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हरियाणा: दो लाख संगत बैठने के लिए लगाया जर्मन संरचना का पंडाल, भव्य तरीके से मनाया जाएगा श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व
Fri, 22 Apr 2022 02:16 AM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 22 Apr 2022 02:16 AM IST
सार
आयोजन समिति के संयोजक व करनाल के सांसद संजय भाटिया ने बताया कि इस समागम में देश व प्रदेश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी संगत पहुंचेगी। मुख्य हाल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया जाएगा।
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श्री गुरु तेग बहादुर
विस्तार
हिंद की चादर ‘श्री गुरु तेग बहादुर जी’ के 400वें प्रकाश उत्सव पर पानीपत में 24 अप्रैल राज्य स्तरीय महोत्सव को भव्य तरीके से मनाने के लिए तैयारियां की गई हैं। 25 एकड़ में डेढ़ से 2 लाख संगत के बैठने के लिए खास पंडाल बनाया जा रहा है। गर्मी व बारिश से बचाने के लिए जर्मन तकनीक के टेंट से पंडाल बनाया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर संगत में इतना उत्साह है कि अभी से लोग सेवा के लिए पानीपत पहुंचने लगे हैं।
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आयोजन समिति के संयोजक व करनाल के सांसद संजय भाटिया ने बताया कि इस समागम में देश व प्रदेश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी संगत पहुंचेगी। मुख्य हाल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया जाएगा। उसी हाल में संत-महात्माओं व महापुरुषों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
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समागम स्थल का प्रवेश द्वार को इस तरीके से भव्य रूप दिया जा रहा है कि वह अलौकिक छटा बिखेरेगा। इस द्वार को सफेद और सुनहरे रंग से बनाया जा रहे द्वार के चारों तरफ रंग-बिरंगी लाइटें लगाई जा रही हैं। अभी से ही शाम के समय बड़ी संख्या में संगत इस द्वार को देखने पहुंच रही है।
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कार्यक्रम में पहुंचेंगे विश्वविख्यात रागी और ढाडी
इस मौके पर विश्वविख्यात रागी और ढाडी पहुंचेंगे। पंथ के सिरमौर रागी भाई चमनजीत सिंह लाल, भाई बलविंदर सिंह रंगीला, भाई दविंदर सिंह सोढ़ी, भाई गगनदीप सिंह श्रीगंगानगर वाले इस अवसर पर शिकरत करेंगे। वहीं ढाडी भाई निर्मल सिंह नूर भी पहुंचकर अमृतमयी कीर्तन, गुरूमत प्रवचन और गुरु इतिहास से संगत को निहाल करेंगे।
पगड़ी बांधने की भी की गई है व्यवस्था
आयोजन स्थल पर पगड़ी बांधने की भी व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त द्वार से प्रवेश करते ही दो जोड़ा घर बनाए जाएंगे। पंडाल के दोनों ओर लंगर की व्यवस्था रहेगी। यहां एक साथ-साथ दोनों तरफ 10-10 हजार श्रद्धालु गुरु का लंगर छक सकेंगे। कार्यक्त्रस्म स्थल पर एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें सभी सिख गुरुओं के त्याग और बलिदान को दिखाया जाएगा।