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Hindi News ›   Chandigarh ›   Akali Leader Jarnail Wahid became owner of land belonging to Raja Jagatjit Singh of Kapurthala

जरनैल वाहिद: कपूरथला के राजा की जमीन का मालिक बन बैठा था वाहिद, रिकॉर्ड से भी गायब करवाया लाल पैन से लिखा नोट

Tue, 03 Oct 2023 03:29 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 03 Oct 2023 03:29 PM IST
सार

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने वाहद-संधार शुगर मिल्स लिमिटेड फगवाड़ा के प्रबंध निदेशक जरनैल सिंह वाहिद को गिरफ्तार किया था। वाहिद पर फगवाड़ा की सरकारी जमीन का दुरुपयोग करने और राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप है। अब जरनैल वाहिद के बारे में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं। 

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Akali Leader Jarnail Wahid became owner of land belonging to Raja Jagatjit Singh of Kapurthala
जरनैल सिंह वाहिद - फोटो : फाइल

विस्तार

कपूरथला राज्य के महाराजा जगतजीत सिंह ने 1933 में जो जमीन जगतजीत शुगर मिल के लिए दी थी, उसका मालिक जरनैल वाहिद परिवार बन गया। यह योजनाबद्ध तरीके से हुआ। 1974 के बाद जमाबंदी के रिकॉर्ड में लाल पैन से लिखा नोट गायब हो गया कि यह जमीन सरकारी है। इसके बाद रेवेन्यू व सहायक सिस्टम मैनेजर समेत कई राजस्व के अधिकारियों ने ऐसा खेल रचा कि राजा जगतजीत सिंह की जो जमीन सरकार की थी, उसका मालिक जरनैल वाहिद व उनका परिवार बन गया।

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महाराजा जगतजीत सिंह ने 1933 के अपने आदेश समझौते के साथ जगतजीत शुगर मिल्स कंपनी लिमिटेड को विकसित करने के लिए अपने राज्य में चीनी मिल उद्योग आवंटित किया था। इस मिल को चलाने के लिए उन्होंने 251 कनाल 18 मरले (31 एकड़ 03 कनाल 18 मरले) भूमि माफी के रूप में निशुल्क आवंटित की। इसका मालिकाना हक जगतजीत सिंह शुगर मिल्स कंपनी लिमिटेड को शर्तों के साथ दिया गया। शर्त नंबर 1 और 8 के अनुसार यह भूमि राज्य की है और इसे आगे बेचा या गिरवी नहीं रखा जा सकता था। यदि चीनी मिल बंद होती है तो जमीन बिना किसी मुआवजे के राज्य को वापस मिल जाएगी। 
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पहले इस मिल को ओसवाल एग्रो मिल्स लिमिटेड फगवाड़ा चला रहा था। इसके बाद वाहिद संधार शुगर्स लिमिटेड, फगवाड़ा के साथ एक समझौता हो जाता है। जगतजीत शुगर मिल कंपनी लिमिटेड फगवाड़ा और वाहिद संधार शुगर्स लिमिटेड फगवाड़ा के निदेशकों ने मिलीभगत कर सरकार की मंजूरी प्राप्त किए बिना जगतजीत शुगर मिल्स कंपनी लिमिटेड, फगवाड़ा से 99 साल की लीज पर मिल और जमीन का अधिग्रहण कर लिया। मजेदार बात है कि जगतजीत सिंह शुगर मिल का डायेक्टर जसविंदर सिंह था और वह ही संधार व वाहिद शुगर मिल का डायेक्टर था।

लीज डीड को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया
99 साल के लिए वाहिद संधार शुगर मिल ने जमीन लीज पर ली लेकिन इसमें एक नई शर्त डाल दी गई कि अब वाहिद संधार शुगर्स लिमिटेड फगवाड़ा ऋण लेने के लिए संपत्ति को किसी भी बैंक और वित्तीय संस्थान के पास गिरवी रख सकता है, जिसमें जगतजीत शुगर मिल्स लिमिटेड कंपनी को कोई आपत्ति नहीं है।

 

इस लीज डीड को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया, ताकि ऋण आदि लेते समय बैंक और सरकार को धोखा दिया जा सके। वाहिद संधार शुगर्स लिमिटेड ने ऋण की गारंटी के रूप में इस सरकारी भूमि को गिरवी रखा और अवैध वित्तीय लाभ प्राप्त कर लिया। इस बीच समांतर रूप से राजस्व विभाग में भी खेल शुरू किया गया। 1974 तक की जमाबंदी पर हर बार लाल पैन से पटवारी का नोट लगता था कि जमीन सरकार की है, लेकिन 1974 की जमाबंदी के बाद नोट ही लिखना बंद कर दिया गया।
 

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निदेशकों ने फिर बनाई नई कंपनी
2006 में सारा रिकॉर्ड कंप्यूटराइज होने लगा और कंप्यूटर पर भी जमाबंदियों पर लिखा लाल रंग का नोट उड़ा दिया गया कि जमीन सरकारी है, इसे बेचा या इस पर कर्ज नहीं लिया जा सकता। वहीं वाहिद संधार शुगर्स लिमिटेड के निदेशकों ने शुगर मिल प्लाजा प्राइवेट लिमिटेड, जीटी रोड फगवाड़ा नाम से नई कंपनी बनाई जो 2010-11 में पंजीकृत हुई थी। 2013-14 में इन निदेशकों की मिलीभगत से मैसर्स डब्लूएस फिटनेस प्राइवेट लिमिटेड, पीएसईबी कार्यालय के सामने, बंगा रोड, फगवाड़ा नामक अन्य कंपनी भी पंजीकृत की गई, जिसके निदेशकों ने मिलीभगत से सरकारी रकबे का कुछ हिस्सा बेच दिया। 2017 में 4 कनाल भूमि बेची गई और 251 कनाल 18 मरला भूमि भारतीय स्टेट बैंक, औद्योगिक वित्त शाखा, ढोलेवाल चौक, लुधियाना के पास गिरवी रखी गई। रिकॉर्ड में ही नहीं ऑनलाइन रिकॉर्ड में पूरी हेराफेरी कर दिखाया गया कि जमीन के मालिक वाहिद के परिवारिक सदस्य हैं।

साजिश के तहत रजिस्ट्री एसबीआई लुधियाना के पक्ष में की
जगतजीत शुगर मिल्स कंपनी लिमिटेड फगवाड़ा के स्वामित्व वाली 6 कनाल 4 मरले सरकारी भूमि के पंजीकरण में तत्कालीन राजस्व विभाग के अधिकारियों ने पंजाब पंजीकरण मैनुअल 1929 की धारा 135 का उल्लंघन कर किया। यह जानते हुए भी कि यह सरकारी जमीन है और इसे बैंक के पास गिरवी नहीं रखा जा सकता। राजस्व अधिकारियों ने आपराधिक साजिश के तहत इस जमीन की रजिस्ट्री भारतीय स्टेट बैंक लुधियाना के पक्ष में कर दी। दिलचस्प पहलू है कि 1973 में मिल प्रबंधन ने मिल की जमीन का एक हिस्सा प्लॉट (अधिशेष भूमि) बनाकर बेचने की कोशिश की थी, इस संबंध में पंजाब के राजस्व विभाग के तत्कालीन उप सचिव ने एक पत्र जारी किया। जिसमें जमीन की बिक्री पर रोक लगाते हुए कमिश्नर कपूरथला को सख्त आदेश जारी किए गए थे।

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