अब तक भाजपाई नहीं जानते, क्यों हारे जेटली?
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लोकसभा चुनाव के नतीजे आए एक महीने से अधिक हो चुका है, लेकिन अमृतसर से कद्दावर नेता अरुण जेटली की हार अभी तक भाजपा की पंजाब इकाई के गले की फांस बनी हुई है।
जेटली की यहां से हार के कारणों की तलाश में प्रदेश भाजपा मतगणना वाले दिन से ही जुटी हुई है, लेकिन अंतिम नतीजे तक अभी भी नहीं पहुंच पाई है। हार का ठीकरा किसके सिर फूटता है, वक्त बताएगा, लेकिन इस हार से संबंधित विचार जानने के लिए
विभिन्न नेताओं के साथ पार्टी के दो पूर्व अध्यक्षों प्रो. राजिंदर भंडारी और बृज लाल रिणवा ने शुक्रवार को भी वन-टू-वन बैठकें कीं। उनके समक्ष अपनी राय रखने वाले पार्टी नेताओं में अमृतसर से संबद्ध पदाधिकारियों व जन प्रतिनिधियों सहित चुनाव के दौरान वहां तैनात अन्य क्षेत्रों के कुछ नेता भी शामिल थे।
अकालियों सहित भाजपाइयों को ठहराया जिम्मेदार
सूत्रों के अनुसार कुछ नेताओं ने जहां अकाली नेताओं के रवैये को इस हार के लिए जिम्मेदार बताया, वहीं कुछेक का यह मानना था कि गुस्सा केवल अकालियों के प्रति ही नहीं, बल्कि सत्ता पर काबिज भाजपाइयों के खिलाफ भी था।
इसका खामियाजा जेटली जैसे बड़े नेता की हार के रूप में पार्टी को भुगतना पड़ा और देश में मोदी लहर के बावजूद वह बड़े अंतर से पराजित हुए।
सूत्रों के अनुसार एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि अरुण जेटली ने अमृतसर आते ही जमीनी हकीकत को समझ लिया था और उनका विश्वास स्थानीय नेताओं से उठ गया था।
इसीलिए 10 अप्रैल 2014 के बाद उन्होंने दिल्ली से अपनी टीम बुला ली थी, जिसने उनके प्रचार की कमान खुद संभाली, लेकिन तब तक बाजी हाथ से निकल चुकी थी। नतीजा जेटली की हार के रूप में सामने आया।
अध्यक्ष को सौंपेंगे रिपोर्ट : भंडारी
इस बारे में संपर्क किए जाने पर भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रो. भंडारी ने कहा कि अलग-अलग नेताओं ने अन्य मुद्दों सहित इस मसले पर भी अपनी राय व्यक्त की है। इसकी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष कमल शर्मा को सौंप दी जाएगी।