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पैरालिसिस के मरीजों के लिए एक डिवाइस, खड़े भी हो सकेंगें और चलेंगे भी
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 01 Mar 2017 04:31 PM IST
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पैरालिसिस पेशेंट के लिए तैयार किया गया स्पेशल डिवाइस
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स्ट्रोक व पैरालिसिस के मरीजों के लिए एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है, जिसकी मदद से वे अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं और चल-फिर सकते हैं। केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) के वैज्ञानिकों ने इस डिवाइस का नाम मोबिलिटी असिस्टीव गेट डिवाइस फॉर रीहैबिलीटेशन (मित्र) रखा है। इससे उन मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जिनका निचला हिस्सा काम करना बंद कर देता है। डिवाइस पहनने के बाद मरीज को चलने-फिरन के लिए किसी अन्य व्यक्ति की मदद नहीं लेनी पड़ेगी। इससे सीएसआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीलेश कुमार ने तैयार किया है।
ऐसे काम करता है उपकरण
डॉ. नीलेश कुमार ने बताया कि इसमें खास तरह की एक मोटर लगी है, जो 100 किलो तक के वजन को उठाने में सक्षम है। इसमें एक कंट्रोलर सिस्टम है, जो हाथों में फिट रहेगा। ये उपकरण समतल व थोड़ी उबड़-खाबड़ जगह पर व्यक्ति को चलने में मदद करेगा। सीढ़ियों पर चढ़ने में यह उपकरण काम नहीं करेगा, लेकिन डॉ. नीलेश इसको अपडेट करने में लगे हुए हैं। उनके मुताबिक उनकी टीम काम कर रही है, जल्द ही अपग्रेड वर्जन भी मार्केट में आ जाएगा।
विदेश में कीमत 50 लाख, सीएसआईओ ने पांच लाख में तैयार किया
यह डिवाइस भारत में तैयार नहीं होती थी। विदेश से आयात होने पर इसकी कीमत 50 लाख रुपये पड़ती है। सीएसआईओ ने इसे सिर्फ पांच लाख में तैयार किया है। अब सीएसआईओ ने इस टेक्नोलॉजी को पेंटाजेन कंपनी को ट्रांसफर कर दिया है। अब कंपनी इसमें प्राफिट लेकर मार्केट में लाएगी। इसके बावजूद विदेश के मुकाबले ये काफी सस्ता होगा। जिसका फायदा मरीज को मिलेगा।
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चीफ गेस्ट ने भी सराहा
सीएसएसआई में मंगलवार को नेशनल साइंस-डे का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर डॉ. आर चिदंबरम ने शिरकत की। इस मौके पर दिव्यांग व ट्रामा मरीजों के लिए तैयार डिवाइसों की प्रदर्शनी लगाई गई। डॉ. चिदंबरम ने एग्जीबिशन का उद्घाटन किया। उन्होंने मित्र को देखने के बाद डॉ. नीलेश कुमार और डायरेक्टर प्रोफेसर आरके सिन्हा की तारीफ की।
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ऐसे काम करता है उपकरण
डॉ. नीलेश कुमार ने बताया कि इसमें खास तरह की एक मोटर लगी है, जो 100 किलो तक के वजन को उठाने में सक्षम है। इसमें एक कंट्रोलर सिस्टम है, जो हाथों में फिट रहेगा। ये उपकरण समतल व थोड़ी उबड़-खाबड़ जगह पर व्यक्ति को चलने में मदद करेगा। सीढ़ियों पर चढ़ने में यह उपकरण काम नहीं करेगा, लेकिन डॉ. नीलेश इसको अपडेट करने में लगे हुए हैं। उनके मुताबिक उनकी टीम काम कर रही है, जल्द ही अपग्रेड वर्जन भी मार्केट में आ जाएगा।
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विदेश में कीमत 50 लाख, सीएसआईओ ने पांच लाख में तैयार किया
यह डिवाइस भारत में तैयार नहीं होती थी। विदेश से आयात होने पर इसकी कीमत 50 लाख रुपये पड़ती है। सीएसआईओ ने इसे सिर्फ पांच लाख में तैयार किया है। अब सीएसआईओ ने इस टेक्नोलॉजी को पेंटाजेन कंपनी को ट्रांसफर कर दिया है। अब कंपनी इसमें प्राफिट लेकर मार्केट में लाएगी। इसके बावजूद विदेश के मुकाबले ये काफी सस्ता होगा। जिसका फायदा मरीज को मिलेगा।
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चीफ गेस्ट ने भी सराहा
सीएसएसआई में मंगलवार को नेशनल साइंस-डे का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर डॉ. आर चिदंबरम ने शिरकत की। इस मौके पर दिव्यांग व ट्रामा मरीजों के लिए तैयार डिवाइसों की प्रदर्शनी लगाई गई। डॉ. चिदंबरम ने एग्जीबिशन का उद्घाटन किया। उन्होंने मित्र को देखने के बाद डॉ. नीलेश कुमार और डायरेक्टर प्रोफेसर आरके सिन्हा की तारीफ की।