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बिजली पानी को लेकर सड़कों पर उतरे ग्रामीण, हरियाणा सरकार मुर्दाबाद के लगाऐ नारे, महिलाओं की संख्या रही अधिक
Updated Sat, 08 Jul 2017 01:23 AM IST
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अफसरों को नहीं ग्रामीणों की फिक्र, टूट गया सब्र
सुबह आठ बजे ही सड़क पर जुटे ग्रामीण
दो विभागों सहित हरियाणा सरकार के खिलाफ हल्ला बोल
छह घंटे तक मोरनी-पंचकूला मेन रोड पर लगाया जाम
तीन पंचायतों के ग्रामीणों ने मोरनी में लगाया जाम
दस दिन से जूझ रहे पानी की किल्लत से
समस्या को अफसर बना रहे मजाक
अमर उजाला ब्यूरो
मोरनी।
पानी की किल्लत से दस दिन से परेशान तीन पंचायतों के सरंपचों ने भारी संख्या में ग्रामीणों के साथ शुक्रवार को सुबह मोरनी-पंचकूला मेन रोड पर भूडी गंाव के पास जाम कर दिया। ग्रामीणों ने हरियाणा सरकार, बिजली विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मुर्दाबाद की नारेबाजी की। सुबह आठ बजे से लगे जाम को खुलवाने के लिए अधिकारियों के पसीने छूट गए। दोपहर लगभग दो बजे तक यानी छह घंटे जाम लगा रहा और दोनोें तरफ लंबी कतारें लग गईं। बाद में डीएसपी पंचकूला और बिजली निगम के अधिकारियों ने मौके पहुंचकर ग्रामीणों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद बड़ी मशक्कत करने पर उन्होंने ग्रामीणों को मनाकर जाम खुलवाया। इससे पहले मोरनी चौकी प्रभारी राकेश कुमार ने भी पूरे स्टाफ के साथ ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने उनकी एक न मानी।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा, नहीं जागे अफसर
बता दें कि अमर उजाला ने अपने वीरवार के अंक में इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित कर ग्रामीणों द्वारा दी गई चेतावनी से प्रशासन को अवगत कराया था। लेकिन सुस्त अधिकारियों को जगाने के लिए ग्रामीणों को जाम लगाना पड़ा। वहीं शुक्रवार को देर शाम
ग्रामीणों की इस समस्या के समाधान के लिए बिजली निगम ने काम शुरू कर दिया था। इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से नाइटा के सरपंच रणबीर सिंह, धारटी के सरपंच बलदेव सिंह सहित भारी संख्या में ग्रामीणों हिस्सा लिया।
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अधिकारियों को जमकर लगाई फटाकर
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जैसे ही तीन पंचायतों के ग्रामीणों द्वारा सड़क जाम करने की भनक लगी तो वह मौके पर पहुंचने शुरू हो गए। जाम लगने के घंटों बाद ग्रामीणों को समझाने पहुंचे एसडीओ विकास लाठर व जेई इंद्रजीत को ग्रामीणों ने जमकर फटकार लगाई। अफसरों को इस दौरान भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों से उनकी नोकझोंक भी देखने को मिली। अंत में अफसरों ने नजरें झुका लीं। ग्रामीणों का आरोप था कि अधिकारी उनका फोन नहीं उठाते हैं। अगर उठा भी लें उनकी दिक्कतों को हलके में लेकर बहानेबाजी करते हैं और टरका देते हैं। लापरवाह अफसरों के कारण उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।
अफसरों ने माना, हम गुमराह करते हैं भोले भाले ग्रामीणों को
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मोरनी की समस्याओं के समाधान को नजरअंदाज करना इस बात से जाहिर होता है कि वर्षों से पानी की समस्या जस की तस बनी हैं। धरने में बैठे कुछ ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से एक ही सीट पर जमे अफसरों ने मोरनी में ऐसा जाल बुना हुआ है कि किसी भी मामले में शिकायत होने पर चहेतों से अपने पक्ष में लिखवाकर उच्च अधिकारियों को गुमराह करते हैं। भोले भाले ग्रामीणों को गुमराह करने वाली बात को जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता ने लोगों के सामने स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें इस समस्या के बारे में अवगत नहीं कराया गया था।
आने वाली ग्रांट की जांच कराई जाए : ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना था कि मोरनी में जन स्वास्थ्य विभाग पीने के पानी की योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च रहा है। लेकिन यहां की बड़ी आबादी को पानी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों ने जन स्वास्थ्य विभाग तैयार की गई सभी योजनाओं, नई पानी की पाइपों की खरीद व चुनिंदा ठेकेदारों द्वारा ही किए जाने वाले काम की जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि हर साल टैंकरों से पानी सप्लाई के नाम पर खर्च किए जाने वाले भारी भरकम बजट की भी जांच कराई जाए। सरपंचों ने कहा कि मोरनी में आने वाली हर ग्रांट की जांच कराने के लिए वह जल्द सरकार के मंत्रियों से मिलेंगे।
