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Chandigarh News: फीस वृद्धि के विरोध में एबीवीपी का प्रदर्शन, वीसी कार्यालय के बाहर नियम पुस्तिका फूंकी
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में लगातार हो रही फीस वृद्धि के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बुधवार को कुलपति कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय की फीस नियम पुस्तिका का प्रतीकात्मक दहन कर बढ़ी हुई फीस तुरंत वापस लेने की मांग उठाई। प्रदर्शन में काफी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया और विश्वविद्यालय में सुविधाओं की गिरती गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए।
प्रदर्शन का नेतृत्व एबीवीपी पंजाब विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष आशीष शर्मा ने किया। उनके साथ प्रदेश मंत्री जसकरण भुल्लर, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य गौरव वीर सोहल, इकाई मंत्री आरव रघुवंशी सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन हर शैक्षणिक सत्र में फीस बढ़ा रहा है, जबकि छात्रों को मूलभूत सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। एबीवीपी नेताओं ने कहा कि पिछले दो शैक्षणिक सत्रों में विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। उनका कहना था कि जब विश्वविद्यालय छात्रावासों की स्थिति सुधारने, छात्र कल्याण सुविधाओं को बेहतर बनाने और शिक्षकों के रिक्त पद भरने में सफल नहीं हो पाया है, तो छात्रों पर लगातार आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।
प्रदर्शन के बाद एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात कर फीस वृद्धि पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। प्रतिनिधिमंडल ने बढ़ी हुई फीस वापस लेने, विश्वविद्यालय के वित्तीय निर्णयों में पारदर्शिता लाने और शिक्षकों की जल्द भर्ती करने की मांग रखी। एबीवीपी के अनुसार, कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि फीस वृद्धि के मुद्दे की समीक्षा और छात्रों की चिंताओं पर विचार के लिए जल्द ही एक समिति गठित की जाएगी। परिषद ने इस आश्वासन का स्वागत करते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो छात्रों के हित में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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प्रदर्शन का नेतृत्व एबीवीपी पंजाब विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष आशीष शर्मा ने किया। उनके साथ प्रदेश मंत्री जसकरण भुल्लर, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य गौरव वीर सोहल, इकाई मंत्री आरव रघुवंशी सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन हर शैक्षणिक सत्र में फीस बढ़ा रहा है, जबकि छात्रों को मूलभूत सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। एबीवीपी नेताओं ने कहा कि पिछले दो शैक्षणिक सत्रों में विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। उनका कहना था कि जब विश्वविद्यालय छात्रावासों की स्थिति सुधारने, छात्र कल्याण सुविधाओं को बेहतर बनाने और शिक्षकों के रिक्त पद भरने में सफल नहीं हो पाया है, तो छात्रों पर लगातार आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।
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प्रदर्शन के बाद एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात कर फीस वृद्धि पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। प्रतिनिधिमंडल ने बढ़ी हुई फीस वापस लेने, विश्वविद्यालय के वित्तीय निर्णयों में पारदर्शिता लाने और शिक्षकों की जल्द भर्ती करने की मांग रखी। एबीवीपी के अनुसार, कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि फीस वृद्धि के मुद्दे की समीक्षा और छात्रों की चिंताओं पर विचार के लिए जल्द ही एक समिति गठित की जाएगी। परिषद ने इस आश्वासन का स्वागत करते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो छात्रों के हित में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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