कब्रिस्तान में दफनाईं 40 टन से ज्यादा कुरान शरीफ
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मौली गांव के कब्रिस्तान में शनिवार को 40 टन से ज्यादा कुरान शरीफ दफना दी गईं। इस पर रोष जताते हुए भाजपा नेताओं ने पुलिस से शिकायत की है। भाजपा नेता इस जमीन पर कब्रिस्तान बनाने का विरोध कर रहे हैं।
चंडीगढ़ वक्फ बोर्ड के अनुसार, कश्मीर में बाढ़ के बाद वहां कई बुक सेलर्स की किताबें खराब हो गईं थीं। उन्होंने ये किताबें रद्दी में बेच दी। मक्खन माजरा के एक कबाड़ी ने 700 रुपये क्विंटल के हिसाब से यह किताबें खरीदीं। इनमें काफी संख्या में कुरान शरीफ भी थीं। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 72 हजार रुपये में यह कुरान शरीफ खरीदी थीं।
सतिंदर सिंह कर रहे हैं विरोध
सुबह जेसीबी मशीनों से कब्रिस्तान की खुदाई शुरू की गई। यहां दो ट्रकों में कुरान शरीफ लाई गईं थीं। सूचना मिलने पर भाजपा नेता भी मौके पर पहुंच गए। भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह इस जमीन पर कब्रिस्तान का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि डीसी मोहम्मद शाइन ने यह जमीन नियमों को ताक पर रखकर मुस्लिम समुदाय को कब्रिस्तान के लिए दी है। शनिवार को उन्होंने मौली चौकी में इसकी शिकायत दर्ज करवाई और आईजी को भी इसकी शिकायत भेजी।
डीसी के इशारे पर हो रहा है सब : सतिंदर
सतिंदर सिंह ने कहा कि अभी उनकी शिकायत पेंडिंग है। इस आधार पर यहां दफनाने की कोई प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। अब ये कुरान शरीफ दफनाने का जो मामला आया है, इससे साबित होता है कि सीनियर अफसरों को बचाने की कोशिश की जा रही है। सिंह ने आरोप लगाया कि ये सब डीसी के इशारे पर हो रहा है।
इसलिए है विवाद
सतिंदर सिंह ने डीसी मोहम्मद शाइन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने ये जमीन मुस्लिम समुदाय को कब्रिस्तान के लिए दी, जबकि कागजों में ये सरकारी जमीन है। सतिंदर के मुताबिक, यूटी प्रशासन ने यह नौ एकड़ भूमि इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 विकसित करने के लिए स्थानीय लोगों से ली थी।
कोट्स...
हमने यहां किसी प्रकार के निर्माण की कोशिश नहीं की है। हमने सिर्फ धार्मिक भावनाओं को देखते हुए कुरान शरीफ दफनाई हैं। वैसे भी ये कब्रिस्तान यहां 1990 से बना हुआ है। इस गांव के लोग वर्षों से यहां शव दफना रहे हैं। डीसी ने किसी प्रकार का फायदा पहुंचाने की कोशिश नहीं की है।
-मौलवी शकील अहमद कासमी, चेयरमैन
चंडीगढ़ वक्फ बोर्ड।