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मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल कर रहे थे प्राइवेट प्रैक्टिस, देखिए ऐसे हो गया स्टिंग
रमेश शुक्ला सफर /अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Sun, 07 May 2017 09:41 AM IST
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अमृतसर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. डीएस बल
- फोटो : अमर उजाला
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विजिलेंस ब्यूरो (बॉर्डर रेंज) के डीएसपी नवजोत सिंह ने शनिवार सुबह अमृतसर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. डीएस बल का प्राइवेट प्रैक्टिस करते स्टिंग ऑपरेशन कर दिया। विजिलेंस ने फर्जी मरीज का ड्रामा रचकर प्रिंसिपल को तीन सौ रुपये लेकर दवा लिखते दृश्य को कैमरे में कैद किया है। उधर, अपनी सफाई में प्रिंसिपल कहते हैं कि डॉक्टर हूं, इमरजेंसी में मरीज मेरे घर इलाज के लिए आ सकते हैं।
जबकि विजिलेंस का दावा है कि मरीज को आप दवा लिखें, लेकिन तीन सौ रुपये क्यों ले रहे हैं। विजिलेंस ने स्टिंग ऑपरेशन की वीडियो मेडिकल रिसर्च एंड एजूकेशन (डीआरएमई) को भेज दी है, लेकिन इस मामले में अभी तक एफआईआर नहीं हुई है।
मामला सच हुआ तो एक्शन होगा
अगर सबूत सच होगा तो एक्शन होगा। कानून सभी के लिए बराबर है। सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकते।
- विकास प्रताप, सेक्रेटरी (डीआरएमई)
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जबकि विजिलेंस का दावा है कि मरीज को आप दवा लिखें, लेकिन तीन सौ रुपये क्यों ले रहे हैं। विजिलेंस ने स्टिंग ऑपरेशन की वीडियो मेडिकल रिसर्च एंड एजूकेशन (डीआरएमई) को भेज दी है, लेकिन इस मामले में अभी तक एफआईआर नहीं हुई है।
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मामला सच हुआ तो एक्शन होगा
अगर सबूत सच होगा तो एक्शन होगा। कानून सभी के लिए बराबर है। सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकते।
- विकास प्रताप, सेक्रेटरी (डीआरएमई)
स्टिंग की पड़ताल
अमृतसर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. डीएस बल
- फोटो : अमर उजाला
सवाल - एनपीए (नॉन प्रैक्टिस अलाउंस) प्रिंसिपल ले रहे थे।
जवाब - जी
सवाल - विजिलेंस ने धोखाधड़ी का केस क्यों नहीं दर्ज किया, जबकि यह सरकार के नियमों से खिलवाड़ है और कानून का उल्लंघन भी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि एफआईआर (फस्ट इनफॉरमेशन रिपोर्ट) दर्ज कर मामले की जांच शुरू हो, लेकिन विजिलेंस ने एफआईआर के बिना ही स्टिंग आपरेशन कर लिया।
जवाब - दो-तीन महीने पहले यह शिकायत विजिलेंस ब्यूरो चंडीगढ़ से आई थी। तीन-चार दिन से टीम लगातार प्रिंसिपल की निगरानी कर रही थी। आज टीम ने प्रिंसिपल के घर पर फर्जी मरीज भेजा था। इलाज के पहले तीन सौ रुपये पर्ची काटने की वीडियो बनाई है। वीडियो डीआरएमई चंडीगढ़ को भेजी है। जो भी हिदायतें आएंगी विजिलेंस काम करेगी।
सवाल - विजिलेंस हिदायतों पर काम करती है या कानून की धाराएं मानती है। अगर तीन महीने पहले शिकायत आई तो तीन दिन से ही निगरानी क्यों। विजिलेंस क्या उस वीडियो को सबूत मानती है, जिसे सच बताया गया है। अगर सबूत सच है तो विजिलेंस के पास कानून की तमाम धाराएं हैं, जिन धाराओं पर वो मामला दर्ज कर सकती है।
जवाब - विजिलेंस हमेशा सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रेक्टिस के लिए पकड़ी है, तो उसकी वीडियो बनाकर डीआरएमई को भेजी दी जाती है। डीआरएमई मामले में खुद कार्रवाई करता है, क्योंकि यह मामला रिश्वत से नहीं जुड़ा है। सर्विस व प्रेक्टिस का है।
सवाल - जब डीआरएमई को ही कार्रवाई करनी है, तो विजिलेंस ने अपना कीमती समय क्यों बर्बाद किया?
