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मंगल कलश यात्रा से पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा का शुभारंभ
Updated Fri, 28 Sep 2018 01:49 AM IST
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मंगल कलश यात्रा से श्री कृष्ण कथा हुई शुरू
- आंबेडकर भवन रेलवे रोड कालका में पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा शुरू
- मंगल कलश यात्रा में 101 सुहागिनों ने लिया भाग
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर आंबेडकर भवन रेलवे रोड कालका में आयोजित होने वाले पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा के आयोजन को लेकर वीरवार को मंगल कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया। कलश यात्रा का कई स्थानों पर पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया। इस कलश यात्रा का शुभारंभ गीता भवन कालका से डॉक्टर कशमीरा सिंह, डॉक्टर मदन पाल तनवर, लक्ष्मी नारायण गोयल एवं पूर्व एमसी उजाला बक्शी ने हरी झंडी दिखाकर किया।
कलश यात्रा के महत्व को बताते हुए दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, चंडीगढ़ के संयोजन स्वामी गुरुकृपानंद ने कहा कि कलश के अग्रभाग में देवताओं का निवास होता है। दूसरा, यह हमारे मानव मस्तिष्क का भी प्रतीक है। जिसमें अमृत का कुंड स्वीकार किया गया है। कलश यात्रा हमें निमंत्रण देती है कि आओ अपने मानव तन में ही परमात्मा का दीदार करो। यही हमारे जीवन का लक्ष्य है। मंगल कलश यात्रा में 101 सुहागिनें कलश उठा कर चलीं और प्रभु के आशीर्वाद को प्राप्त किया। सारा शहर इस यात्रा की भव्यता में लीन होकर श्री कृष्णमय हो गया।
कथा के प्रथम दिन कथा व्यास साध्वी त्रिपदा भारती ने कहा श्री कृष्ण कथा का महात्मय बहुत ही महान है। जहां एक ओर ये हमें शाश्वत शांति के साथ अवगत करवाती है। वहीं दूसरी ओर हमें जागरूक भी करती है। भगवान श्री कृष्ण का तत्व रूप में दर्शन अपने ही घट अर्थात शरीर के भीतर करने से एक इंसान वास्तविक जागृति को प्राप्त होता है। क्योंकि ईश्वरीय अनुभव के अभाव में व्यक्ति सद्गुणों को धारण नहीं कर सकता भाव श्रेष्ठ गुणों को प्राप्त कर सुंदर चरित्र का निर्माण करके ही श्रेष्ठ समाज का सृजन किया जा सकता है। यही मूल सिद्धांत हमारी भारतीय संस्कृति का आधार है। तभी तो भारत की संस्कृति को संसार की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति के रूप में संसार में विशेष स्थान प्राप्त है।
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वह परमात्मा संसार में अवतार लेकर आते हैं तो मात्र इस प्रयोजन से की मानव को उनके कर्म का ज्ञान करवा सके। जिसका ज्ञान मात्र विवेक दृष्टि के खुल जाने पर ही प्राप्त होता है। दिव्य दृष्टि के माध्यम से ही ईश्वर का दीदार संभव है। प्रथम दिवस कथा को विराम प्रभु की पावन आरती द्वारा दिया गया। प्रभु की पावन आरती में नार्दर्न रेलवे मैंस यूनियन से संजीव शर्मा, संजीव कोहली और सुभाष शर्मा उपस्थित हुए।
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- आंबेडकर भवन रेलवे रोड कालका में पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा शुरू
- मंगल कलश यात्रा में 101 सुहागिनों ने लिया भाग
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर आंबेडकर भवन रेलवे रोड कालका में आयोजित होने वाले पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथा के आयोजन को लेकर वीरवार को मंगल कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया। कलश यात्रा का कई स्थानों पर पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया। इस कलश यात्रा का शुभारंभ गीता भवन कालका से डॉक्टर कशमीरा सिंह, डॉक्टर मदन पाल तनवर, लक्ष्मी नारायण गोयल एवं पूर्व एमसी उजाला बक्शी ने हरी झंडी दिखाकर किया।
कलश यात्रा के महत्व को बताते हुए दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, चंडीगढ़ के संयोजन स्वामी गुरुकृपानंद ने कहा कि कलश के अग्रभाग में देवताओं का निवास होता है। दूसरा, यह हमारे मानव मस्तिष्क का भी प्रतीक है। जिसमें अमृत का कुंड स्वीकार किया गया है। कलश यात्रा हमें निमंत्रण देती है कि आओ अपने मानव तन में ही परमात्मा का दीदार करो। यही हमारे जीवन का लक्ष्य है। मंगल कलश यात्रा में 101 सुहागिनें कलश उठा कर चलीं और प्रभु के आशीर्वाद को प्राप्त किया। सारा शहर इस यात्रा की भव्यता में लीन होकर श्री कृष्णमय हो गया।
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कथा के प्रथम दिन कथा व्यास साध्वी त्रिपदा भारती ने कहा श्री कृष्ण कथा का महात्मय बहुत ही महान है। जहां एक ओर ये हमें शाश्वत शांति के साथ अवगत करवाती है। वहीं दूसरी ओर हमें जागरूक भी करती है। भगवान श्री कृष्ण का तत्व रूप में दर्शन अपने ही घट अर्थात शरीर के भीतर करने से एक इंसान वास्तविक जागृति को प्राप्त होता है। क्योंकि ईश्वरीय अनुभव के अभाव में व्यक्ति सद्गुणों को धारण नहीं कर सकता भाव श्रेष्ठ गुणों को प्राप्त कर सुंदर चरित्र का निर्माण करके ही श्रेष्ठ समाज का सृजन किया जा सकता है। यही मूल सिद्धांत हमारी भारतीय संस्कृति का आधार है। तभी तो भारत की संस्कृति को संसार की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति के रूप में संसार में विशेष स्थान प्राप्त है।
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वह परमात्मा संसार में अवतार लेकर आते हैं तो मात्र इस प्रयोजन से की मानव को उनके कर्म का ज्ञान करवा सके। जिसका ज्ञान मात्र विवेक दृष्टि के खुल जाने पर ही प्राप्त होता है। दिव्य दृष्टि के माध्यम से ही ईश्वर का दीदार संभव है। प्रथम दिवस कथा को विराम प्रभु की पावन आरती द्वारा दिया गया। प्रभु की पावन आरती में नार्दर्न रेलवे मैंस यूनियन से संजीव शर्मा, संजीव कोहली और सुभाष शर्मा उपस्थित हुए।