बड़ी मुसीबतः पंजाब में बीएड की 5 हजार सीटें खाली, विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा दाखिला
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पंजाब के कॉलेजों में बीएड की खाली पड़ी सीटें भरने को लेकर सरकार की कोई नीति न होने के कारण स्टूडेंट और कॉलेज प्रबंधन असमंजस में हैं। एक तरफ कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें खाली पड़ी हैं। दूसरी तरफ विद्यार्थी दाखिले के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पंजाब के कॉलेजों में बीएड की करीब पांच हजार सीटें खाली पड़ी हैं। बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स ऐसे हैं, जो कि बीएड की दाखिला परीक्षा नहीं दे सके थे।
वे अब दाखिला चाहते हैं। लेकिन सरकार ने अब तक इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं की है। कॉलेज प्रबंधकों की मांग है कि सरकार खाली सीटों पर उन्हें सीधे दाखिले की इजाजत दे। पर अब तक कुछ नहीं हुआ है। पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश ने अपने उन विद्यार्थियों को बीएड कोर्स करने की इजाजत दे दी है, जिन्होंने प्रवेश परीक्षा नहीं दी थी। इतना ही नहीं, पंजाब सरकार भी फिजिकल एजुकेशन में खाली सीटों पर दाखिले की इजाजत दे चुका है।
उच्च शिक्षा विभाग ने तीनों विश्वविद्यालयों पंजाब यूनिवर्सिटी, पंजाबी यूनिवर्सिटी और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी को हिदायत दी है कि उनसे मान्यता प्राप्त फिजिकल एजुकेशन कॉलेजों को अपनी खाली सीटें खुद भरने के निर्देश दिए जाएं। लेकिन बीएड के विद्यार्थी अब तक सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यह मामला हाईकोर्ट में भी लंबित है। अदालत ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह नौ जनवरी 2019 तक बीएड कॉलेजों में खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए नीति लाए।
बिना टेस्ट दाखिले की इजाजत दे सरकार
पंजाब के करीब 1600 कॉलेजों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के चेयरमैन अश्वनी सेखड़ी ने कहा कि बिहार और उत्तर पूर्वी राज्यों के बहुत से विद्यार्थी खाली पड़ी बीएड सीटों पर दाखिला लेना चाहते हैं। हिमाचल प्रदेश में ही दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा की शर्त नहीं है। सेखड़ी ने कहा कि राज्य सरकार को विद्यार्थियों को एंट्रेस्ट टेस्ट के बिना बीएड में दाखिले की इजाजत देनी चाहिए। इससे स्टूडेंट्स का भविष्य सुरक्षित होगा और सरकार को भी राजस्व मिलेगा।