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पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा तक की मंथली एसेस्मेंट परीक्षा में सभी बच्चों को नहीं मिल पाए प्रश्न पत्र, फोटोकॉपी करवाकर चलाया काम।
Updated Tue, 25 Jul 2017 12:54 AM IST
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शिक्षा के लिए गंभीर नहीं अधिकारी, बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़
मंथली असेसमेंट परीक्षा से दो दिन पहले मिलीं किताबें
फोटोकॉपी करवाकर बांटने पड़े प्रश्नपत्र
अमर उजाला ब्यूरो
बरवाला।
कस्बा बरवाला व क्षेत्र के कई प्राथमिक स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक की मंथली असेसमेंट परीक्षा के दौरान विभाग की ओर से जो प्रश्न पत्र स्कूल के हेड टीचरों को दिए गए वो सभी बच्चों के लिए नाकाफी रहे। टीचरों को फोटोकॉपी करवाकर सभी बच्चों को प्रश्न पत्र देकर काम चलाना पड़ा। इतना ही नहीं इन स्कूलों के हेड टीचरों को जो प्रश्न पत्र दिए गए वो भी सोमवार को सुबह ही मिले। जिन्हें प्राप्त करने के लिए बरवाला खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जाना पड़ा। भला ऐसे में शिक्षा का स्तर कैसे बढ़ पाएगा। इतना ही नहीं शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों में जो किताबें भेजी हैं वो भी बच्चों को 21 जुलाई को ही मिली हैं। जिससे बच्चों को इन किताबों से परीक्षा की तैयारी करने में केवल दो दिन ही मिले। बच्चे कैसे तैयारी कर पाते और परीक्षा में क्या लिख पाते। बच्चों के अभिभावकों में भी शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली को लेकर रोष है। इस बारे में जब खंड शिक्षा अधिकारी सुनीता नैन से बात करनी चाही तो उनका फोन स्विच रहा।
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मंथली असेसमेंट परीक्षा से दो दिन पहले मिलीं किताबें
फोटोकॉपी करवाकर बांटने पड़े प्रश्नपत्र
अमर उजाला ब्यूरो
बरवाला।
कस्बा बरवाला व क्षेत्र के कई प्राथमिक स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक की मंथली असेसमेंट परीक्षा के दौरान विभाग की ओर से जो प्रश्न पत्र स्कूल के हेड टीचरों को दिए गए वो सभी बच्चों के लिए नाकाफी रहे। टीचरों को फोटोकॉपी करवाकर सभी बच्चों को प्रश्न पत्र देकर काम चलाना पड़ा। इतना ही नहीं इन स्कूलों के हेड टीचरों को जो प्रश्न पत्र दिए गए वो भी सोमवार को सुबह ही मिले। जिन्हें प्राप्त करने के लिए बरवाला खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जाना पड़ा। भला ऐसे में शिक्षा का स्तर कैसे बढ़ पाएगा। इतना ही नहीं शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों में जो किताबें भेजी हैं वो भी बच्चों को 21 जुलाई को ही मिली हैं। जिससे बच्चों को इन किताबों से परीक्षा की तैयारी करने में केवल दो दिन ही मिले। बच्चे कैसे तैयारी कर पाते और परीक्षा में क्या लिख पाते। बच्चों के अभिभावकों में भी शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली को लेकर रोष है। इस बारे में जब खंड शिक्षा अधिकारी सुनीता नैन से बात करनी चाही तो उनका फोन स्विच रहा।