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असहिष्णुता की शुरुआत विचारों के कट्टरपन से आती है: जोशी

Thu, 08 Feb 2018 01:20 AM IST
Updated Thu, 08 Feb 2018 01:20 AM IST
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असहिष्णुता की शुरुआत विचारों के कट्टरपन से आती है: जोशी
असहिष्णुता की शुरुआत विचारों के कट्टरपन से होती है: जोशी
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- विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी ने की शिरकत
- बोले, इस्लाम और ईसाई मजहब के मतालंबी अपना ही मार्ग श्रेष्ठ समझते हैं, जिससे असहिष्णुता की शुरुआत होती है
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
सेक्टर-2 स्थित श्रीराम मंदिर में प्रबुद्ध नागरिकों की विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी ने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदि काल से भारत की पहचान हिंदू धर्म से ही रही है और यह धर्म प्रकृति प्रेमी तथा हर जीव में ईश्वरीय तत्व को मानता है। उन्होंने उपनिषदों और गीता का हवाला देते हुए कहा कि जाति के आधार पर मनुष्यों का आपस में भेदभाव करना धर्म के मूल तत्वों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जातिवाद ने समाज का बड़ा नुकसान किया है, इसलिए हमें इन संकीर्णताओं से ऊपर उठ कर देशहित में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र है और इसके उत्थान व पतन के लिए हिंदू समाज ही जिम्मेदार हैं। हिंदू उदार व सार्वभौम चिंतन है और इसे सांप्रदायिक सीमाओं में बांधना इसके साथ अन्याय होगा।
जोशी ने कहा कि असहिष्णुता की शुरुआत विचारों के कट्टरपन से आती है। जब कोई मजहब सिर्फ अपने को श्रेष्ठ और दूसरे को तुच्छ समझने लग जाए तो दिक्कत खड़ी होती है। इस्लाम और ईसाई मजहब के मतालंबियों ने यही किया है। ये लोग सिर्फ और सिर्फ अपना ही मार्ग श्रेष्ठ समझते है, यहीं से असहिष्णुता की शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि भारत की तुलना चीन, अमेरिका, ब्रिटन आदि से नहीं करनी चाहिए, बल्कि भारत को भारत ही रहने देना चाहिए।
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इसके साथ ही जोशी ने प्रबुद्ध नागरिकों से भारतीय भाषाओं को बचाने का विशेष आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चाहे कितनी ही भाषाएं सीखें, लेकिन भारतीय भाषाओं की शुद्धता खराब नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही जोशी ने आर्थिक जगत की चिंता करते हुए स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनेक देश भारत को एक बाजार के तौर पर प्रयोग कर रहे हैं। इसलिए देशवासियों का कर्तव्य बनता है कि वे भारतीय उत्पादों का प्रयोग कर भारत की अर्थव्यस्था को मजबूत करने में सहयोगी बनें।
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इस गोष्ठी की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल ने की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्षेत्रीय के संघ चालक प्रो. बजरंग लाल गुप्त सहित उपस्थित रहे। वहीं इस प्रबुद्ध वर्ग गोष्ठी में वरिष्ठ व्यक्तियों के अलावा विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के प्रमुखों व संत समाज ने भाग लिया। कार्यक्रम में अम्बाला विभाग के विभाग संघचालक कर्नल राम सरूप कौशल, सह विभाग संघचालक ईश्वर जिंदल, जिला संघ चालक रमाकांत, सह जिला संघ चालक डॉ. कमल मोदी भी उपस्थित रहे।
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