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हत्यारों को क्षमादान के पंजाब सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती, याची ने रखी ये खास शर्त
Fri, 01 Nov 2019 11:15 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 01 Nov 2019 11:15 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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श्री गुरु नानक के 550वें प्रकाश पर्व पर जेल से बड़ी संख्या में कैदियों को क्षमा दान देने के पंजाब सरकार के निर्णय को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर हाईकोर्ट ने याची द्वारा सौंपी रिप्रजेंटेशन पर पंजाब के मुख्य सचिव को जल्द से जल्द निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि पंजाब सरकार ने आजीवन कारावास काट रहे ऐसे हत्यारों को जिन्होंने 8-10 साल की सजा काट ली है और जेल में बर्ताव अच्छा है, क्षमादान देने का निर्णय लिया है। इसे गुरुनानक देव के 550वें पर्व के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। ऐसा करने से पहले पीड़ित परिवार वालों का पक्ष तक नहीं सुना गया।
याची ने कहा कि बिना पीड़ित पक्षों पर पड़ने वाले प्रभाव का आंकलन किए ही यह निर्णय ले लिया गया। इससे न केवल पीड़ित पक्ष प्रभावित होगा बल्कि साथ ही समाज पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि इस बारे में उसने कई स्तर पर रिप्रजेंटेशन दी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उसको हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
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याचिका में याची ने पंजाब सरकार के इस निर्णय पर रोक लगाने अथवा दोषियों की रिहाई की स्थिति में पीड़ित पक्षों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा जारी करने के आदेश देने की अपील की है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह जल्द से जल्द याची द्वारा सौंपी गई रिप्रजेंटेशन पर फैसला लें।
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याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि पंजाब सरकार ने आजीवन कारावास काट रहे ऐसे हत्यारों को जिन्होंने 8-10 साल की सजा काट ली है और जेल में बर्ताव अच्छा है, क्षमादान देने का निर्णय लिया है। इसे गुरुनानक देव के 550वें पर्व के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। ऐसा करने से पहले पीड़ित परिवार वालों का पक्ष तक नहीं सुना गया।
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याची ने कहा कि बिना पीड़ित पक्षों पर पड़ने वाले प्रभाव का आंकलन किए ही यह निर्णय ले लिया गया। इससे न केवल पीड़ित पक्ष प्रभावित होगा बल्कि साथ ही समाज पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि इस बारे में उसने कई स्तर पर रिप्रजेंटेशन दी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उसको हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
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याचिका में याची ने पंजाब सरकार के इस निर्णय पर रोक लगाने अथवा दोषियों की रिहाई की स्थिति में पीड़ित पक्षों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा जारी करने के आदेश देने की अपील की है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह जल्द से जल्द याची द्वारा सौंपी गई रिप्रजेंटेशन पर फैसला लें।