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Chandigarh News: पब्लिक हेल्थ डिवीजन में 70 पद खाली, भुगतान में मिलीं गंभीर खामियां
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चंडीगढ़। प्रशासन के पब्लिक हेल्थ डिवीजन नंबर-7 में कर्मचारियों की कमी से लेकर निर्माण कार्यों के भुगतान और वित्तीय रिकॉर्ड तक में कई खामियां सामने आई हैं। अप्रैल 2023 से मार्च 2025 तक के रिकॉर्ड की ऑडिट जांच में विभाग के 113 स्वीकृत पदों में से 70 खाली मिले। केवल 43 कर्मचारी कार्यरत थे।
सेक्टर-25 के सरकारी मॉडल हाई स्कूल में पेयजल टैंक और पब्लिक हेल्थ सेवाओं के नवीनीकरण का विस्तृत अनुमान 72.86 लाख रुपये था। इसके लिए 79.18 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी मिली और ठेका 45.40 लाख रुपये में दिया गया। बदलावों और अतिरिक्त मदों के बाद भुगतान 77.56 लाख रुपये तक पहुंच गया। अतिरिक्त कार्यों की सक्षम अधिकारी से पूर्व मंजूरी नहीं ली गई। ठेकेदार ने सामग्री परीक्षण प्रमाणपत्र भी जमा नहीं कराए। चार महीने में पूरा होने वाला काम तीन महीने से अधिक देरी से पूरा हुआ, लेकिन जुर्माना नहीं लगाया गया। अंतिम भुगतान कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र के बिना कर दिया गया। इस मामले में विभाग का जवाब और अंतिम अनुपालन लंबित है।
वित्त वर्ष 2024-25 में नौ कार्यों की कुल स्वीकृत लागत 1.68 करोड़ रुपये थी। इनमें से 31 मार्च 2025 तक 1.52 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन अंतिम बिलों का निपटारा नहीं हुआ। इनमें सेक्टर-30बी और सेक्टर-20 के सामुदायिक केंद्र, सेक्टर-39 पुलिस हाउसिंग में वर्षा जल निकासी लाइन तथा सरकारी स्कूलों में अग्निशमन और प्रकाश व्यवस्था के कार्य शामिल हैं। पुराने ऑडिट में भी 2016-17 के 19 और 2019-20 के 33 कार्यों की देनदारियां लंबित पाई गई थीं।
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ऑडिट में यह भी सामने आया कि निर्माण कार्यों के दौरान ठेकेदारों की बैंक गारंटी की अवधि समाप्त होने के बावजूद उनका नवीनीकरण नहीं कराया गया। 10.59 लाख रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी पर आपत्ति दर्ज की गई। 15 वर्ष से अधिक पुराने और अनुपयोगी तीन सरकारी वाहन—दो स्वराज माजदा और एक क्वालिस—भी स्क्रैप नहीं किए गए। इन्हें पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र के माध्यम से निस्तारित कर प्राप्त राशि सरकारी खाते में जमा कराने की जरूरत बताई गई।
विभाग में कैश बुक नियमित रूप से नहीं रखी गई और स्थायी संपत्तियों का स्टॉक रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं था। भौतिक सत्यापन में भी खामियां मिलीं। फरवरी 2017 तक की 15.29 लाख रुपये की जमा राशि का केंद्रीय खजाने से मिलान लंबित था। ठेकेदारों की सुरक्षा जमा राशि 3.05 करोड़ रुपये से अधिक थी, जबकि एक जमा खाते में 44.99 लाख रुपये का ऋणात्मक शेष मिला। ऑडिट ने वित्तीय रिकॉर्ड दुरुस्त करने, आपत्तियों का निपटारा करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की जरूरत बताई है।
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सेक्टर-25 के सरकारी मॉडल हाई स्कूल में पेयजल टैंक और पब्लिक हेल्थ सेवाओं के नवीनीकरण का विस्तृत अनुमान 72.86 लाख रुपये था। इसके लिए 79.18 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी मिली और ठेका 45.40 लाख रुपये में दिया गया। बदलावों और अतिरिक्त मदों के बाद भुगतान 77.56 लाख रुपये तक पहुंच गया। अतिरिक्त कार्यों की सक्षम अधिकारी से पूर्व मंजूरी नहीं ली गई। ठेकेदार ने सामग्री परीक्षण प्रमाणपत्र भी जमा नहीं कराए। चार महीने में पूरा होने वाला काम तीन महीने से अधिक देरी से पूरा हुआ, लेकिन जुर्माना नहीं लगाया गया। अंतिम भुगतान कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र के बिना कर दिया गया। इस मामले में विभाग का जवाब और अंतिम अनुपालन लंबित है।
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वित्त वर्ष 2024-25 में नौ कार्यों की कुल स्वीकृत लागत 1.68 करोड़ रुपये थी। इनमें से 31 मार्च 2025 तक 1.52 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन अंतिम बिलों का निपटारा नहीं हुआ। इनमें सेक्टर-30बी और सेक्टर-20 के सामुदायिक केंद्र, सेक्टर-39 पुलिस हाउसिंग में वर्षा जल निकासी लाइन तथा सरकारी स्कूलों में अग्निशमन और प्रकाश व्यवस्था के कार्य शामिल हैं। पुराने ऑडिट में भी 2016-17 के 19 और 2019-20 के 33 कार्यों की देनदारियां लंबित पाई गई थीं।
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ऑडिट में यह भी सामने आया कि निर्माण कार्यों के दौरान ठेकेदारों की बैंक गारंटी की अवधि समाप्त होने के बावजूद उनका नवीनीकरण नहीं कराया गया। 10.59 लाख रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी पर आपत्ति दर्ज की गई। 15 वर्ष से अधिक पुराने और अनुपयोगी तीन सरकारी वाहन—दो स्वराज माजदा और एक क्वालिस—भी स्क्रैप नहीं किए गए। इन्हें पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र के माध्यम से निस्तारित कर प्राप्त राशि सरकारी खाते में जमा कराने की जरूरत बताई गई।
विभाग में कैश बुक नियमित रूप से नहीं रखी गई और स्थायी संपत्तियों का स्टॉक रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं था। भौतिक सत्यापन में भी खामियां मिलीं। फरवरी 2017 तक की 15.29 लाख रुपये की जमा राशि का केंद्रीय खजाने से मिलान लंबित था। ठेकेदारों की सुरक्षा जमा राशि 3.05 करोड़ रुपये से अधिक थी, जबकि एक जमा खाते में 44.99 लाख रुपये का ऋणात्मक शेष मिला। ऑडिट ने वित्तीय रिकॉर्ड दुरुस्त करने, आपत्तियों का निपटारा करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की जरूरत बताई है।