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अंगदाता अमित की बदौलत चार जिंदगियां फिर से मुस्कुराई
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अंगदाता अमित की फाइल फोटो।
- फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। कालका के टिपरा गांव निवासी 27 साल के अमित ने दुनिया से जाते हुए चार जिंदगियों को खुशियां देने का काम किया है। पीजीआई में इलाज के दौरान हुई मौत के बाद अमित के माता-पिता ने उसका अंगदान करने का निर्णय लेकर एक मिसाल पेश की। अमित की दोनों किडनी व दोनों कॉर्निया पीजीआई के चार मरीजों में प्रत्यारोपित की गई है।
अमित के परिजनों के इस निर्णय की सराहना करते हुए पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर जगतराम ने कहा कि इस परिवार के एक निर्णय ने कई परिवारों के दुर्भाग्य को खुशियों में बदल दिया है। इसके साथ ही उन्होंने कोविड-19 के दौरान अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को जारी रखने पर पीजीआई के डॉक्टरों की टीम की भी सराहना की।
6 अप्रैल की रात अमित अचानक सीढ़ियों से गिर गया। इससे उसे गंभीर चोटें आईं। अमित को तुरंत पंचकूला के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से डॉक्टरों ने 7 अप्रैल को उसे पीजीआई रैफर कर दिया। इलाज के दौरान 10 अप्रैल को अमित का ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। अमित के पिता सुभाष चंदर और माता नीलम कपूर का कहना है कि बेटे के जाने का दुख उनके लिए असहनीय है, लेकिन उनके द्वारा लिए गए निर्णय से अगर अन्य परिवारों का दुख कम होता है तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी। पीजीआई नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. एचएस कोहली ने बताया कि किडनी के दो बेहद गंभीर मरीज जो डायलिसिस पर निर्भर थे, उनके लिए अंगदान वरदान साबित हुआ, वहीं रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि कोविड के दौरान प्रत्यारोपण एक चुनौती भरा कार्य है। इसमें मृतक के साथ ही प्राप्तकर्ता की कोविड जांच की जाती है ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। पीजीआई में अप्रैल 2020 से अब तक एक साल के दौरान 28 किडनी, दो लीवर, एक हृदय और एक अग्नाशय के साथ ही 113 कार्निया प्रत्यारोपित की जा चुकी है।
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अमित के परिजनों के इस निर्णय की सराहना करते हुए पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर जगतराम ने कहा कि इस परिवार के एक निर्णय ने कई परिवारों के दुर्भाग्य को खुशियों में बदल दिया है। इसके साथ ही उन्होंने कोविड-19 के दौरान अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को जारी रखने पर पीजीआई के डॉक्टरों की टीम की भी सराहना की।
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6 अप्रैल की रात अमित अचानक सीढ़ियों से गिर गया। इससे उसे गंभीर चोटें आईं। अमित को तुरंत पंचकूला के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से डॉक्टरों ने 7 अप्रैल को उसे पीजीआई रैफर कर दिया। इलाज के दौरान 10 अप्रैल को अमित का ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। अमित के पिता सुभाष चंदर और माता नीलम कपूर का कहना है कि बेटे के जाने का दुख उनके लिए असहनीय है, लेकिन उनके द्वारा लिए गए निर्णय से अगर अन्य परिवारों का दुख कम होता है तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी। पीजीआई नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. एचएस कोहली ने बताया कि किडनी के दो बेहद गंभीर मरीज जो डायलिसिस पर निर्भर थे, उनके लिए अंगदान वरदान साबित हुआ, वहीं रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि कोविड के दौरान प्रत्यारोपण एक चुनौती भरा कार्य है। इसमें मृतक के साथ ही प्राप्तकर्ता की कोविड जांच की जाती है ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। पीजीआई में अप्रैल 2020 से अब तक एक साल के दौरान 28 किडनी, दो लीवर, एक हृदय और एक अग्नाशय के साथ ही 113 कार्निया प्रत्यारोपित की जा चुकी है।
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