{"_id":"57a1a9e04f1c1b56152ba5fe","slug":"ashutosh-maharaj-case-hearing-in-punjab-haryana-highcourt","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फिर जिंदा हो जाएंगे महाराज, आस्था में डूबे भक्त पर हाईकोर्ट भी सख्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर जिंदा हो जाएंगे महाराज, आस्था में डूबे भक्त पर हाईकोर्ट भी सख्त
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 04 Aug 2016 09:19 AM IST
विज्ञापन
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आशुतोष महाराज
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज को दो साल पहले डाक्टर क्लीनिकली डेड घोषित कर चुके हैं, पर भक्त मानने को तैयार नहीं। भक्तों को उम्मीद है कि बाबा जिंदा हो जाएंगे। वे अभी समाधि में हैं। मामले में अब हाईकोर्ट सख्त हो गया है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बार फिर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस शेखर धवन की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले के दो साल हो चुके हैं और पंजाब सरकार अब तक इसका कोई हल नहीं निकाल सकी है।
खंडपीठ ने साफ कर दिया कि अगर पंजाब सरकार ने इस मामले का कोई हल नहीं निकाला तो हाईकोर्ट को ही आदेश देने होंगे। खंडपीठ ने कहा कि जब आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड घोषित किया जा चुका है तो इस पर पंजाब सरकार अब तक कोई फैसला क्यों नहीं ले पा रही।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले में कानून-व्यवस्था का हवाला देकर बच नहीं सकती। खंडपीठ ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। खंडपीठ ने पंजाब सरकार को इस मामले का हल निकालने के लिए कुछ और समय देते हुए सुनवाई 16 सितंबर तक स्थगित कर दी।
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बार फिर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस शेखर धवन की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले के दो साल हो चुके हैं और पंजाब सरकार अब तक इसका कोई हल नहीं निकाल सकी है।
विज्ञापन
खंडपीठ ने साफ कर दिया कि अगर पंजाब सरकार ने इस मामले का कोई हल नहीं निकाला तो हाईकोर्ट को ही आदेश देने होंगे। खंडपीठ ने कहा कि जब आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड घोषित किया जा चुका है तो इस पर पंजाब सरकार अब तक कोई फैसला क्यों नहीं ले पा रही।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले में कानून-व्यवस्था का हवाला देकर बच नहीं सकती। खंडपीठ ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। खंडपीठ ने पंजाब सरकार को इस मामले का हल निकालने के लिए कुछ और समय देते हुए सुनवाई 16 सितंबर तक स्थगित कर दी।
किसी भी अंतिम निर्णय तक पहुंचने में अभी समय
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आशुतोष महाराज
- फोटो : फाइल फोटो
खुद को आशुतोष महाराज का पुत्र बताने वाले दिलीप झा की ओर से दायर याचिका पर जारी इस मामले की पिछली सुनवाई पर खंडपीठ के समक्ष दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने बताया था कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत एक कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो इस विषय पर विचार-विमर्श कर रही है।
संस्थान ने यह भी कहा था कि इस मामले में किसी भी अंतिम निर्णय तक पहुंचने में अभी समय लगेग। संस्थान के इस जवाब पर तब खंडपीठ ने आदेश दिए थे कि इस मामले को आपसी बातचीत के जरिए हल कर हाईकोर्ट को सूचित किया जाए। मंगलवार को सुनवाई के दौरान ऐसे किसी हल की जानकारी पंजाब सरकार की ओर से नहीं दी जा सकी।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट दखल नहीं देना चाहता। इसलिए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और अन्य पक्ष मिलकर महाराज के अंतिम संस्कार के विषय में निर्णय लें। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यह तय किया जाए कि महाराज का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ हो।
हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि जब मेडिकल रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि आशुतोष महाराज क्लीनिकली डेड हैं, तो उनके समाधि में होने की बात क्यों कही जा रही है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सबसे बड़ा सवाल महाराज के सम्मान का है। लिहाजा, यही उचित होगा कि संस्थान आगे आकर कहे कि महाराज का अंतिम संस्कार उचित ढंग से करवाया जाए।
संस्थान ने यह भी कहा था कि इस मामले में किसी भी अंतिम निर्णय तक पहुंचने में अभी समय लगेग। संस्थान के इस जवाब पर तब खंडपीठ ने आदेश दिए थे कि इस मामले को आपसी बातचीत के जरिए हल कर हाईकोर्ट को सूचित किया जाए। मंगलवार को सुनवाई के दौरान ऐसे किसी हल की जानकारी पंजाब सरकार की ओर से नहीं दी जा सकी।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट दखल नहीं देना चाहता। इसलिए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और अन्य पक्ष मिलकर महाराज के अंतिम संस्कार के विषय में निर्णय लें। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि यह तय किया जाए कि महाराज का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ हो।
हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि जब मेडिकल रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि आशुतोष महाराज क्लीनिकली डेड हैं, तो उनके समाधि में होने की बात क्यों कही जा रही है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सबसे बड़ा सवाल महाराज के सम्मान का है। लिहाजा, यही उचित होगा कि संस्थान आगे आकर कहे कि महाराज का अंतिम संस्कार उचित ढंग से करवाया जाए।
दो साल के आश्रम में फ्रिज पर रखा गया है महाराज को
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आशुतोष महाराज
- फोटो : फाइल फोटो
आशुतोष महाराज को 28 जनवरी, 2014 को डॉक्टरों ने क्लीनिकली डेड घोषित कर दिया था, लेकिन उनके अनुयायियों का आज तक कहना है कि महाराज गहन समाधि में में हैं। तभी से उनका शरीर जालंधर में नूरमहल स्थित उनके आश्रम में फ्रिज पर रखा गया है। आश्रम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। आश्रम 260 एकड़ में फैला हुआ है, जिसके एक भाग में प्रवचन के लिए हॉल है।
आशुतोष महाराज के भक्तों का मानना है कि उनके गुरु गहन समाधि में हैं और वो जरूर जाग जाएंगे। ड्राइवर पूर्ण सिंह ने कोर्ट में रिट लगाई थी कि महाराज की डेथ हो चुकी है, लेकिन आश्रम के प्रबंधक महाराज को समाधि में बता रहे हैं। उसने अपनी याचिका में कहा था कि गद्दी और 1 हजार करोड़ की जायदाद की वजह से उनके मृत शरीर की बेअदबी हो रही है।
ये ड्राइवर 1988 से 1992 तक महाराज का ड्राइवर रहा है। बाद में इसका महाराज से भरोसा टूट गया था और ये अलग हो गया था। उसके बाद महाराज के बेटे होने का दावा करने वाले दिलीप झा ने भी आवेदन लगाकर खुद को महाराज का वारिस बनाने और अंतिम संस्कार करने की मांग की है, जिस पर सुनवाई जारी है।
आशुतोष महाराज के भक्तों का मानना है कि उनके गुरु गहन समाधि में हैं और वो जरूर जाग जाएंगे। ड्राइवर पूर्ण सिंह ने कोर्ट में रिट लगाई थी कि महाराज की डेथ हो चुकी है, लेकिन आश्रम के प्रबंधक महाराज को समाधि में बता रहे हैं। उसने अपनी याचिका में कहा था कि गद्दी और 1 हजार करोड़ की जायदाद की वजह से उनके मृत शरीर की बेअदबी हो रही है।
ये ड्राइवर 1988 से 1992 तक महाराज का ड्राइवर रहा है। बाद में इसका महाराज से भरोसा टूट गया था और ये अलग हो गया था। उसके बाद महाराज के बेटे होने का दावा करने वाले दिलीप झा ने भी आवेदन लगाकर खुद को महाराज का वारिस बनाने और अंतिम संस्कार करने की मांग की है, जिस पर सुनवाई जारी है।