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पंजाब में कांग्रेस की जीत ने चूर-चूर किए 'आप' के दो सपने, अब क्या करेंगे केजरीवाल
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 12 Mar 2017 10:02 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत ने आम आदमी पार्टी के दो बड़े सपने चूर-चूर कर दिए। अब क्या करेंगे पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल। दरअसल, पंजाब से आम आदमी पार्टी के मिशन गुजरात को झटका लगा है।
पार्टी पंजाब फतेह करने के बाद गुजरात में जबरदस्त ढंग से एंट्री करना चाहती थी। लेकिन पंजाब में आप की उम्मीदों को जोरदार झटका लगा है। पार्टी यहां 21 सीटों के आसपास सिमटती नजर आ रही है। हालांकि वह सूबे में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
आप ने पिछले लोकसभा चुनाव में पंजाब से चार सीटें जीत कर इतिहास रचा था। दिल्ली की सत्ता में आने के बाद से पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की नजरें पंजाब पर थीं।
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उन्हें विश्वास था कि देश की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने का रास्ता पंजाब से ही होकर जाता है। इसलिए पार्टी ने विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। माहौल भी पूरी तरह आप के पक्ष में नजर आ रहा था। खासतौर पर मालवा में आप ने जबरदस्त प्रभाव बनाया था।
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पार्टी पंजाब फतेह करने के बाद गुजरात में जबरदस्त ढंग से एंट्री करना चाहती थी। लेकिन पंजाब में आप की उम्मीदों को जोरदार झटका लगा है। पार्टी यहां 21 सीटों के आसपास सिमटती नजर आ रही है। हालांकि वह सूबे में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
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आप ने पिछले लोकसभा चुनाव में पंजाब से चार सीटें जीत कर इतिहास रचा था। दिल्ली की सत्ता में आने के बाद से पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की नजरें पंजाब पर थीं।
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उन्हें विश्वास था कि देश की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने का रास्ता पंजाब से ही होकर जाता है। इसलिए पार्टी ने विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। माहौल भी पूरी तरह आप के पक्ष में नजर आ रहा था। खासतौर पर मालवा में आप ने जबरदस्त प्रभाव बनाया था।
पार्टी को विश्वास था कि वह जीत जाएगी
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- फोटो : अमर उजाला
आप के लिए यह एक क्षेत्रीय से राष्ट्रीय पार्टी बनने की ओर पहला कदम था। पार्टी को पूरा विश्वास था कि वह पंजाब जीत लेगी। दिल्ली के बाद पंजाब जैसा बड़ा राज्य जीतने के साथ ही वह भाजपा और कांग्रेस गठबंधनों के समानांतर तीसरे विकल्प के रूप में खड़ी हो जाती।
उसके साथ ही आप के लिए गुजरात, मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में दाखिल होना भी आसान हो जाता। इतना ही नहीं, पंजाब और गोवा जीतने के बाद अरविंद केजरीवाल का कद भी राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा हो जाता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ बनने वाले संभावित महा गठबंधन के अगुवा भी वह हो सकते थे। लेकिन पंजाब ने न सिर्फ आप, बल्कि केजरीवाल की उम्मीदों को भी धक्का पहुंचाया है। पार्टी नेता भी अब मान रहे हैं कि पंजाब व गोवा में हार के बाद अब मिशन विस्तार पर नए सिरे से मंथन होगा।
उसके साथ ही आप के लिए गुजरात, मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में दाखिल होना भी आसान हो जाता। इतना ही नहीं, पंजाब और गोवा जीतने के बाद अरविंद केजरीवाल का कद भी राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा हो जाता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ बनने वाले संभावित महा गठबंधन के अगुवा भी वह हो सकते थे। लेकिन पंजाब ने न सिर्फ आप, बल्कि केजरीवाल की उम्मीदों को भी धक्का पहुंचाया है। पार्टी नेता भी अब मान रहे हैं कि पंजाब व गोवा में हार के बाद अब मिशन विस्तार पर नए सिरे से मंथन होगा।