जवाब - विजिलेंस को मुख्यालय (चंडीगढ़) को शिकायत मिली थी कि डॉ. डीएस बल प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और दूसरी तरफ सरकार से एनपीए भी ले रहे हैं, विजिलेंस ने स्टिंग ऑपरेशन करके प्राइवेट प्रैक्टिस करते कैमरे में कैद किया।
सवाल - क्या विजिलेंस ने जनहित में यह कदम उठाया या राजनीति से प्रेरित होकर। विजिलेंस बेबस है या सबूत नहीं हैं, बेबसी नहीं है तो एफआईआर क्यों नहीं।
जवाब - विजिलेंस तो वीडियो बनाकर भेजता है, आगे की कार्रवाई डीआरएमई ही करेगा।
सवाल - फिर विजिलेंस का स्टिंग ऑपरेशन कैसा
- जवाब नहीं
(नवजोत सिंह (डीएसपी, विजिलेंस) से संवाददाता की फोन पर हुई बातचीत पर आधारित)
जवाब - जी
सवाल - विजिलेंस ने धोखाधड़ी का केस क्यों नहीं दर्ज किया, जबकि यह सरकार के नियमों से खिलवाड़ है और कानून का उल्लंघन भी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि एफआईआर (फस्ट इनफॉरमेशन रिपोर्ट) दर्ज कर मामले की जांच शुरू हो, लेकिन विजिलेंस ने एफआईआर के बिना ही स्टिंग आपरेशन कर लिया।
जवाब - दो-तीन महीने पहले यह शिकायत विजिलेंस ब्यूरो चंडीगढ़ से आई थी। तीन-चार दिन से टीम लगातार प्रिंसिपल की निगरानी कर रही थी। आज टीम ने प्रिंसिपल के घर पर फर्जी मरीज भेजा था। इलाज के पहले तीन सौ रुपये पर्ची काटने की वीडियो बनाई है। वीडियो डीआरएमई चंडीगढ़ को भेजी है। जो भी हिदायतें आएंगी विजिलेंस काम करेगी।
सवाल - विजिलेंस हिदायतों पर काम करती है या कानून की धाराएं मानती है। अगर तीन महीने पहले शिकायत आई तो तीन दिन से ही निगरानी क्यों। विजिलेंस क्या उस वीडियो को सबूत मानती है, जिसे सच बताया गया है। अगर सबूत सच है तो विजिलेंस के पास कानून की तमाम धाराएं हैं, जिन धाराओं पर वो मामला दर्ज कर सकती है।
जवाब - विजिलेंस हमेशा सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रेक्टिस के लिए पकड़ी है, तो उसकी वीडियो बनाकर डीआरएमई को भेजी दी जाती है। डीआरएमई मामले में खुद कार्रवाई करता है, क्योंकि यह मामला रिश्वत से नहीं जुड़ा है। सर्विस व प्रेक्टिस का है।
सवाल - जब डीआरएमई को ही कार्रवाई करनी है, तो विजिलेंस ने अपना कीमती समय क्यों बर्बाद किया?
जवाब - विजिलेंस को मुख्यालय (चंडीगढ़) को शिकायत मिली थी कि डॉ. डीएस बल प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और दूसरी तरफ सरकार से एनपीए भी ले रहे हैं, विजिलेंस ने स्टिंग ऑपरेशन करके प्राइवेट प्रैक्टिस करते कैमरे में कैद किया।
सवाल - क्या विजिलेंस ने जनहित में यह कदम उठाया या राजनीति से प्रेरित होकर। विजिलेंस बेबस है या सबूत नहीं हैं, बेबसी नहीं है तो एफआईआर क्यों नहीं।
जवाब - विजिलेंस तो वीडियो बनाकर भेजता है, आगे की कार्रवाई डीआरएमई ही करेगा।
सवाल - फिर विजिलेंस का स्टिंग ऑपरेशन कैसा
- जवाब नहीं
(नवजोत सिंह (डीएसपी, विजिलेंस) से संवाददाता की फोन पर हुई बातचीत पर आधारित)