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Chandigarh News: 60 कम्युनिकेशन डॉक्यूमेंट खोल सकते हैं भ्रष्टाचार के राज, अफसर रडार पर
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सीबीआई ने कथित भ्रष्टाचार के मामले में 2023 से लेकर 2026 तक की चैटिंग को बनाया जांच का आधार
सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर, लाइसेंसिंग और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप से संबंधित मिले सबूत
मोहित धुपड़
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर धुमन व अन्य लोगों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई डिजिटल साक्ष्य जुटाने में लगी है। इस मामले में ईडी की ओर से की गई जांच और जुटाए गए साक्ष्य भी सीबीआई जांच को मजबूती देंगे। इसी के अंतर्गत करीब 60 कम्युनिकेशन डॉक्यूमेंट ऐसे हैं, जो कथित भ्रष्टाचार के राज खोल सकते हैं। इस दौरान कई अफसर भी ईडी व सीबीआई के रडार पर हैं।
ईडी व सीबीआई दोनों जांच एजेंसियों का दावा है कि ये कम्युनिकेशन विभिन्न आरोपियों के बीच वर्ष 2023 से लेकर 2026 तक डिजिटल माध्यम से हुए। इनमें सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर, लाइसेंसिंग और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप से संबंधित सबूत मिले हैं।
दरअसल, यह मामला ईडी की उस मनी लॉन्ड्रिंग जांच से उजागर हुआ, जो अजय सहगल और इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी से जुड़ी थी। ईडी ने 7 से 10 मई 2026 के बीच अजय सहगल, नितिन गोहल, सुरेश कुमार बजाज समेत अन्य से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री, व्हाट्सएप चैट के आधार पर ईडी ने आरोपी नितिन गोहल पर सरकारी कामकाज में कथित दखल और मध्यस्थता के आरोप लगाए थे।
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ईडी की रेड के दौरान उस वक्त एक सोसाइटी के परिसर में एक फ्लैट की बालकनी से लाखों रुपये का बैग फेंके जाने का मामला सामने आया था। उसकी कड़ी भी आरोपी नितिन गोहल से जुड़ी। उस दौरान भी ईडी ने अपनी रिपोर्ट में राजबीर घुम्मन, बीर देविंदर और जितिन गोहल उर्फ राजा का भी जिक्र किया। ईडी ने 23 जनवरी 2026 की एक व्हाट्सएप चैट के आधार पर जितिन गोहल को मुख्यमंत्री कार्यालय में लगाने में कथित भूमिका का भी खुलासा किया था।
बुलेट पॉइंट बॉक्स
आरोपियों की चैट में क्या मिला
-21 कम्युनिकेशन ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित हैं। सीबीआई को सौंपी गई ईडी की जांच में 20 सितंबर 2023 से 18 मार्च 2026 के बीच की 21 चैट्स उपलब्ध हैं। इनमें पुलिस, पीसीएस, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, मार्कफेड और जीएमएडीए से जुड़े अफसरों का जिक्र है।
-11 चैट में नीतिगत और प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप का जिक्र है। इनमें पॉलिसी बनाने, विभागीय नियमों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग और अन्य सरकारी फैसलों से संबंधित कम्युनिकेशन हुआ है।
-7 चैट आर्म्स लाइसेंस से जुड़े मामलों से संबंधित हैं।
-जमीन और संपत्ति से जुड़ी 6 कम्युनिकेशन में कथित तौर पर जमीन के लेन-देन, सीएलयू, डिमार्केशन, संपत्ति विवाद और हाउसिंग स्कीम जैसे मामलों का जिक्र है।
-4 चैट में ईडी ने सरकारी गोपनीय सूचना तक कथित अनधिकृत पहुंच या उसके लीक होने का जिक्र किया है।
-11 चैट में भुगतान, कथित किकबैक और सरकारी काम के बदले कथित लाभ से जुड़े संवाद होने का दावा किया गया है।
अफसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में
सूत्र बताते हैं कि ईडी की जांच से जुड़े दस्तावेजों और व्हाट्सएप चैट में पंजाब के विभिन्न विभागों के कुछ अधिकारियों के नाम या पदों से जुड़े तबादलों-पोस्टिंग, लाइसेंस, टेंडर और नीतिगत मामलों के अनुरोध सामने आ रहे हैं। इनमें पुलिस, खाद्य एवं आपूर्ति, मार्कफेड और गमाडा इत्यादि विभागों से जुड़े मामले शामिल हैं। अब इन मामलों की कड़ियां सीबीआई की जांच में खंगाली जाएंगी।