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सुबह आठ बजे ही सड़क पर जुटे ग्रामीण
दो विभागों सहित हरियाणा सरकार के खिलाफ हल्ला बोल
छह घंटे तक मोरनी-पंचकूला मेन रोड पर लगाया जाम
तीन पंचायतों के ग्रामीणों ने मोरनी में लगाया जाम
दस दिन से जूझ रहे पानी की किल्लत से
समस्या को अफसर बना रहे मजाक
अमर उजाला ब्यूरो
मोरनी।
पानी की किल्लत से दस दिन से परेशान तीन पंचायतों के सरंपचों ने भारी संख्या में ग्रामीणों के साथ शुक्रवार को सुबह मोरनी-पंचकूला मेन रोड पर भूडी गंाव के पास जाम कर दिया। ग्रामीणों ने हरियाणा सरकार, बिजली विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मुर्दाबाद की नारेबाजी की। सुबह आठ बजे से लगे जाम को खुलवाने के लिए अधिकारियों के पसीने छूट गए। दोपहर लगभग दो बजे तक यानी छह घंटे जाम लगा रहा और दोनोें तरफ लंबी कतारें लग गईं। बाद में डीएसपी पंचकूला और बिजली निगम के अधिकारियों ने मौके पहुंचकर ग्रामीणों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद बड़ी मशक्कत करने पर उन्होंने ग्रामीणों को मनाकर जाम खुलवाया। इससे पहले मोरनी चौकी प्रभारी राकेश कुमार ने भी पूरे स्टाफ के साथ ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने उनकी एक न मानी।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा, नहीं जागे अफसर
बता दें कि अमर उजाला ने अपने वीरवार के अंक में इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित कर ग्रामीणों द्वारा दी गई चेतावनी से प्रशासन को अवगत कराया था। लेकिन सुस्त अधिकारियों को जगाने के लिए ग्रामीणों को जाम लगाना पड़ा। वहीं शुक्रवार को देर शाम
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ग्रामीणों की इस समस्या के समाधान के लिए बिजली निगम ने काम शुरू कर दिया था। इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से नाइटा के सरपंच रणबीर सिंह, धारटी के सरपंच बलदेव सिंह सहित भारी संख्या में ग्रामीणों हिस्सा लिया।
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अधिकारियों को जमकर लगाई फटाकर
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जैसे ही तीन पंचायतों के ग्रामीणों द्वारा सड़क जाम करने की भनक लगी तो वह मौके पर पहुंचने शुरू हो गए। जाम लगने के घंटों बाद ग्रामीणों को समझाने पहुंचे एसडीओ विकास लाठर व जेई इंद्रजीत को ग्रामीणों ने जमकर फटकार लगाई। अफसरों को इस दौरान भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों से उनकी नोकझोंक भी देखने को मिली। अंत में अफसरों ने नजरें झुका लीं। ग्रामीणों का आरोप था कि अधिकारी उनका फोन नहीं उठाते हैं। अगर उठा भी लें उनकी दिक्कतों को हलके में लेकर बहानेबाजी करते हैं और टरका देते हैं। लापरवाह अफसरों के कारण उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।
अफसरों ने माना, हम गुमराह करते हैं भोले भाले ग्रामीणों को
जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मोरनी की समस्याओं के समाधान को नजरअंदाज करना इस बात से जाहिर होता है कि वर्षों से पानी की समस्या जस की तस बनी हैं। धरने में बैठे कुछ ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से एक ही सीट पर जमे अफसरों ने मोरनी में ऐसा जाल बुना हुआ है कि किसी भी मामले में शिकायत होने पर चहेतों से अपने पक्ष में लिखवाकर उच्च अधिकारियों को गुमराह करते हैं। भोले भाले ग्रामीणों को गुमराह करने वाली बात को जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता ने लोगों के सामने स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें इस समस्या के बारे में अवगत नहीं कराया गया था।
आने वाली ग्रांट की जांच कराई जाए : ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना था कि मोरनी में जन स्वास्थ्य विभाग पीने के पानी की योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च रहा है। लेकिन यहां की बड़ी आबादी को पानी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों ने जन स्वास्थ्य विभाग तैयार की गई सभी योजनाओं, नई पानी की पाइपों की खरीद व चुनिंदा ठेकेदारों द्वारा ही किए जाने वाले काम की जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि हर साल टैंकरों से पानी सप्लाई के नाम पर खर्च किए जाने वाले भारी भरकम बजट की भी जांच कराई जाए। सरपंचों ने कहा कि मोरनी में आने वाली हर ग्रांट की जांच कराने के लिए वह जल्द सरकार के मंत्रियों से मिलेंगे।