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SYL मामला: अकाली सरकार के प्रस्ताव को कांग्रेस ने बताया निराधार और तर्कहीन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 Nov 2016 09:03 PM IST
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अकालियों का प्रस्ताव निराधार और तर्कहीन
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अकाली सरकार की ओर से विधानसभा में पेश प्रस्ताव को निराधार और तर्कहीन बताया है। साथ ही राज्य के पास खरीदने या बेचने के लिए अतिरिक्त पानी न होने की सच्चाई को मानने से इंकार कर रही बादल सरकार की निंदा की है।
कैप्टन ने कहा कि पंजाब किसी भी कीमत पर अपने नॉन-राइपेरियन राज्यों को पानी नहीं दे सकता। क्योंकि पंजाब खुद पानी की भारी तंगी का सामना कर रहा है। ऐसे में पानी बांटने का सवाल ही पैदा नहीं होता, लेकिन कुछ अज्ञात कारणों के चलते अकालियों का प्रस्ताव मुख्य विषय पर पूरी तरह शांत है। यह अकाली सरकार की ओर से एसवाईएल मामले की गंभीर स्थिति को छिपाने की अधूरी कोशिश है। कैप्टन ने सरकार की अपने प्रस्ताव में पंजाब में पानी की कमी और पानी बांटने में असमर्थता को सामने न रखने के लिए निंदा की।
उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में दर्शाए गए आजादी से पहले के उदाहरणों को 1955 के कानून ने खत्म कर दिया है, जिसमें स्पष्ट तौर पर जिक्र किया गया है कि पानी का बंटवारा बिना किसी कीमत के होगा। यह केंद्र का कानून है, इसे अस्वीकार करने का प्रयत्न करने से पहले केंद्र की इजाजत लेनी जरूरी है। क्या बादल ने ऐसा कदम उठाने से पहले केंद्र सरकार की रजामंदी ली है।
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कैप्टन ने कहा कि पंजाब किसी भी कीमत पर अपने नॉन-राइपेरियन राज्यों को पानी नहीं दे सकता। क्योंकि पंजाब खुद पानी की भारी तंगी का सामना कर रहा है। ऐसे में पानी बांटने का सवाल ही पैदा नहीं होता, लेकिन कुछ अज्ञात कारणों के चलते अकालियों का प्रस्ताव मुख्य विषय पर पूरी तरह शांत है। यह अकाली सरकार की ओर से एसवाईएल मामले की गंभीर स्थिति को छिपाने की अधूरी कोशिश है। कैप्टन ने सरकार की अपने प्रस्ताव में पंजाब में पानी की कमी और पानी बांटने में असमर्थता को सामने न रखने के लिए निंदा की।
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उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में दर्शाए गए आजादी से पहले के उदाहरणों को 1955 के कानून ने खत्म कर दिया है, जिसमें स्पष्ट तौर पर जिक्र किया गया है कि पानी का बंटवारा बिना किसी कीमत के होगा। यह केंद्र का कानून है, इसे अस्वीकार करने का प्रयत्न करने से पहले केंद्र की इजाजत लेनी जरूरी है। क्या बादल ने ऐसा कदम उठाने से पहले केंद्र सरकार की रजामंदी ली है।
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'पानी की तंगी के मुद्दे को जानबूझ कर नजरअंदाज कर रही है सरकार'
Captain Amarinder Singh
- फोटो : File Photo
कैप्टन ने कहा कि बादल सरकार ने भविष्य में पानी के बंटवारे का जिक्र न करके, रिकवरी की लागतों संबंधी अपने प्रस्ताव को भी अस्पष्ट रखा है। हालांकि, इसे लेकर राज्य सरकार की मंशा साफ नजर आ रही है। अकालियों ने 1966 के बाद से अन्य राज्यों के साथ पानी के बंटवारे पर रॉयल्टी मांग कर भविष्य में भी बंटवारे की इसी तरह मांग रखे जाने की नींव रख दी है।
उन्होंने सीएम से सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में फैसले के चलते पैदा हुई समस्या को पुराने पानी की लागत की रिकवरी कैसे सुलझाएगी। कैप्टन ने केंद्र सरकार से मामले में दखल देने और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सही तथ्य पेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र खुद पंजाब के तीन चौथाई हिस्से को पानी की कमी के चलते डार्क जोन घोषित कर चुका है। ऐसे में किस प्रकार लागत या बिना लागत पानी बांटने का मुद्दा उठ सकता है। उन्होंने एसवाईएल की जमीन डी-नोटिफाई करने से संबंधित दूसरे प्रस्ताव को हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा कि डी-नोटिफिकेशन बिल पास करने के बाद यह कहने का क्या अर्थ है कि जमीन किसी एजेंसी को नहीं देनी चाहिए। जबकि, एसवाईएल की कोई जमीन ही नहीं बची है।
उन्होंने सीएम से सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में फैसले के चलते पैदा हुई समस्या को पुराने पानी की लागत की रिकवरी कैसे सुलझाएगी। कैप्टन ने केंद्र सरकार से मामले में दखल देने और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सही तथ्य पेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र खुद पंजाब के तीन चौथाई हिस्से को पानी की कमी के चलते डार्क जोन घोषित कर चुका है। ऐसे में किस प्रकार लागत या बिना लागत पानी बांटने का मुद्दा उठ सकता है। उन्होंने एसवाईएल की जमीन डी-नोटिफाई करने से संबंधित दूसरे प्रस्ताव को हास्यास्पद बताया। उन्होंने कहा कि डी-नोटिफिकेशन बिल पास करने के बाद यह कहने का क्या अर्थ है कि जमीन किसी एजेंसी को नहीं देनी चाहिए। जबकि, एसवाईएल की कोई जमीन ही नहीं बची है।