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NGO का दावा: पंजाब में आतंकवाद के दौरान 8257 लोग हुए लापता

Sun, 03 Dec 2017 03:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 03 Dec 2017 03:30 PM IST
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8257 people lost during terrorism in Punjab
अपने बेटे बलविंदर सिंह की फोटो हाथों में लिए लखबीर कौर। - फोटो : अमर उजाला
पंजाब डाक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी प्रोजेक्ट (पीडीएपी) नामक गैर सरकारी संस्था ने सात साल लंबी खोजबीन के बाद पंजाब में 1980 से 1995 के दौरान लापता हुए युवा, झूठे पुलिस मुकाबले, पुलिस द्वारा घरों से उठा लिए गए लोग जो आज तक घर नहीं लौटे, का जिलेवार ब्योरा तैयार किया है।
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संस्था की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवाद के दौर की उक्त अवधि के दौरान 8257 मामलों में गुम हुए लोगों का आजतक पता नहीं चला है। संस्था ने सूबे से 22 जिलों में पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से युवाओं को घरों से उठाकर उनके एनकाउंटर करने और शवों को सामूहिक तौर पर जला दिए जाने के आरोप लगाए हैं। संस्था की ओर से यह भी दावा किया गया है कि उसकी खोजबीन में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्हें जल्द ही याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा और पूरी मामले की सीबीआई जांच की मांग की जाएगी।
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शनिवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उक्त संस्था के पदाधिकारियों के अलावा भारी संख्या में वे लोग उपस्थित थे, जिनके परिजनों को आतंकवाद के दौरान पुलिस घर से उठाकर ले गई या जिन्हें फर्जी एनकाउंटरों में मार दिया गया।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन पर मामला खुर्दबुर्द करने का आरोप

8257 people lost during terrorism in Punjab
आतंकवाद के दौरान 8257 लोग हुए लापता
पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था को जांच के दौरान 22 जिलों की म्यूनिसिपल कमेटियों से यह रिकार्ड मिला है कि उक्त अवधि के दौरान भारी संख्या में लावारिस शवों का सामूहिक संस्कार किया गया। पीडीएपी ने अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कार्यशैली पर भी उंगली उठाते हुए आरोप लगाया है कि आयोग ने पंजाब में सामूहिक कत्लेआम के मामले पर ढिलाई बरती।

आयोग के समक्ष जिन 2097 मामलों का खुलासा मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा ने 1995 में अमृतसर के तीन पुलिस जिलों के बारे में किया था, उन मामलों को आयोग ने पहले तो कानूनी पेच में लटका दिया और बाद में अमृतसर से बाहर के हत्या के मामलों को सुनने से इंकार कर दिया। संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि मणिपुर में ऐसी ही अमानवीय कार्रवाई में पुलिस द्वारा घरों से उठा लिए गए 1000 लोग अब तक लापता हैं।

इस मामले में ह्यूमन राइट अलर्ट के बबलू लायथम बम द्वारा दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए हैं। सीबीआई अब तक 90 केसों का खुलासा कर चुकी है। इसी केस के आधार पर अब पंजाब के मामले को भी सुप्रीम कोर्ट ले जाया जाएगा और सीबीआई जांच की मांग की जाएगी।
 
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