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2014 के 14 मुद्दे: जो कभी पूरे ही नहीं हुए

Fri, 03 Oct 2014 12:40 PM IST
श्याम द्विवेदी/अमर उजाला, रोहतक
श्याम द्विवेदी/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 03 Oct 2014 12:40 PM IST
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14 Issues in Haryana Assembly Elections 2014

हरियाणा विधानसभा चुनाव के महासमर को जीतने के लिए लोकलुभावन घोषणाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस, भाजपा, इनेलो और हजकां ने घोषणा पत्र जारी कर दिया है। सभी दल मतदाताओं को लुभाने के लिए हर वर्ग का ख्याल रखने की कोशिश कर रहे हैं।

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कोई युवाओं को रोजगार दिला रहा है तो कोई बुजुर्गों की पेंशन बढ़ा रहा है। किसी ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात कही है तो कोई भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने का वादा कर रहा है।
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लेकिन सूबे में ऐसे भी मुद्दे हैं जो हर चुनाव में सामने आते हैं, जिन पर किसी दल को कुर्सी मिली और किसी की कुर्सी चली गई। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में अमर उजाला ऐसे 14 मुद्दों को आपके सामने रख रहा है, जिन पर आज तक पूरी तरह से अमल नहीं हो पाया।

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बिजली, पानी, हाईकोर्ट का मुद्दा

14 Issues in Haryana Assembly Elections 2014

1- 24 घंटे बिजली
किसी भी राज्य का विकास बिजली पर ही निर्भर करता है। इसीलिए यहां हर चुनाव में 24 घंटे बिजली देने का वादा होता रहा है लेकिन वह कभी पूरा नहीं हुआ। वर्ष 2000 में ओम प्रकाश चौटाला ने तो बिजली के बिल माफ कर मुफ्त 24 घंटे बिजली देने का वादा कर दिया था। लेकिन वह इस वादे को पूरा नहीं कर पाए और आखिर उनकी सरकार चली गई। इस बार फिर चुनावी घोषणा पत्र में उद्योग धंधों को सुधारने और आम आदमी को राहत देने के लिए 24 घंटे बिजली का वादा किया जा रहा है। अब यह कितना पूरा होगा यह तो समय ही बताएगा।

2- पीने का पानी
पीने के पानी समस्या सूबे के आधे जिलों में बनी हुई है। दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी, मेवात आदि जिलों में तो यह समस्या लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही है। इसके अलावा जींद, फतेहाबाद, सिरसा आदि जिलों में भी लोग इस समस्या से पीड़ित हैं। खुद मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिहं हुड्डा के गृह जनपद रोहतक में पीने के पानी के लिए प्रदर्शन होते रहते हैं। दशकों से सरकारें लोगों को शुद्ध पेयजल देने का वादा करती आ रही हैं लेकिन आज तक यह वादा पूरा नहीं हुआ है।

3- अलग हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा का संयुक्त हाईकोर्ट है। इसे लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। दशकों से हर दल यह घोषणा करता रहा है कि हरियाणा का अपना हाईकोर्ट होगा। लेकिन यह हाईकोर्ट कहां बनेगा, किस तरह से यह पंजाब हाईकोर्ट से अलग किया जाएगा इसका वास्तविक प्लान आज तक किसी ने नहीं दिया है।

चंडीगढ़, एसवाईएल, विकास

14 Issues in Haryana Assembly Elections 2014

4- चंडीगढ़ पर हक
पंजाब और हरियाणा दोनों राज्य चंडीगढ़ पर अपना हक जताते रहे हैं। हर चुनाव में यह मुद्दा सामने आता है। इसके लिए भी कभी किसी दल ने कोई प्रस्ताव बनाकर नहीं दिया। जबकि पंजाब में कभी इनेलो की सहयोगी शिअद की सरकार रही तो कभी कांग्रेस की ही सरकार रही तब भी इस विषय पर बात नहीं बनी।

5- एसवाईएल 

एसवाईएल (सतलुज-यमुना-लिंक ) मुद्दा पंजाब से हरियाणा के अलग होते ही शुरू हो गया था। इसी मुद्दे को उठाकर कई नेताओं ने अपनी सरकार बनाई लेकिन आज तक इसका हल नहीं निकल पाया है। इस बार फिर राजनीतिक दलों ने एसवाईएल के माध्यम से मतदाताओं को रिझाना शुरू कर दिया है।

6- विकास में भेदभाव
विकास में भेदभाव यहां हमेशा ही बड़े मुद्दे के रूप में सामने आता रहा। बंसीलाल की सरकार रही हो, देवीलाल की सरकार हो अथवा भजनलाल की सभी पर अपने-अपने क्षेत्र का विकास कराने का आरोप लगा। हाल यह है कि वर्तमान हुड्डा सरकार भी इसी मुद्दे से जूझ रही है। राव इंद्रजीत सिंह, विनोद शर्मा, चौधरी बीरेंद्रे सिंह जैसे कई दिग्गज नेता कांग्रेस पर विकास में भेदभाव का आरोप लगाकर पार्टी तक को अलविदा कह गए।

