{"_id":"649533a080cda0d582092e44","slug":"area-of-white-cotton-is-continuously-falling-in-punjab-2023-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Punjab: पंजाब में लगातार गिर रहा सफेद कपास का रकबा, धान की खेती की तरफ बढ़ रहा किसानों का रुझान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Punjab: पंजाब में लगातार गिर रहा सफेद कपास का रकबा, धान की खेती की तरफ बढ़ रहा किसानों का रुझान
Fri, 23 Jun 2023 03:43 PM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 23 Jun 2023 03:43 PM IST
सार
किसानों ने इस बार फिर से सफेद कपास के स्थान पर धान को तवज्जो दी है। इस साल सरकार ने तीन लाख हेक्टेयर में सफेद कपास का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन इस खरीफ सीजन में पंजाब ने अब तक का सबसे कम 1.75 लाख हेक्टेयर कपास का रकबा दर्ज किया है।
विज्ञापन
Cotton
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब में लाख कोशिशों के बावजूद किसान धान की खेती के मायाजाल से निकल नहीं पा रहे हैं, यही कारण है कि सरकार द्वारा लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर किसानों को फसली विभिन्नता की तरफ आकर्षित करने के लाख प्रयास भी फेल हो रहे हैं। हालात यह है कि किसान अब सफेद कपास को छोड़कर वापस धान की खेती की तरफ भागने लगे हैं।
विज्ञापन
पिछले सालों से सफेद कपास का लगातार गिरता ग्राफ अब 1.75 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। किसानों ने इस बार फिर से सफेद कपास के स्थान पर धान को तवज्जो दी है। इस साल सरकार ने तीन लाख हेक्टेयर में सफेद कपास का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन इस खरीफ सीजन में पंजाब ने अब तक का सबसे कम 1.75 लाख हेक्टेयर कपास का रकबा दर्ज किया है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: Punjab: पंजाब में पेंशनधारकों को भी देना होगा डेवलपमेंट टैक्स, खाते से हर माह कटेंगे 200 रुपये, विरोध शुरू
विज्ञापन
कपास के तहत अब तक के सबसे कम कवरेज का मुख्य कारण यह था कि पिछले दो वर्षों से सफेद मक्खी के संक्रमण और गुलाबी बॉलवर्म कीटों के हमले के कारण कपास को व्यापक नुकसान हुआ है। सफेद मक्खियां पौधे का रस चूसकर कपास को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे उपज कम होती है, जबकि गुलाबी बॉलवर्म के लारवा, जो कपास का एक प्रमुख कीट भी हैं, बीजों को खाते हैं और फसल के रेशों को नष्ट करते हैं और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
1990 के दशक में, पंजाब में कपास के तहत 7 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र हुआ करता था पर 2012-13 में कपास का रकबा 4.81 लाख हेक्टेयर 2017-18 में घटकर 2.91 लाख हेक्टेयर रह गया। 2018-19 में कपास का रकबा 2.68 लाख हेक्टेयर था। गिरने का क्रम लगातार जारी रहा, 2020-21 और 2021-22 में क्रमशः 2.52 लाख हेक्टेयर और 2.51 लाख हेक्टेयर हो गया। इस साल कपास की बिजाई का रकबा काफी गिरकर 1.75 लाख पर आ गया है, जिससे कृषि विशेषज्ञ काफी परेशान हैं कि किसानों का रुख अब कपास से निकलकर वापस धान की तरफ जाने लगा है। 2021-22 के दौरान पंजाब में धान 31.45 लाख हेक्टेयर रहा। इस साल रकबा बढ़ने की उम्मीद है।
नई नीति न आने से किसान धान की तरफ मुड़े
पंजाब में नई आम आदमी पार्टी ने पिछले साल मार्च में बदलाव के एजेंडे पर चुनाव जीता था। पिछले साल सरकार ने नई कृषि नीति तैयार करने के लिए एक और पैनल की घोषणा की। 17 जनवरी को राज्य के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने मीडिया को बताया कि सरकार एक नई नीति पर काम कर रही है, जिसका लक्ष्य पंजाब के प्राकृतिक संसाधनों जैसे भूजल, मिट्टी के स्वास्थ्य और भौगोलिक परिस्थितियों को बचाना है। इस नीति में फसल विविधीकरण, कृषि निर्यात पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, लेकिन अभी तक कृषि नीति नहीं आई है।
हमारी फसल की खरीद सुरक्षित है, इसलिए धान की तरफ जाते हैं किसान
किसान नेता बलवंत सिंह का कहना है कि धान की खरीद सरकारी एजेंसियां करती हैं, इसलिए किसान धान को ही तवज्जो देता है। कपास की फसल को मक्खी व सूंडी का खतरा रहता है, बाद में मुआवजे के लिए दौड़ना पड़ता है, इसलिए धान की फसल को किसान सुरक्षित मानता है।