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17 साल के लंबे इंतजार के बाद 63 स्थाई डाक्टरों के पदों को मंजूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 02 Jul 2016 01:28 AM IST
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17 साल के लंबे इंतजार के बाद चंडीगढ़ में 63 स्थाई डाक्टरों की नियुक्ति को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। डाक्टरों की स्थाई नियुक्ति की फाइल साल 1999 में भेजी गई थी।
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उसके बाद फाइल मंत्रालय में धूल फांक रही थी। शुक्रवार को मंत्रालय ने यूटी एडमिनिस्ट्रेशन को चिट्टी भेजकर सूचना दी है कि दो स्टटिस्टिकल असिस्टेंट सहित 63 डाक्टरों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है। अब इसके लिए कार्यवाही जल्द से जल्द शुरू की जाए। 63 में से 15 डेंटल डाक्टर व 45 मेडिकल आफिसर हैं।
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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद लिया गया फैसला
दरअसल यूटी में 11 असिस्टेंट मेडिकल आफिसर की पोस्ट थी। सभी पद पर कांट्रैक्ट के तौर पर नियुक्ति दी गई थी। बाद में गवर्नर ने उन्हें असिस्टेंट मेडिकल आफिसर के तौर पर रेगुलर पोस्टिंग दे दी। इसके बाद जो काफी सीनियर असिस्टेंट मेडिकल आफिसर थे, उन्होंने मेडिकल आफिसर के प्रमोशन के लिए अर्जी डाल दी। चंडीगढ़ प्रशासन इन डाक्टरों के खिलाफ कोर्ट में चला गया। यूटी ने कहा कि डाक्टरों की नियुक्ति की फाइल मंत्रालय के पास है। वहां से मंजूरी मिलते ही इन्हें एडजस्ट कर दिया जाएगा। इस पर डाक्टरों ने कहा कि डाक्टरों की नियुक्ति की फाइल पिछले डेढ़ दशक से लटकी हुई है। आगे उम्मीद भी कम है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगली तारीख में भारत सरकार के फाइनेंस डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी और यूटी के एडवाइजर को कोर्ट में पेश करें। इस फैसले के बाद केंद्रीय सरकार ने 63 डाक्टरों की स्थाई नियुक्ति को मंजूरी दे दी।
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नियुक्ति नहीं होने से ये आ रही हैं परेशानी
डाक्टरों की स्थायी नियुक्ति नहीं होने से मरीज ही नहीं, बल्कि हेल्थ डिपार्टमेंट को भी परेशानी आ रही है। डाक्टरों पर मरीजों का दोगुना लोड बढ़ गया है तो मरीजों का इंतजार लंबा बढ़ गया है। रेगुलर नियुक्ति नहीं होने की स्थिति पर चंडीगढ़ में डाक्टरों की नियुक्ति एनएचआरएम के तहत ठेके पर की जाती है। ठेके पर तैनात डाक्टरों को जब अच्छी जॉब आफर आती है तो वे छोड़कर चले जाते हैं। डाक्टरों की भरती के लिए हर छह से सात महीने में इंटरव्यू आयोजित किए जाते हैं। इनमें रुपया भी काफी खर्च होता है।
सांसद बोलीं, शहरवासियों को होगा फायदा
चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर ने कहा है कि 63 डाक्टरों की स्थाई नियुक्ति के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं को बल मिलेगा। डाक्टरों की कमी के कारण कई स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। डाक्टरों की स्थाई नियुक्ति का मामला किरण खेर भी कई बार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के समक्ष उठा चुकी थी।