पराली का असर: पंजाब के आठ जिलों की हवा हुई दूषित, लुधियाना सबसे प्रदूषित
- लुधियाना का वायु गुणवत्ता सूचकांक 218 पहुंचा, अन्य सात जिलों का 200 से नीचे
- विशेषज्ञों का मानना, अभी और दूषित हो सकती है सूबे की हवा
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पराली जलाने का असर अब पंजाब पर भी पड़ने लगा है। पराली से सूबे के आठ जिलों की हवा की गुणवत्ता खराब हो गई है। लुधियाना का वायु गुणवत्ता सूचकांक ऑरेंज जोन में पहुंच गया है। बाकी सात जिले एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के अनुसार येलो जोन में हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में अभी धान की फसल पूरी तरह से नहीं कटी है। आने वाले दिनों में हालात और भी खराब होने की आशंका है।
पंजाब के लिए पराली हमेशा ही परेशानी का सबब रही है। इस साल भी सरकार के दावों के विपरीत पराली जलाने से पंजाब की आबोहवा खराब होने लगी है। आंकड़ों के अनुसार इस साल पराली जलाने की घटनाएं पिछले वर्ष के मुकाबले 280 प्रतिशत बढ़ी हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव अब पंजाब पर भी पड़ने लगा है।
पराली के धुएं से राज्य के आठ जिलों की हवा दूषित हो चुकी है। इसमें लुधियाना का वायु गुणवत्ता सूचकांक 218 तक पहुंच गया है और उसे ऑरेंज श्रेणी में रखा गया है। इसके अतिरिक्त पटियाला, बठिंडा, मंडी गोबिंदगढ़, जालंधर, खन्ना और अमृतसर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से अधिक पहुंच गया है, जिस कारण इन जिलों को येलो जोन में एक्यूआई इंडेक्स में दर्शाया गया है।
कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार अभी धान की फसल पूरी तरह से कट नहीं पाई है, जिससे पराली जलाने की घटनाएं अभी कम हैं। फसल कटने के साथ ही आने वाले माह में हालात और भी खराब होने की संभावना है।
यह रहना चाहिए एक्यूआई का स्तर
वायु गुणवत्ता सूचकांक 0-50 तक के के अच्छे स्तर को दर्शाता है। 51-100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201-300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब, 401 से 500 गंभीर और 500 से ऊपर गंभीर और आपातकालीन स्थिति में गिना जाता है। पंजाब में अभी अधिकतम लुधियाना का स्तर मध्यम श्रेणी में आया है।
पंजाब के आठ जिलों का एक्यूआई स्तर
क्रम शहर एक्यूआई
- 1. लुधियाना 218
- 2. पटियाला 165
- 3. बठिंडा 157
- 4. मंडी गोविंदगढ़ 153
- 5. जालंधर 152
- 6. खन्ना 152
- 7. अमृतसर 145
- 8. रोपड़ 82
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए प्रयासरत है। जिन जिलों में एक्यूआई का स्तर बढ़ा है, वह जिले कृषि प्रधान हैं। धान कटाई का समय है, ऐसे में प्रदूषण का स्तर बढ़ना लाजिमी है। करुणेश गर्ग, मेंबर सेक्रेट्री, पीपीसीबी।