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विशेषज्ञों की एक राय.. पूर्णतया बंद हो हुक्का बार
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चंडीगढ़। शहर में हुक्का बार को प्रतिबंधित करने की मांग की गई है। एक परिचर्चा में डॉ. अमनदीप कंग ने कहा है कि युवाओं को तंबाकू और निकोटीन से बचाने के लिए हुक्का बार को स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाना जरूरी है। परिचर्चा का आयोजन टीएस सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी चंडीगढ़, पब्लिक इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च, तंबाकू नियंत्रण केंद्र और पीजीआई ने किया था। इसका संचालन अरुण वर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. कंग ने बताया कि तंबाकू और निकोटीन रक्त वाहिकाओं को कठोर बनाते हैं। शरीर के सभी अंगों को सिर से पैर तक प्रभावित करते हैं। परिचर्चा में डॉ. नीजा सिंह, नीलम बंसल और टाटा मेमोरियल सेंटर के डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने भाग लिय।
उन्होंने वीडियो संदेश के माध्यम से बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हुक्का का एक घंटे का सत्र 100 सिगरेट पीने जितना हानिकारक है। तंबाकू मुक्त, सुगंधित हुक्का स्वास्थ्य के लिए विषाक्त हो सकता है, क्योंकि धुआं कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक कार्सिनोजेंस से भरा होता है। पब्लिक इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने आगाह किया कि हुक्का धूम्रपान सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। इसको रोकने के लिए कानून है, मगर क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि पैनल की चर्चा के बाद एक सिफारिश का मसौदा तैयार किया जाएगा और उचित कार्रवाई के लिए चंडीगढ़ प्रशासन और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को भेजा जाएगा। परिचर्चा में प्रो. गोयल, भरत कन्नौजिया, शिशिर सहदेव, डॉ. राणा जे सिंह आदि ने विचार रखे।
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उन्होंने वीडियो संदेश के माध्यम से बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हुक्का का एक घंटे का सत्र 100 सिगरेट पीने जितना हानिकारक है। तंबाकू मुक्त, सुगंधित हुक्का स्वास्थ्य के लिए विषाक्त हो सकता है, क्योंकि धुआं कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक कार्सिनोजेंस से भरा होता है। पब्लिक इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने आगाह किया कि हुक्का धूम्रपान सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। इसको रोकने के लिए कानून है, मगर क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि पैनल की चर्चा के बाद एक सिफारिश का मसौदा तैयार किया जाएगा और उचित कार्रवाई के लिए चंडीगढ़ प्रशासन और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को भेजा जाएगा। परिचर्चा में प्रो. गोयल, भरत कन्नौजिया, शिशिर सहदेव, डॉ. राणा जे सिंह आदि ने विचार रखे।
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