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134ए नियम के तहत दाखिले का मामला गरमाया, बच्चे पहुंचे हाईकोर्ट

Sun, 26 Jun 2016 10:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 26 Jun 2016 10:04 AM IST
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admission under rule 134a controversy, poor childrens admission in private schools, highcourt
highcourt
हरियाणा के निजी स्कूलों में 134ए के तहत दाखिले को लेकर अब बच्चों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार द्वारा बदले गए नियमों को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है। जस्टिस एम. जयपॉल ने इस याचिका पर सुनवाई की तारीख 12 जुलाई तय की है।
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बालिका तानिया, दीया सहरावत और रेजुल कुमार की ओर से दायर याचिका में शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव, एलिमेंटरी शिक्षा विभाग के निदेशक, जिला स्तरीय कमेटी और डीईओ पंचकूला के प्रतिवादी बनाते हुए मांग की गई है कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए आरटीई कानून में प्रदेश सरकार द्वारा गरीब बच्चों के दाखिले को लेकर किए गए विभिन्न संशोधनों को रद किया जाए और संशोधित नियमों के आधार पर शुरू की गई दाखिला प्रक्त्रिस्या को रद कर नए सिरे से दाखिले कराए जाएं।
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हरियाणा सरकार पर असफलता के आरोप लगाए

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पंचकूला में सीएम मनोहर लाल खट्टर की रैली - फोटो : amar ujala
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में उपस्थित एडवोकेट अंकित ग्रेवाल ने कहा कि सभी याचिकाकर्ता हरियाणा के निवासी व ईडब्ल्यूएस वर्ग से संबंधित हैं और कक्षा आठवीं, पांचवीं और चौथी में दाखिला लेना चाहते हैं।

याचिका में केंद्र सरकार द्वारा सबके लिए शिक्षा को अ?निवार्य करते हुए बनाए गए कानून का हवाला देते हुए कहा गया है कि केंद्र ने मेधावी लेकिन गरीब बच्चों के लिए गैरअनुदान प्राप्त स्कूलों में 25-30 फीसदी सीटें रखने का प्रावधान किया था लेकिन हरियाणा सरकार ने इस कानून में 2007 में संशोधन करते हुए नियम 134ए लागू करके ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों के लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित कर दीं।

इसके बाद 2009 और फिर 19 जून, 2013 को नए संशोधन कर गरीब बच्चों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 25 से घटाकर 10 फीसदी कर दी गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हरियाणा सरकार नियम 134ए के तहत भी गरीब बच्चों की पढ़ाई को सुनिश्चित करने में असफल रही है।

गैर कानूनी तरीके से नियमों में बदलाव करने का आरोप

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सीएम खट्टर - फोटो : ani
याचिका में वर्ष 2016-17 के लिए शिक्षा विभाग द्वारा चलाई की दाखिला प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा गया है कि बच्चों के दाखिला आवेदन भरे जाने के बाद विभाग ने निजी स्कूलों के दबाव में दाखिला प्रक्रिया रोक दी।

याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदेश के मंत्रियों के भी निजी स्कूल चल रहे हैं, जिसके चलते विभाग कोई फैसला नहीं ले रहा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विभाग ने इसी सत्र में गैरकानूनी ढंग से नियमों में बदलाव कर गरीब बच्चों के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट और मेरिट जैसी शर्तें लागू कर दीं। इसमें भी कटआफ 55 फीसदी तय किया गया जबकि सरकारी स्कूलों के बच्चों को स्क्रीनिंग टेस्ट से छूट दे दी गई।

याचिकाकर्ता बच्चों को स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए रोल नंबर 832, 428 और 522 अलाट किए गए थे और टेस्ट में उन्होंने 33, 51 और 54 अंक हासिल किए, जिसके चलते उन्हें फेल करार देते हुए कोई स्कूल अलाट नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने आरटीई और नियम 134-ए के तहत दाखिला दिलाए जाने की मांग की है।
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