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Chandigarh News: सार्वजनिक संपत्तियों से स्टीकर व पोस्टर हटाने के लिए चलेगा अभियान

Wed, 20 Nov 2024 02:27 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2024 02:27 AM IST
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Assembly session, campaign to remove stickers and posters from public properties
-कांग्रेस के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर निकाय मंत्री विपुल गोयल ने दिया जवाब
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-गोयल ने कहा, 15 दिन के भीतर चलाया जाएगा अभियान



अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कांग्रेस विधायक बीबी बतरा ने सार्वजनिक संपत्तियों पर स्टीकर व पोस्टर चस्पा कर उसे बदसूरत बनाने पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा- अवैध रूप से मेट्रो-पिलर्स, फ्लाईओवर, एलिवेटेड रोड व पुल, सरकारी स्कूल और कॉलेजों की चाहरदिवारी व खंभों पर चस्पा किए जा रहे हैं। इससे राज्य बदसूरती की ओर जा रहा है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में विधायक आफताब अहमद व गीता भुक्कल भी शामिल थीं। इस पर शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा, दस से 15 दिन के भीतर सफाई को लेकर बड़ा अभियान चलेगा। इस दौरान जहां भी अवैध रूप से पोस्टर, स्टीकर व अन्य विज्ञापन सामग्री लगाई गई होगी उसे हटाया जाएगा। उन्होंने कहा, अफसरों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। साथ स्टीकर व पोस्टर लगाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा-दो वित्तीय वर्ष में नगर पालिकाओं से प्राप्त कार्रवाई रिपोर्टों के अनुसार, उल्लंघनकर्ताओं को कुल 1915 नोटिस जारी किए गए हैं। 3022 प्रवर्तन अभियान चलाए गए हैं। 108334 पोस्टर/बिल, स्टीकर/विज्ञापन/फ्लेक्स हटाए गए हैं।


टावर की जमीन के लिए मार्केट रेट का 200 प्रतिशत मुआवजे का प्रावधान
कांग्रेस विधायक गीता भुक्क्ल ने मुद्दा उठाया कि खेतों से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइनों के लिए मुआवजा नहीं मिल रहा है। इससे किसान परेशान हैं और धरना दे रहे हैं। उनके लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। इस पर सीएम सैनी ने कहा कि किसानों के खेतों से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली की लाइनों के लिए मुआवजा नीति बनाई हुई है। इसके तहत किसान को टावर एरिया की जमीन के लिए मार्केट रेट का 200 प्रतिशत मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, खेत से गुजरने वाली लाइन के नीचे की भूमि के लिए भी किसानों को मार्केट रेट का 30 प्रतिशत मुआवजे का प्रावधान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति के तहत मुआवजा के लिए टावर बेस एरिया से एक मीटर की परीधि तक की जमीन की गणना की जाती है। उन्होंने कहा कि एसडीएम की अध्यक्षता में एक यूजर कमेटी बनाई हुई है, जो अपनी रिपोर्ट जिला उपायुक्त को सौंपती है। यदि किसी किसान को किसी प्रकार की कोई समस्या होती है, तो वह अपनी अपील मंडल आयुक्त के पास कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुआवजे के लिए जमीन के कलेक्टर रेट को नहीं बल्कि मार्किट रेट को आधार माना है।
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