंधित व्यक्ति को तुरंत पुलिस को सौंप दिया गया और इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई।पीजीआई और अमृत फार्मेसी ने इस धोखाधड़ी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज करवाई है। साथ ही इस मामले की आंतरिक जांच के लिए एक समिति गठित की गई है, जो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सिफारिशें देगी।
ऑनलाइन इंडेंटिंग सिस्टम की शुरुआत
पीजीआई ने कैशलेस योजना के तहत आने वाले मरीजों के लिए मैनुअल इंडेंटिंग प्रणाली को समाप्त कर एक सुरक्षित ऑनलाइन प्रणाली अपनाने का निर्णय लिया है। पीजीआई के कंप्यूटर सेक्शन और आंतरिक समिति ने मिलकर इस नए सिस्टम को विकसित किया है, जिसे मौजूदा हॉस्पिटल इनफार्मेशन सिस्टम (एचआईएस 1) में शामिल किया जाएगा। यह प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी कर ली जाएगी।दवा-चिकित्सा उपकरण मरीजों के बेड तक पहुंचाने की तैयारी
आपातकालीन विभाग के बाहर एक विशेष क्षेत्र को चिह्नित किया गया है। यहां अमृत फार्मेसी केवल उन मरीजों को दवा उपलब्ध कराएगी जो कैशलेस योजनाओं के तहत लाभान्वित होते हैं। पीजीआई और अमृत फार्मेसी मिलकर स्टाफ की संख्या बढ़ाने पर काम कर रहे हैं ताकि नई ऑनलाइन प्रणाली के तहत दवाएं और चिकित्सा उपकरण सीधे मरीजों तक उनके बेड पर पहुंचाए जाएं।पीजीआई के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध
खबर प्रकाशित होने के बाद निदेशक से चिकित्सा अधीक्षक तक हरकत में आ गए और पुलिस को शिकायत देने से लेकर जांच कमेटी तक का गठन कर दिया। हालांकि पुलिस सूत्रों का मानना है कि इस मामले में पीजीआई के कर्मचारियों की भी भूमिका संदिग्ध दिख रही है।सबसे बड़ा सवाल...पीजीआई ने पहले क्यों नहीं दर्ज कराई शिकायत
- सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पीजीआई प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले की पहले से जानकारी होने के बाद शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई।
- इस पूरे मामले की अंदरूनी कमेटी से जांच पहले भी कराई जा सकती थी, लेकिन पीजीआई प्रशासन ने मामले को दबाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई।