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स्थिति, कुल कुपोषित बच्चों में से 38 फीसदी भारत में
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 23 Feb 2014 11:06 AM IST
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भारत में अविकसित बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। पूरे विश्व के कुपोषण बच्चों में 38 फीसदी भारत में हैं, जो काफी चिंताजनक हैं। महिलाओं की स्थिति भी ठीक नहीं है।
दरअसल अंडरवेट महिलाओं की वजह से ही कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। यह कहना है पद्म विभूषण व आईआईटी दिल्ली के नेशनल साइंस प्रोफेसर एमके भान का।
डॉ. भान पीजीआई के पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रो. बीएनएस वालिया ओरिएंटेशन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उनके मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को बैलेंस डाइट देनी चाहिए।
इसमें आयरन और फोलिक एसिड की मात्रा बैलेंस होनी चाहिए। इससे होने वाले बच्चे का वेट बढ़ेगा और वह हेल्दी होगा।
डॉ. भान ने बताया कि हाल ही में एक रिसर्च में सामने आया है कि खुले में शौच और बच्चों की हाइट कम होना, दोनों के बीच क्लीयर रिलेशन है।
शौच के दौरान कई सारे बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करते हैं, जो अजन्मे बच्चे के लिए काफी गंभीर होते हैं। कुपोषण के लिए यह भी एक कारण हैं।
इस मौके पर पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. योगेश चावला ने प्रो. बीएनएस वालिया के योगदान पर प्रकाश डाला। कान्फ्रेंस में बच्चों की गंभीर बीमारियों के बारे में विस्तार से चर्चा हुई।
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डॉ. दीपक बंसल ने बताया कि बच्चों में ल्यूकेमियास और लिम्फोमस कैंसर दोनों ही बहुतायत में हो रहे हैं। यदि इसे शुरूआती दौर में पहचान लिया जाए तो इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। डॉ. राकेश कुमार ने बच्चों में हो रही डायबिटीज के बारे में अभिभावकों को सचेत होने को कहा।
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दरअसल अंडरवेट महिलाओं की वजह से ही कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। यह कहना है पद्म विभूषण व आईआईटी दिल्ली के नेशनल साइंस प्रोफेसर एमके भान का।
डॉ. भान पीजीआई के पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रो. बीएनएस वालिया ओरिएंटेशन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उनके मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को बैलेंस डाइट देनी चाहिए।
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इसमें आयरन और फोलिक एसिड की मात्रा बैलेंस होनी चाहिए। इससे होने वाले बच्चे का वेट बढ़ेगा और वह हेल्दी होगा।
डॉ. भान ने बताया कि हाल ही में एक रिसर्च में सामने आया है कि खुले में शौच और बच्चों की हाइट कम होना, दोनों के बीच क्लीयर रिलेशन है।
शौच के दौरान कई सारे बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करते हैं, जो अजन्मे बच्चे के लिए काफी गंभीर होते हैं। कुपोषण के लिए यह भी एक कारण हैं।
इस मौके पर पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. योगेश चावला ने प्रो. बीएनएस वालिया के योगदान पर प्रकाश डाला। कान्फ्रेंस में बच्चों की गंभीर बीमारियों के बारे में विस्तार से चर्चा हुई।
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डॉ. दीपक बंसल ने बताया कि बच्चों में ल्यूकेमियास और लिम्फोमस कैंसर दोनों ही बहुतायत में हो रहे हैं। यदि इसे शुरूआती दौर में पहचान लिया जाए तो इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। डॉ. राकेश कुमार ने बच्चों में हो रही डायबिटीज के बारे में अभिभावकों को सचेत होने को कहा।