नौ‌करियां, भ्रष्टाचार और शिक्षा

14 Issues in Haryana Assembly Elections 2014

7- नौकरियों में क्षेत्रवाद
क्षेत्रवाद के हिसाब से नौकरी देने का आरोप यहां लगभग सभी मुख्यमंत्रियों पर लगा है। इस मामले में कभी हिसार का बोलबाला रहा तो कभी सिरसा का। भिवानी की चौधर में भिवानी वालों का जलवा रहा। वर्तमान समय में मुख्यमंत्री हुड्डा भी इसी आरोप से घिरे हैं।

8- भ्रष्टाचार

यह एक ऐसा मुद्दा है जो कई सरकारों को बना और बिगाड़ चुका है। हरियाणा के तीन लालों ने भी एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर कुर्सी हासिल की। वर्तमान समय में भी यह मुद्दा तूल पकड़े हुए है। भाजपा जहां कांग्रेस पर जमीनों की बिक्री में मोटी कमाई का आरोप लगा रही है वहीं अन्य पार्टियां नौकरी बेचने का।

9- प्राथमिक शिक्षा

प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यहां हर सरकार ने पानी की तरह पैसा बहाया है। लेकिन सरकारी स्कूलों के नतीजे ढाक के तीन पात ही हैं। कहीं अध्यापक हैं तो विद्यार्थी नहीं तो कहीं विद्यार्थी हैं तो अध्यापक नहीं।

किसी स्कूल में बैठने की व्यवस्था नहीं तो किसी के पास अपनी बिल्डिंग तक नहीं है। वर्तमान सरकार की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल दावा करती हैं कि स्कूलों में बैठने के लिए करोड़ों रुपये की ज्वाइंट बेंच खरीदी गईं लेकिन वह हैं कहां इसका पता नहीं चलता है।

बेरोजगारी, स्वास्‍थ्य सुविधाएं, अधिग्रहण

14 Issues in Haryana Assembly Elections 2014

10- स्वास्थ्य सुविधाएं
राज्य के सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पतालों की स्थिति दयनीय है। कहीं डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की कमी है तो कहीं अस्पताल संसाधानों के अभाव में जूझ रहे हैं। हर सरकार स्वास्थ्य सुविधाएं दुरुस्त करने के लिए बड़ी-बड़ी घोषणा करती है। लेकिन आम आदमी को आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

11- भूमि अधिग्रहण

- लंबे समय से यह मुद्दा हरियाणा को विवादों में रखे हुए है। कभी एनसीआर में भूमि अधिग्रहण तो कभी एसईजेड के लिए अधिग्रहण। राज्य में जमीन के इस कारोबार से नेता और भूमाफिया तो खूब फले फूले लेकिन सैकड़ों किसान अपनी जमीन देने के बाद सड़कों पा आ गए। वर्तमान सरकार भी जमीन के अधिग्रहण के विरोध का सामना कर रही है।

12- बेरोजगारी

बेरोजगारी दिन दूना रात चौगुना बढ़ती जा रही है। यहां शिक्षा के बड़े-बड़े केंद्र तो खुल गए पर रोजगार के संसाधन इनके मुकाबले मुहैया नहीं हो पाए। इससे बेरोजगारों भी भीड़ बढ़ती जा रही है। सरकार उन्हें स्वरोजगार के अवसर भी विधिवत उपलब्ध नहीं दे पा रही है।

कानून व्यवस्‍था, महिला सुरक्षा, फसल मूल्य

14 Issues in Haryana Assembly Elections 2014

13- कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा
हर सरकार के लिए यह दोनों बड़े विषय रहे हैं। कांग्रेस चौटाला सरकार पर गुंडागर्दी का आरोप लगाती रही है और इनेलो कांग्रेस राज्य में कानून व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप लगाती है। आरोप-प्रत्यारोप जो भी हों लेकिन हाल यह कि राज्य में खुलेआम लूट, हत्या, अपहरण जैसे मामले अकसर सामने आते रहते हैं। ऐसा ही कुछ हाल महिलाओं की सुरक्षा का है।

यहां नेता महिलाओं की सुरक्षा पर संजीदा बातें तो करते नजर आते हैं लेकिन धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आता। रेप, छेड़छाड़, दहेज प्रताड़ना जैसे मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। शिकवा शिकायत करने वाली महिलाओं को कभी पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये से जूझना पड़ता है तो कभी पंचायती फरमानों से।

14- फसल का उचित मूल्य

हर चुनाव में किसानों को फसल का उचित मूल्य देने का मुद्दा उठता रहा है। लेकिन आज तक इसका कोई पैमाना तय नहीं किया गया कि इसके निर्धारण का तरीका क्या होगा। किसानों को लुभाने के लिए हर सरकार अपने हिसार से फसलों का एमएसपी तय कर देती हैं। किसान इसका विरोध करते रहते हैं, जबकि होना यह चाहिए इसके लिए हर वर्ष महंगाई को मानक मानते हुए फसलों के एमएसपी भी तय किए जाने चाहिए।

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