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Chandigarh News: मेयर का कार्यकाल पांच वर्ष करने का प्रस्ताव संसद में पेश

Sat, 06 Dec 2025 12:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Dec 2025 12:53 AM IST
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A proposal to increase the mayor's tenure to five years has been introduced in Parliament.
चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम में ऐतिहासिक बदलाव होने का रास्ता खुल गया है। लोकसभा में शहर के सांसद मनीष तिवारी ने पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन लॉ एक्सटेंशन टू चंडीगढ़ एक्ट 1994 में संशोधन प्रस्ताव पेश किया है। इसमें मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने की मांग की गई है। संसद में इस पर बहस होगी और प्रस्ताव पास होने पर मेयर का कार्यकाल पाँच वर्ष का हो जाएगा।
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चंडीगढ़ नगर निगम की स्थापना 1996 में हुई थी और तभी से मेयर का कार्यकाल सिर्फ एक वर्ष तय है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इतने कम समय में मेयर प्रशासनिक ढांचा समझते-समझते ही पद से हट जाता है, जिससे विकास कार्यों में निरंतरता नहीं रहती, हर वर्ष नेतृत्व बदलने से कई परियोजनाएं अटक जाती हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए पांच वर्ष का कार्यकाल सुझाया गया है ताकि मेयर दीर्घकालिक योजनाओं पर प्रभावी रूप से काम कर सके।
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संशोधन में यह भी प्रस्तावित है कि पार्षदों पर दलबदल कानून लागू किया जाए। पार्षद यदि पार्टी बदलते हैं तो उनकी तुरंत सदस्यता रद्द होगी। यह नियम विधायक और सांसदों की तर्ज पर लागू किया जाएगा। नगर निगम राजनीति में बढ़ रहे दलबदल को रोकने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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मेयर को मिलेंगी बढ़ी हुईं शक्तियां
यदि संशोधन लागू हुआ तो मेयर की भूमिका काफी मजबूत हो जाएगी। यूटी प्रशासन और नगर आयुक्त के कई अधिकार मेयर को हस्तांतरित हो जाएंगे। मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को एसडीएम स्तर तक के अधिकारियों की एसीआर लिखने का अधिकार मिल जाएगा। जलापूर्ति, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्क, सामुदायिक ढांचे जैसी स्थानीय सेवाएं मेयर इन काउंसिल के अधीन हो जाएंगी। इससे निर्णय प्रक्रियाओं में तेजी और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी। फिलहाल ये अधिकार नगर आयुक्त और प्रशासन के पास होते हैं जिससे जनप्रतिनिधियों का नियंत्रण सीमित रहता है।
कमिश्नर की नियुक्ति में भी मेयर का दखल
संशोधन में सुझाव दिया गया है कि नगर आयुक्त की नियुक्ति मेयर इन काउंसिल की सिफारिश पर हो, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन संयुक्त रूप से अधिकारियों का पैनल तैयार करें, कमिश्नर की एसीआर लिखने का अधिकार भी मेयर को दिया जाए, यह बदलाव निगम में चुने हुए नेतृत्व की ताकत को काफी बढ़ाएगा।
वार्ड समितियों और विशेष समितियों की संरचना में बदलाव
प्रस्ताव के अनुसार वार्ड समितियों का गठन यूटी प्रशासक करेंगे। विशेष समितियों, निगम सीमा और वार्ड संरचना निर्धारण की शक्ति भी प्रशासक के पास रहेगी। हालांकि, रोजमर्रा के कामकाज और स्थानीय शासन में चुने हुए सदस्यों की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी।
सांसद तिवारी बोले-चंडीगढ़ को स्थिर नेतृत्व की जरूरत
मनीष तिवारी ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और शहरी चुनौतियों के बीच चंडीगढ़ को एक स्थिर और जवाबदेह नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि देश के कई बड़े नगर निगम पहले से ही इसी मॉडल पर चल रहे हैं। संशोधन लागू होने पर निगम की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विकासोन्मुखी हो जाएगी।

पांच वर्ष के मेयर कार्यकाल से क्या होगा फायदा
प्रशासनिक नेतृत्व में स्थिरता, विकास परियोजनाओं में तेजी और निरंतरता, हर वर्ष नेतृत्व बदलने से होने वाली बाधाओं का अंत, बढ़ी हुई शक्तियों से मेयर की निर्णय क्षमता मजबूत, अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। अगर संशोधन पास होता है तो यह चंडीगढ़ नगर निगम में अब तक का सबसे बड़ा परिवर्तन माना जाएगा।
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