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किसान अब ड्रोन की मदद से कर सकेंगे मिट्टी की जांच, जानिए कैसे?

Tue, 22 Nov 2016 01:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 22 Nov 2016 01:43 PM IST
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agrotech 2016, iit kharagpur students invented technique to test soil by using drone
एग्रोटेक 2016 में प्रदर्शित किया गया मिट्टी की जांच करने वाला ड्रोन
किसानों के लिए खास खबर। अब वे ड्रोन की मदद से मिट्टी की जांच कर सकेंगे। आईआईटी खड़गपुर ने इस प्रोग्राम की शुरूआत की है। आईआईटी खड़गपुर ‘एग्नैक्स्ट’ के तहत खेतों की डिजिटाइजेशन को प्रोत्साहित कर रहा है। इसके लिए आईआईटी ‘हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग टेक्नोलॉजी’ लाया है।
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सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग की इस तकनीक के जरिए किसान खेतों से मिट्टी की उर्वरता और फसल में बीमारी के प्रकोप का निर्धारण कर सकते हैं। आईआईटी खड़गपुर के विद्यार्थियों ने ड्रोन के जरिए डाटा एकत्र किया और इसका आंकलन किया। इसके बाद फसलों के विश्लेषण को लेकर एक मंच तैयार किया।
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ड्रोन में सेंसर और इमेजिंग तकनीक से युक्त एक लैंस है। बीज के अंकुरण, इसके बाद मध्य चरण की निगरानी, फसल उत्पादन और फसलों पर कीटों के हमले के बारे में एक प्रभावी और कुशल तरीके से पता लगाने में मदद करता है।
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इस ड्रोन को टैबलेट और स्मार्टफोन से भी संचालित किया जा सकता है। आईआईटी खड़गपुर से आए ग्रुप के लीड मेंबर तरनजीत सिंह ने बताया कि इसे ऐसी तकनीक से विकसित किया गया है कि किसान मिट्टी के नक्शे और उपजाऊ क्षमता की पहचान कर सकें।

केंद्र सरकार से सहायता राशि की मांग करेंगे स्टूडेंट्स

agrotech 2016, iit kharagpur students invented technique to test soil by using drone
ड्रोन
तरनजीत के अनुसार इस प्रोजेक्ट के लिए वह केंद्र सरकार से सहायता राशि उपलब्ध करवाने की मांग करेंगे। ताकि भारत के कोने-कोने से मिट्टी के नमूने एकत्र किए जा सके। उनके अनुसार ड्रोन तकनीक से किसान अपनी कृषि लागत को 20 से 30 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। साथ ही अपनी उत्पादन क्षमता को 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।

हनी बी एपिथैरेपी से दमा जैसे रोगों पर नियंत्रण संभव
सीआईआई एग्रो टेक में कृषि क्षेत्र से कुछ हटकर भी देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में उगानी हनी बी फार्म सामने आया है। हॉर्टीकल्चर विभाग पंजाब से सिमरनजीत सिंह एपिथैरेपी को खोजने के लिए कुछ समय पहले पंजाब से यूरोप गए। पौष्टिकता एवं औषधीय गुणों के कारण आर्गेनिक शहद एक खजाना है और इन गुणों की वजह से एपिथैरेपी में इसका उपयोग काफी बढ़ जाता है।

एपिथैरेपी को पहली बार भारत में देखा गया है। एपिथैरेपी में बॉडी विवानम थैरेपी को शामिल किया गया है, जो कि फेफड़ों में संक्रमण, दमा और जोड़ों में दर्द जैसे रोगों को ठीक करने में उपयोगी है। इस थैरेपी में रॉयल जैली का उपयोग किया गया है। इसे जख्मों को भी भरने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कई तरह की एलर्जी भी दूर की जा सकती है और काफी राहत मिलती है।
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