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गैंगरेप केस में पुलिस ने साख बचाने को शख्स के साथ खेला वो खेल, 16 महीने रहा जेल में
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 16 Sep 2018 10:00 AM IST
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चंडीगढ़ गैंगरेप का आरोपी
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दिसंबर 2016 में युवती से हुए रेप के मामले में 16 माह जेल काटने के बाद बरी होने वाले वसीम मलिक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए 20 लाख मुआवजे की मांग की है। याची ने कहा कि पुलिस ने अपनी साख बचाने के लिए पूरा खेल रचा था। याचिका पर जस्टिस आरके जैनने यूटी प्रशासन, गृह सचिव, आईजीपी, एसपी सहित 5 पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका दाखिल करते हुए वसीम मलिक ने कहा कि 13 दिसंबर की रात एक युवती से ऑटो में रेप हुआ था। इस घटना के बाद 17 दिसंबर को पुलिस ने उसे पकड़ लिया। इस दौरान चालान फाइल करते हुए पुलिस ने कहा कि युवती के बताए हुलिए के अनुसार और विभिन्न रिपोर्ट के आधार पर उसको गिरफ्तार कर लिया गया है।
इसके बाद लगातार ट्रायल चलता रहा और याची की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई। इसी बीच मार्च 2018 को पुलिस ने असली आरोपियों को पकड़ लिया। बावजूद इसके याची के खिलाफ केस वापस लेने का फैसला जुलाई में लिया गया। याची ने कहा कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने से पहले न तो मोबाइल लोकेशन का पता लगाया और न ही सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
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केस को जल्द सुलझाने और अपनी साख बचाने की फिराक में पीड़िता से याची की पहचान करवा उसे आरोपी बना दिया। याची ने कहा कि अब वह बरी तो हो गया है लेकिन इस दौरान उसके परिवार ने जो बदनामी और पीड़ा सही है उसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
केस लड़ने के लिए बेच दिया वाहन
याची के परिवार को छोटा हाथी (वाहन) बेचना पड़ा ताकि वह केस लड़ सकें। याची की अविवाहित बहने हैं जो शादी की उम्र की हैं। इस पूरे प्रकरण ने याची के परिवार को पूरी तरह से बदनाम कर दिया। ऐसे में याची ने अब इस पीड़ा के लिए और बिना किसी गुनाह 16 माह केवल पुलिस की साख बचाने के लिए जेल में रखने के चलते 20 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की अपील की है।
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याचिका दाखिल करते हुए वसीम मलिक ने कहा कि 13 दिसंबर की रात एक युवती से ऑटो में रेप हुआ था। इस घटना के बाद 17 दिसंबर को पुलिस ने उसे पकड़ लिया। इस दौरान चालान फाइल करते हुए पुलिस ने कहा कि युवती के बताए हुलिए के अनुसार और विभिन्न रिपोर्ट के आधार पर उसको गिरफ्तार कर लिया गया है।
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इसके बाद लगातार ट्रायल चलता रहा और याची की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई। इसी बीच मार्च 2018 को पुलिस ने असली आरोपियों को पकड़ लिया। बावजूद इसके याची के खिलाफ केस वापस लेने का फैसला जुलाई में लिया गया। याची ने कहा कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने से पहले न तो मोबाइल लोकेशन का पता लगाया और न ही सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
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केस को जल्द सुलझाने और अपनी साख बचाने की फिराक में पीड़िता से याची की पहचान करवा उसे आरोपी बना दिया। याची ने कहा कि अब वह बरी तो हो गया है लेकिन इस दौरान उसके परिवार ने जो बदनामी और पीड़ा सही है उसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
केस लड़ने के लिए बेच दिया वाहन
याची के परिवार को छोटा हाथी (वाहन) बेचना पड़ा ताकि वह केस लड़ सकें। याची की अविवाहित बहने हैं जो शादी की उम्र की हैं। इस पूरे प्रकरण ने याची के परिवार को पूरी तरह से बदनाम कर दिया। ऐसे में याची ने अब इस पीड़ा के लिए और बिना किसी गुनाह 16 माह केवल पुलिस की साख बचाने के लिए जेल में रखने के चलते 20 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की अपील की है।