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अमृतसर ब्लास्टः हमलावरों की गिरफ्तारी पर टिकी है पंजाब में शांति, ISI पर टिकी शक की सूई
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 20 Nov 2018 10:01 AM IST
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अमृतसर ब्लास्ट
पंजाब में 38 साल पहले आतंकवाद की शुरुआत निरंकारी मिशन के प्रमुख की हत्या के साथ हुई थी। प्रदेश में आतंकवाद का इतिहास अब फिर उसी मोड़ पर आ गया है। रविवार को अमृतसर के एक निरंकारी भवन में ग्रेनेड हमले के 24 घंटे बीत बाद भी राज्य पुलिस, खुफिया एजेंसियां और एनआईए हमलावरों का पता नहीं लगा सकी हैं।
मामले में शुरू की गई जांच कभी पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की तरफ हो जाती है तो कभी कश्मीरी आतंकवादियों की तरफ और कभी कट्टरपंथी सिख संगठनों की तरफ। राज्य पुलिस ने हमलावरों की तलाश में सोमवार दोपहर दो स्कैच जारी किए, लेकिन चेहरा ढके हमलावरों के स्कैच किसी काम नहीं आए। वहीं, हमले में जो बाइक इस्तेमाल हुआ, पुलिस उसे भी खोज नहीं सकी है।
एनआईए ने अमृतसर हमले में इस्तेमाल हैंड ग्रेनेड की पहचान कर यह साबित कर दिया है कि हमले के पीछे पाकिस्तानी एजेंसी का हाथ है। लेकिन यह हमला चूंकि पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा अब तक भारत में किए हमलों जैसा न होकर कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों जैसा है, इसलिए असली गुनाहगार का तब तक पता लगना कठिन है जब तक कि हमलावरों को गिरफ्तार न कर लिया जाए।
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मामले में शुरू की गई जांच कभी पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की तरफ हो जाती है तो कभी कश्मीरी आतंकवादियों की तरफ और कभी कट्टरपंथी सिख संगठनों की तरफ। राज्य पुलिस ने हमलावरों की तलाश में सोमवार दोपहर दो स्कैच जारी किए, लेकिन चेहरा ढके हमलावरों के स्कैच किसी काम नहीं आए। वहीं, हमले में जो बाइक इस्तेमाल हुआ, पुलिस उसे भी खोज नहीं सकी है।
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एनआईए ने अमृतसर हमले में इस्तेमाल हैंड ग्रेनेड की पहचान कर यह साबित कर दिया है कि हमले के पीछे पाकिस्तानी एजेंसी का हाथ है। लेकिन यह हमला चूंकि पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा अब तक भारत में किए हमलों जैसा न होकर कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों जैसा है, इसलिए असली गुनाहगार का तब तक पता लगना कठिन है जब तक कि हमलावरों को गिरफ्तार न कर लिया जाए।
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जरूरी है गिरफ्तारी, क्योंकि...
इन हमलावरों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य पुलिस और खुफिया तंत्र के नाकाम रहने पर उन तत्वों का हौसला बुलंद होगा, जो प्रदेश में फिर से आतंक का माहौल बनाने की कोशिश करते रहे हैं। यह जगजाहिर है कि कट्टरपंथी सिख संगठनों के आका विदेश और पाकिस्तान में शरण लेकर आईएसआई की मदद से पंजाब में शांति भंग की कोशिशों में जुटे हैं।
1979 में निरंकारी मिशन के प्रमुख की हत्या के बाद प्रदेश में अगली घटनाएं बसों से निर्दोष यात्रियों को उतारकर हत्याएं करने की हुईं, जिन पर तत्कालीन पंजाब और केंद्र सरकार काबू पाने में नाकाम रही और पंजाब एक दशक से भी अधिक समय तक आतंकवाद की आग में झुलसता रहा। इस बीच, पता चला है कि हमला कर भाग रहे दोनों हमलावरों का जो सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हाथ आया है, उससे हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है और बाइक पर नंबर प्लेट भी नहीं लगी थी।
लेकिन इस फुटेज से हमलावरों की वेषभूषा के आधार पर पुलिस ने इलाके की सभी सड़कों पर जहां भी सीसीटीवी लगे हैं, उनके फुटेज तलाशने शुरू कर दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हमलावर किस दिशा में कहां तक गए। इस संबंध में राज्य पुलिस प्रमुख का कहना है कि कई दूसरे सुराग भी हाथ लगे हैं और हमलावर जल्दी ही गिरफ्त में होंगे।
1979 में निरंकारी मिशन के प्रमुख की हत्या के बाद प्रदेश में अगली घटनाएं बसों से निर्दोष यात्रियों को उतारकर हत्याएं करने की हुईं, जिन पर तत्कालीन पंजाब और केंद्र सरकार काबू पाने में नाकाम रही और पंजाब एक दशक से भी अधिक समय तक आतंकवाद की आग में झुलसता रहा। इस बीच, पता चला है कि हमला कर भाग रहे दोनों हमलावरों का जो सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हाथ आया है, उससे हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है और बाइक पर नंबर प्लेट भी नहीं लगी थी।
लेकिन इस फुटेज से हमलावरों की वेषभूषा के आधार पर पुलिस ने इलाके की सभी सड़कों पर जहां भी सीसीटीवी लगे हैं, उनके फुटेज तलाशने शुरू कर दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हमलावर किस दिशा में कहां तक गए। इस संबंध में राज्य पुलिस प्रमुख का कहना है कि कई दूसरे सुराग भी हाथ लगे हैं और हमलावर जल्दी ही गिरफ्त में होंगे।