करतारपुर कॉरिडोर: सुबह सात से साढ़े 11 बजे तक ही पाकिस्तान में प्रवेश कर सकेंगे श्रद्धालु
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गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते श्रद्धालु सुबह सात बजे से साढ़े 11 बजे तक ही पाकिस्तान सीमा में प्रवेश कर सकेंगे। दोपहर साढ़े 12 बजे से शाम पांच बजे तक श्रद्धालु वतन वापसी कर सकेंगे।
रोज आने वाले पांच हजार श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो इसके लिए पाकिस्तान सरकार ने अपने टर्मिनल में 76 इमिग्रेशन केंद्र की स्थापना की है। यहां 169 अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया है। यह जानकारी पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी की गई है।
इसमें कहा गया है कि करतारपुर कॉरिडोर 823 एकड़ भूमि में फैला है। इसमें 104 एकड़ भूमि में गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब परिसर है। गुरुद्वारा साहिब का मुख्य भवन व उसके आसपास 42 एकड़ की भूमि में निर्माण कार्य किए गए हैं। पाकिस्तान सरकार ने गुरुद्वारा साहिब से कुछ ही दूरी पर 26 एकड़ भूमि में खेती शुरू कर दी है। यहां पैदा होने वाली सब्जियां लंगर में प्रयोग की जाएंगी। इसी जमीन पर माल्टा, नींबू और अमरूद के पौधे भी लगाए गए हैं।
गुरुद्वारा परिसर में कोर्ट यार्ड, बारादरी, लंगर हाल और यात्री निवास का निर्माण किया गया है। लंगर हॉल में एक साथ दो हजार से अधिक श्रद्धालु एक साथ लंगर छक सकेंगे। एक हजार से अधिक कमरों के यात्री निवास में सभी सुविधाएं होगी। पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर के लिए रावी नदी के ऊपर 800 मीटर लंबे पुल का निर्माण किया है।
डेरा बाबा नानक से गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को 270 मीटर ही पैदल चलना पड़ेगा। पाकिस्तान सरकार ने सीमा से श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब तक पहुंचाने के लिए बैटरी से चलने वाली बसों का इंतजाम किया है। दर्शनों के लिए रखी 20 डॉलर की फीस भरने के बाद श्रद्धालुओं को एक रसीद भी दी जाएगी जो यात्रा का आधार होगी।
गुरुद्वारा परिसर में साढ़े तीन लाख गज एरिया में संगमरमर लगाया
पाकिस्तान सरकार ने गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के मुख्य भवन के आसपास के क्षेत्र में साढ़े तीन लाख वर्ग गज में संगमरमर बिछाया है। गुरुद्वारा परिसर में एक बड़े दीवान हॉल का निर्माण किया गया है जिसके फ्रंट का वास्तु लाहौर स्थित शाही किले के साथ मिलता है। इस दीवान हॉल में नौ नवंबर को उद्घाटन समारोह पर एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
इस प्रदर्शनी में श्री गुरु नानक देव जी के इतिहास के साथ जुड़ी उन सभी ऐतिहासिक वस्तुओं को संगत के दर्शनों के लिए रखा जाएगा, जो इस समय पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग के पास हैं। गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब में माथा टेकने के बाद श्रद्धालु इसी दीवान हाल में बैठकर इबादत कर सकेंगे। दीवान हॉल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश भी होगा।
पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण ‘यू’ शेप में किया है। डेरा बाबा नानक की तरफ से जहां भारतीय श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब माथा टेकने के लिए आएंगे, वहां दूर से ही गुरुद्वारा साहिब के दर्शन कर सकेंगे। जो गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब नहीं आ पाएंगे, वह डेरा बाबा नानक से दूरबीन से खुले दर्शन कर सकेंगे।