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सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर, लाइसेंसिंग और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप से संबंधित मिले सबूत
मोहित धुपड़
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर धुमन व अन्य लोगों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई डिजिटल साक्ष्य जुटाने में लगी है। इस मामले में ईडी की ओर से की गई जांच और जुटाए गए साक्ष्य भी सीबीआई जांच को मजबूती देंगे। इसी के अंतर्गत करीब 60 कम्युनिकेशन डॉक्यूमेंट ऐसे हैं, जो कथित भ्रष्टाचार के राज खोल सकते हैं। इस दौरान कई अफसर भी ईडी व सीबीआई के रडार पर हैं।
ईडी व सीबीआई दोनों जांच एजेंसियों का दावा है कि ये कम्युनिकेशन विभिन्न आरोपियों के बीच वर्ष 2023 से लेकर 2026 तक डिजिटल माध्यम से हुए। इनमें सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर, लाइसेंसिंग और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप से संबंधित सबूत मिले हैं।
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दरअसल, यह मामला ईडी की उस मनी लॉन्ड्रिंग जांच से उजागर हुआ, जो अजय सहगल और इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी से जुड़ी थी। ईडी ने 7 से 10 मई 2026 के बीच अजय सहगल, नितिन गोहल, सुरेश कुमार बजाज समेत अन्य से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री, व्हाट्सएप चैट के आधार पर ईडी ने आरोपी नितिन गोहल पर सरकारी कामकाज में कथित दखल और मध्यस्थता के आरोप लगाए थे।
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ईडी की रेड के दौरान उस वक्त एक सोसाइटी के परिसर में एक फ्लैट की बालकनी से लाखों रुपये का बैग फेंके जाने का मामला सामने आया था। उसकी कड़ी भी आरोपी नितिन गोहल से जुड़ी। उस दौरान भी ईडी ने अपनी रिपोर्ट में राजबीर घुम्मन, बीर देविंदर और जितिन गोहल उर्फ राजा का भी जिक्र किया। ईडी ने 23 जनवरी 2026 की एक व्हाट्सएप चैट के आधार पर जितिन गोहल को मुख्यमंत्री कार्यालय में लगाने में कथित भूमिका का भी खुलासा किया था।
बुलेट पॉइंट बॉक्स
आरोपियों की चैट में क्या मिला
-21 कम्युनिकेशन ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित हैं। सीबीआई को सौंपी गई ईडी की जांच में 20 सितंबर 2023 से 18 मार्च 2026 के बीच की 21 चैट्स उपलब्ध हैं। इनमें पुलिस, पीसीएस, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, मार्कफेड और जीएमएडीए से जुड़े अफसरों का जिक्र है।
-11 चैट में नीतिगत और प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप का जिक्र है। इनमें पॉलिसी बनाने, विभागीय नियमों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग और अन्य सरकारी फैसलों से संबंधित कम्युनिकेशन हुआ है।
-7 चैट आर्म्स लाइसेंस से जुड़े मामलों से संबंधित हैं।
-जमीन और संपत्ति से जुड़ी 6 कम्युनिकेशन में कथित तौर पर जमीन के लेन-देन, सीएलयू, डिमार्केशन, संपत्ति विवाद और हाउसिंग स्कीम जैसे मामलों का जिक्र है।
-4 चैट में ईडी ने सरकारी गोपनीय सूचना तक कथित अनधिकृत पहुंच या उसके लीक होने का जिक्र किया है।
-11 चैट में भुगतान, कथित किकबैक और सरकारी काम के बदले कथित लाभ से जुड़े संवाद होने का दावा किया गया है।
अफसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में
सूत्र बताते हैं कि ईडी की जांच से जुड़े दस्तावेजों और व्हाट्सएप चैट में पंजाब के विभिन्न विभागों के कुछ अधिकारियों के नाम या पदों से जुड़े तबादलों-पोस्टिंग, लाइसेंस, टेंडर और नीतिगत मामलों के अनुरोध सामने आ रहे हैं। इनमें पुलिस, खाद्य एवं आपूर्ति, मार्कफेड और गमाडा इत्यादि विभागों से जुड़े मामले शामिल हैं। अब इन मामलों की कड़ियां सीबीआई की जांच में खंगाली जाएंगी।