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पंजाब कैबिनेटः शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट और श्री आनंदपुर साहिब-नैना देवी रोपवे को मंजूरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 20 Sep 2018 08:40 PM IST
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पंजाब कैबिनेट
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पंजाब कैबिनेट ने गुरूवार को शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट के कार्य को तुरंत शुरू करने के समझौते पर मुहर लगा दी। इसके अलावा श्री आनंदपुर साहिब और नैना देवी जी के बीच रोपवे की स्थापना को भी मंजूरी दे दी गई। दोनों प्रोजेक्ट को तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों और केंद्र सरकार के इंडस कमिश्नर की तरफ से हस्ताक्षर किए समझौते की पुष्टि कर दी गई।
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शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट को मुकम्मल करने का लक्ष्य 3 साल रखा गया है और यह 206 मेगावाट अतिरिक्त पन बिजली पैदा करेगा। इससे सालाना 852.73 करोड़ रुपये का सिंचाई और बिजली का लाभ होगा। बैठक के दौरान बताया गया कि रणजीत सागर डैम प्रोजेक्ट शाहपुर कंडी डैम से छोड़े जाने वाले पानी को नियमित करने में मदद करेगा और इससे अप्पर बारी दोआब नहर (यूबीडीसी) के निचले क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं में सुधार लाने में मदद मिलेगी। जम्मू-कश्मीर सरकार भी शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट से पानी का हिस्सा प्राप्त करेगी।
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श्रद्धालुओं के समय की होगी बचत
प्रवक्ता ने बताया कि आनंदपुर साहिब से नैना देवी जी तीर्थ स्थल की दूरी ज्यादा है और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण चढ़ाई भी है। ऐसे में पंजाब सरकार ने हिमाचल सरकार की सहमति से नैना देवी जी और श्री आनंदपुर साहिब के बीच रोपवे प्रोजेक्ट स्थापित करने का फैसला किया है, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा मिले और उनके समय की बचत हो सके। 26 जुलाई, 2012 को पंजाब और हिमाचल सरकारों के बीच रोपवे चलाने संबंधी एमओयू हुआ था।
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इस उद्देश्य के लिए पंजाब सरकार की तरफ से 108 कनाल 13 मरले जमीन भी एक्वायर कर ली गई थी लेकिन हिमाचल सरकार की तरफ से 3 जून, 2014 को इसे रद्द कर दिया गया। फरवरी, 2018 को हिमाचल के मुख्यमंत्री की तरफ से इस प्रोजेक्ट को फिर शुरू करने के लिए एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसके संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी रजामंदी जता दी।
अब 5 सितंबर, 2018 को पंजाब के पर्यटन विभाग ने हिमाचल सरकार से एमओयू प्राप्त किया है। यह प्रोजेक्ट स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) स्थापित करते हुए चलाया जाएगा। इस पर आने वाली एक करोड़ रुपये की लागत में पंजाब और हिमाचल आधा-आधा हिस्सा डालेंगे। इसकी आय में भी बराबर की हिस्सेदारी होगी और इसका रियायती समय 40 साल का होगा। इस प्रोजेक्ट को बनाने के लिए कुल 3 साल का समय दिया जाएगा।